जल संकट / राजेंद्र सिंह बोले- यही हाल रहा तो अगले साल तक देश के 90 शहर बेपानी हो सकते हैं



Water crisis in India
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Water crisis in India

  • नीति आयोग ने कहा, 2020 तक देश के 21 शहर डे जीरो हो जाएंगे यानी यहां खुद का पीने का पानी नहीं होगा
  • लगातार दो बार कमजोर मानसून के चलते देश की 50% आबादी सूखे की चपेट में
  • राजेंद्र सिंह के मुताबिक- बारिश का पानी इकट्ठा करें, इसी का बाहरी काम में इस्तेमाल करें

अक्षय बाजपेयी

अक्षय बाजपेयी

Jul 14, 2019, 11:29 AM IST

डेटा इंटेलीजेंस डेस्क. आधा देश अभी पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। मानसून की आमद के बीच आए दिन पानी के लिए खून-खराबे की खबरें मिल रही है। पिछले साल नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि 2020 तक देश के 21 शहर डे जीरो हो जाएंगे यानी इनके पास पीने के लिए खुद का पानी भी नहीं होगा। इसमें बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली और हैदराबाद जैसे शहर शामिल हैं।

 

केंद्र सरकार ने इस गंभीर समस्या को देखते हुए जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है। हालांकि सवाल ये खड़ा हो रहा है कि जिस देश में पूरे साल पर्याप्त पानी होता था, वहां इतनी भयंकर समस्या क्यों खड़ी हो गई? दैनिक भास्कर ऐप प्लस ने इस मुद्दे को लेकर जल पुरुष कहे जाने वाले डॉ.राजेंद्र सिंह से बातचीत की। साथ ही रिपोर्ट्स को खंगालकर पता किया कि पानी बचाने के लिए अब कौन से कदम उठाना जरूरी हैं। 

 

जो पानीदार देश था, वो बेपानी कैसे हो रहा है....
डॉ.राजेंद्र सिंह ने बताया कि पुराने समय में पानी आने से पाल बांधा जाता था, लेकिन अब सरकारें पानी बहने के बाद पाल बांधने की बात करती हैं। इसी कारण भारत जैसा पानीदार देश आज बेपानी होता जा रहा है। देश को पानीदार बनाना है तो वर्षा ऋतु से पहले सामुदायिक विकेंद्रित जल प्रबंधन करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया तो नीति आयोग ने 21 शहरों में ही पानी न होने की बात कही है, ये आंकड़ा बढ़कर 90 तक पहुंच सकता है और देश का आधा भू-भाग बेपानी हो सकता है। सरकारों को समाज को साथ जोड़कर पानी बचाने की मुहिम चलाना होगी।

 

डॉ. सिंह के मुताबिक, ‘‘सोलहवीं सदी में भारत में त्रिकुंडीय व्यवस्था थी। पहले एक कुंड में पानी जाता था। दूसरे में थोड़ा निथर (साफ होकर) कर जाता था और तीसरे में एकदम साफ हो जाता था। ये पानी को स्वच्छ करने का एक प्राकृतिक तरीका था। अंग्रेजों ने भारत की इस गहरी समझ को खत्म करने का काम किया और फिर सरकारें भी उन्हीं की कदम पर चलीं।

पानी की कहानी: 7 बिंदुओं की पड़ताल

  1. 50 प्रतिशत आबादी सूखे की चपेट में

    पिछले लगातार दो मानसून के कमजोर होने से देश के करीब 33.3 करोड़ लोग पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। करीब 50% लोग सूखे जैसी समस्या का सामना कर रहे हैं। इस साल पश्चिमी और दक्षिण के राज्यों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है, क्योंकि वहां पानी कम गिर रहा है। नीति आयोग द्वारा जारी संयुक्त जल प्रबंधन सूचकांक (Composite water management index) के मुताबिक देश के 21 बड़े शहर (चेन्नई, बेंगलुरू, दिल्ली, हैदराबाद) 2020 तक जीरो ग्राउंड वॉटर लेवल पर पहुंच जाएंगे। इसके चलते 10 करोड़ लोग प्रभावित होंगे।

     

    देश के लगभग 50 प्रतिशत लोग सूखे जैसी समस्या का सामना करते हैं

     

  2. 75 % घरों की जमीन में पानी नहीं

    नीति आयोग की कम्पोजिट वॉटर मैनेजमेंट इंडेक्स के मुताबिक, 75% घरों के पास अपनी जमीन में पीने का पानी और गांव के 84% घरों में पानी के लिए पाइप कनेक्शन नहीं है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, अभी भी भारत को हर साल बारिश से जरूरत से ज्यादा पानी मिलता है। भारत को हर साल 3 हजार बिलियन क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत होती है और हमें 4 हजार बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलता हैं। समस्या यह है कि बारिश के पानी का सिर्फ 8% ही हम इकट्ठा कर पाते हैं। यह दुनिया में सबसे कम है। वॉटर ट्रीटमेंट और उसके दोबारा इस्तेमाल करने के मामले में भी हम पीछे हैं। घरों में पहुंचने वाला 80% वेस्ट के रूप में बाहर हो जाता है। वहीं मरुस्थल में बसे इजराइल जैसे देश ने पानी की समस्या को खत्म कर दिया है।

