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#MeToo : 'साजिद खान ने मुझे अपना प्राइवेट पार्ट दिखाया, छूने के लिए कहा...' एक्ट्रेस के इस आरोप के बाद फिर चर्चा में आया सेक्शुअल हैरेसमेंट वर्ड; एक्सपर्ट ने बताया महिला के साथ ये छोटी सी छोटी चीज करना भी है अपराध

जबरदस्ती संबंध बनाना या छेड़खानी ही नहीं, ये सारी चीजें भी आती हैं सेक्शुअल हैरेसमेंट के दायरे में

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 12:01 AM IST
What Is Se-xual Harassment IPC Section and Punishments

न्यूज डेस्क। इन दिनों सुबह-शाम #MeToo कैंपेन से जुड़े नए किस्से सामने आ रहे हैं। नाना पाटेकर और तनुश्री दत्ता से शुरू हुआ ये सफर अब बॉलीवुड के साथ राजनीति और क्रिकेट से जुड़े कई लोगों के नाम सामने आ चुके हैं। डायरेक्टर साजिद खान पर उनकी पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर और एक्ट्रेस सलोनी चोपड़ा ने सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाया है। सलोनी का कहना है कि साजिद ने उनसे बिकिनी फोटोज मांगे। कई बार गलत जगह छुआ। यहां तक की काम के दौरान उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपने प्राइवेट पार्ट की ओर खींचा। जब उन्होंने मना किया साजिद ने अपना पैंट खोलकर दिखाया दिया।

#MeToo कैंपेन में सिंगर अभिजीत भट्टाचार्या और राइटर सुहेल सेठ पर जबरदस्ती किस करने के चलते सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वे कौन-सी छोटी-छोटी बातें हैं जो किसी इंसान को सेक्शुअल हैरेसमेंट का शिकार बना सकती है। इस बारे में मप्र हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट संजय मेहरा ने सभी चीजों को बारीकी से बताया।

सेक्शुअल हैरेसमेंट की सबसे छोटी कंडीशन

> किसी लड़की या महिला का पीछा करना
> किसी लड़की या महिला को बुरी नियत से देखना
> किसी लड़की या महिला से जबरदस्ती कॉन्ट्रैक्ट करना
> किसी लड़की या महिला का छुपकर फोटो लेना
> किसी लड़की या महिला को गलत नियत से छूना

IPC की धारा 354 में छेड़छाड़ की परिभाषा

किसी महिला को शारीरिक और मानसिक पीड़ा पहुंचाने के चलते इस धारा के तहत कार्रवाई होगी। शारीरिक पीड़ा से आशय है कि महिला की उसकी मर्जी के बिना या गलत नियत से छूना, या किसी तरह से उसके शरीर को हानि पहुंचाना। वहीं, मानसिक पीड़ा से आशय है कि महिला को छुपकर घूरना, गलत तरीके के देखना, उसकी मर्जी के बिना फोटो लेना या उसके फोटा का दुरुपयोग करना, या दुरुपयोग करने की मंशा रखना, उसकी मर्जी के बिना गलत साहित्य, फोटो या वीडियो दिखाना।

निर्भया केस के बाद सेक्शन 354 में किए बदलाव

संजय मेहरा ने बताया कि निर्भया केस के बाद IPC की धारा 354 में काफी चेंजेस किए गए हैं। अब इसे एंटी रेप लॉ कहा जाता है। जिसके बाद सेक्शुअल हैरेसमेंट की कंडीशन के चलते कम से कम 1 साल की सजा होगी। इसमें जमानत भी नहीं दी जाएगी।

> एंटी रेप लॉ 2013 से लागू हो चुका है। इसमें IPC की धारा-354 में कई सब सेक्शन जोड़े गए हैं। इसमें छेड़छाड़ से जुड़े अपराध के लिए अलग-अलग सजा का प्रावधान है।

> IPC की धारा-354 ए, 354 बी, 354 सी और 354 डी बनाया गया है। धारा 354 एक के चार पार्ट हैं। कोई शख्स किसी महिला के साथ सेक्शुअल नेचर का फिजिकल टच करता है या फिर ऐसा कंडक्ट दिखाता है, तो 354 ए पार्ट 1 लगेगा। इसमें 1 साल की सजा का प्रावधान है।

> सेक्शुअल डिमांड करने पर पार्ट 2, मर्जी के खिलाफ पोर्न दिखाने पर पार्ट 3 और सेक्शुअल कलर वाले कंमेंट पर पार्ट 4 लगता है। इन सभी पार्ट में 3 साल तक सजा का प्रावधान है।

> यदि कोई पुरुष किसी महिला के जबरन कपड़े उतरवाता है या फिर उकसाता है, तो धारा-354 बी के तहत केस दर्ज होगा। इसमें दोषी को 3 साल से लेकर 7 साल तक कैद की सजा का प्रावधान है। इसमें जमानत भी नहीं मिलेगी।

> महिला के छुपकर फोटो लेना और उसे शेयर करने पर IPC की धारा-354 सी लगेगी। इसमें दोषी को एक साल से तीन साल तक कैद का प्रावधान है।

> दूसरी बार दोषी पाए जाने पर 3 साल से 7 साल तक कैद की सजा हो सकती है। इसमें जमानत नहीं दी जाएगी।

> यदि किसी लड़की या महिला का पीछा किया जाता है या फिर जबरन कॉन्टैक्ट करने का प्रयास करते हैं, तब इसमें IPC की धारा-354 डी के तहत कार्रवाई होगी। इसमें दोषी को 3 साल तक कैद हो सकती है।

> इसके अलावा, सेक्शुअल हैरेसमेंट की अन्य किसी भी कंडीशन में 7 साल की सजा मिलेगी। सजा में जमानत नहीं दी जाएगी। कोर्ट जुर्माना भी लगा सकती है।

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