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भ्रष्टाचार के खिलाफ ये कैसी जीरो टॉलरेंस नीति:चार्जशीट के बाद भी सर्विस में 76 अफसर, सरकार चाहे तो कर सकती है कार्रवाई

नई दिल्ली6 महीने पहलेलेखक: मुकेश कौशिक
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जीरो टॉलरेंस नीति को सख्त करते हुए यह भी व्यवस्था है कि चार्जशीट दर्ज होने के बाद सरकार अदालती फैसले से पहले ही कार्रवाई कर सकती है। - Dainik Bhaskar
जीरो टॉलरेंस नीति को सख्त करते हुए यह भी व्यवस्था है कि चार्जशीट दर्ज होने के बाद सरकार अदालती फैसले से पहले ही कार्रवाई कर सकती है।
  • 3 साल में 112 अफसरों के खिलाफ चार्जशीट, इनमें से 36 अभी भी पद पर

केंद्र सरकार दर्जनों बार दोहरा चुकी है कि वह भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है। भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1988 में संशोधन कर रिश्वत को अपराध श्रेणी में रखा गया है। यह भी व्यवस्था की गई है कि जिन अफसरों के खिलाफ चार्जशीट दायर हो चुकी हो, उनके मामले में कोर्ट का फैसला आने से पहले विभाग कार्रवाई कर सकता है।

इसके बावजूद इस समय देश में ऐसे 76 अफसर हैं, जिनके खिलाफ सीबीआई चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, लेकिन वे अब अभी जिम्मेदार पदों पर बने हैं। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 3 साल में कुल 112 अफसरों के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दायर की है, इनमें से 76 अब भी सेवा में बने हुए हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रावधान के तहत आरोप सिद्ध होने पर सरकार अफसरों को सेवा से हटा सकती है। लेकिन, जीरो टॉलरेंस नीति को सख्त करते हुए यह भी व्यवस्था है कि चार्जशीट दर्ज होने के बाद सरकार अदालती फैसले से पहले ही कार्रवाई कर सकती है। उनके प्रमोशन को सील कवर में बंद रखा जा सकता है।

भ्रष्टाचार में मामले में राज्याें की सहमति का पेंच
सीबीआई के मामलों में एक बाधा राज्यों की ओर से राज्यों की सहमति’ का भी है। राज्य सरकार चाहे तो वह अपनी सहमति समाप्त कर सकती है और वहां सीबीआई कार्रवाई नहीं कर सकती। इस समय 8 राज्य हैं जो ‘सहमति’ वापस ले चुके हैं। केंद्र की शिकायत रही है कि इसे राज्य सरकारें हथियार बनाती हैं और अपने अधिकारियों को बचाने के लिए जब चाहे सहमति वापस ले लेती हैं।

कार्मिक मंत्रालय का कहना है कि एक बार जब सीबीआई या केंद्रीय सतर्कता आयुक्त का मामला दर्ज होने के बाद पूरा मामला उनके अधिकार क्षेत्र में आ जाता है तो सरकार ऐसे में मामलों में हस्तक्षेप से बचती है। सरकार इन एजेंसियों की स्वायत्ता का सम्मान करना चाहती है।

सीबीआई के दखल से बाहर 8 राज्य, 150 केस में अनुरोध लंबित सीबीआई के दखल से बाहर ये 8 राज्य, इनमें मिजोरम को छोड बाकी सभी में गैर भाजपा यानी विपक्षी दलों की सरकारें : छत्तीसगढ, महाराष्ट्र, झारखंड, पंजाब, राजस्थान, मिजोरम, केरल और पश्चिम बंगाल। इन राज्यों में 150 से अधिक मामलों में जांच के लिए सीबीआई के अनुरोध पत्र लंबित हैं। जिन राज्यों ने सहमति नहीं है दी है, उनके जुड़े मामलों में सीबीआई को राज्य सरकार से हर केस की जांच के लिए अलग से अनुमति मांगनी पडती है। इन राज्यों में केंद्र के अफसरों के खिलाफ सीबीआई कोई ताजा मामला भी दर्ज नहीं सकती।