     

    गांवों में अब भी पाइप के जरिए सभी जगह पानी नहीं पहुंच पा रहा

     

  3. 2030 तक दोगुनी हो जाएगी मांग

    सीडब्ल्यूएमआई रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक देश में पानी की मांग अभी हो रही आपूर्ति के मुकाबले दोगुनी हो जाएगी। इससे लाखों लोग पानी की समस्या से जूझेंगे। मोदी सरकार ने हाल ही में जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है। इस मंत्रालय को पानी की समस्या के निदान के लिए ही खासतौर पर बनाया गया है। मंत्रालय ने 2024 तक सभी घरों में पाइप के जरिए वॉटर कनेक्शन देने की योजना बनाई है। 

     

    2030 तक दोगुना हो जाएगी मांग

     

  4. भारत में इसलिए तेजी से खत्म हो रहा पानी

    दुनिया में भूजल (ग्राउंड वॉटर) का सबसे ज्यादा उपयोग भारत करता है। चीन और अमेरिका से भी इस मामले में हम आगे हैं। 2015 में स्टेंडिंग कमेटी ने पाया था कि भूजल का सबसे ज्यादा उपयोग कृषि और पीने के पानी की आपूर्ति के लिए किया जाता है। भूजल का करीब 89% सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है। 9% घरेलू कामों और कारखानों में केवल 2% उपयोग किया जाता है। शहरी क्षेत्र की 50% और ग्रामीण क्षेत्र की 85% जरूरतें भूजल से ही पूरी होती हैं। ज्यादा इस्तेमाल के चलते ही 2007 से 2017 के बीच भूजल स्तर में 61% की कमी आई। डॉ सिंह कहते हैं- कृषि में इसलिए ज्यादा पानी लगने लगा है क्योंकि अब भारत का किसान बदलते मौसम के मिजाज और जलवायु परिवर्तन का अंदाजा नहीं लगा पाता। किसान को यह भी पता नहीं होता कि कब कितनी बारिश होगी। इसलिए वो जमीन का पानी निकालकर ही सिंचाई करता है। पहले भारत में बुआई बारिश के जल से ही हो जाती थी। बहुत कम ही ऐसी नौबत आती थी कि धरती का जल बुआई के लिए खींचना पड़े, लेकिन अब पूरी खेती धरती का पेट काटकर ही होती है। इंजीनियर बढ़ने के कारण भी ये हालत बने हैं।

     

    Water

     

  5. शहरों को मिल रहा जरूरत से ज्यादा

    मौजूदा दौर में अभी लाखों लोगों को साफ पानी तक नहीं मिल पा रहा, ऐसे में मंत्रालय की हर घर में कनेक्शन देने की योजना को लागू करना आसान नहीं लगता। भारत में पानी की आपूर्ति भी व्यवस्थित ढंग से नहीं की जाती। बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई में निगम द्वारा निर्धारित 150 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (lpcd) से भी ज्यादा पानी दे दिया जाता है वहीं दूसरे कई क्षेत्रों में 40-50 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी ही सप्लाई हो पाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक, एक व्यक्ति को अपने जरूरतों को पूरा करने के लिए हर दिन करीब 25 लीटर पानी की जरूरत होती है। बाकी का पानी सफाई के नाम पर बर्बाद कर दिया जाता है। 

     

    बड़े शहरों में दे रहे जरूरत से ज्यादा

     

  6. तीन काम तुरंत करना चाहिए

    • सरकार को जल सुरक्षा अधिकार अधिनियम बनाना चाहिए। 
    • अधिनियम के पालन के लिए एक साक्षरता विभाग बनाना चाहिए, जो लोगों को पानी को लेकर जागरूक करे। 
    • भारत की जल संरचनाओं की जमीन को केवल जल संरचनाओं के लिए सुरक्षित करना चाहिए।

    Water

     

  7. ऐसे बचेगा पानी

    • आम लोग बारिश के पानी को संग्रहित कर सकते हैं। बड़े पात्रों में वर्षा जल को भरकर रख सकते हैं। इसी पानी को घरेलू कामों में जब तक हो सके, उपयोग करें। वर्षा जल भूजल से भी ज्यादा अच्छा होता है। 
    • नदी-नालों के पानी में गंदा पानी मिल रहा है। यही पानी जमीन में जा रहा है। इससे पीने का पानी घट रहा है और गंदा पानी बढ़ रहा है। गंदा पानी हम उपयोग में नहीं लेते। इसे समुद्र में बहा दिया जाता है। नदी-नालों में गंदगी को रोकना चाहिए। 
    • खेती और उद्योग में मानव द्वारा उपयोग किए गए जल को परिशोधित करके काम में लेना चाहिए। 
    • लीकेज रोकना होंगे। स्थानीय पानी के स्त्रोतों को पुनर्जीवित करना होगा। 
    • भारत अभी सिर्फ बारिश का 8% पानी ही कैप्चर कर पाता है, जो दुनिया में सबसे कम है, इसे बढ़ाना होगा। जहां भी पानी को रोका जा सकता है, वहां रोकना होगा। 
    • घरों का 80% पानी वेस्ट के तौर पर बह जाता है। ऐसे पानी को दोबारा प्रयोग के लिए तैयार करना होगा।

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