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भास्कर एक्सप्लेनर:निजता के हनन का मुद्दा उठाकर यूजर्स को वंचित रखना चाह रही वॉट्सएप

23 दिन पहलेलेखक: पवन दुग्गल, सायबर एक्सपर्ट
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आईटी नियमों ने पहली बार यूजर्स को उनकी शिकायतों का समाधान दिया। - Dainik Bhaskar
आईटी नियमों ने पहली बार यूजर्स को उनकी शिकायतों का समाधान दिया।

निजता को लेकर सरकार और वॉट्सएप आमने-सामने हैं। बुनियादी सवाल यह है कि सरकार अधिकार का इस्तेमाल करते हुए साइबर अपराध से निपटने के लिए जानकारी मांग सकती है या नहीं? वॉट्सएप कह रही है कि इससे निजता के अधिकार का हनन होगा। हालांकि यह अदालत को ही तय करना है कि क्या होना चाहिए?

क्या सरकार वॉट्सएप से सूचना मांग सकती है?
सरकार प्रत्येक यूजर्स के मैसेज के पीछे नहीं जा रही है, वह केवल सीमित आधार पर सूचना मांग सकती है। वह आधार हैं- भारत की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा, पड़ोसी देशों के साथ मैत्री संबंध, कानून व्यवस्था (दंगा व आतंकवाद से जुड़े), दुष्कर्म से संबंधित, अश्लीलता व बच्चों के यौनशोषण से जुड़े मुद्दे। यानी ऐसे मामले जिनमें कम से कम 5 साल की कैद का प्रावधान है।
क्या सभी मैसेज सरकार पढ़ सकती है?
सरकार का उद्देश्य यह नहीं है कि हर यूजर की सूचना दो, वह केवल साइबर क्राइम के मामलों में फर्स्ट ओरिजनेटर (स्रोत) की जानकारी मांगना चाहती है। बल्कि क्या मैसेज भेजा, वह भी मत दो। बस इतना बताएं कि सबसे पहले इसे किसने भेजा।
कंटेंट से जुड़े नियम क्या कहते हैं?
रूल्स कहते हैं कि कंटेंट सरकार को नहीं दिया जा सकता, इसलिए दोनों पक्षों को सामंजस्य बिठाना होगा। लेकिन वॉट्सअप का यह कहना बेमानी है कि यह निजता का हनन है। वह इस तर्क में कानूनी रूप से कामयाब नहीं हो सकेगी।
सरकार किन तर्कों पर मजबूत दिखती है?
एंड टू एंड इन्क्रिप्शन हो, साइबर अपराधी उसका उपयोग करें और आप जानकारी नहीं देंगे, तो यह बात अदालत में खरी उतरने वाली नहीं है। निजता का अधिकार असीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जीने के मौलिक अधिकार में निजता का अधिकार भी शामिल है और इसे तब तक नहीं छीना जा सकता, जब तक कि इसके लिए कानून द्वारा स्थापित कोई प्रक्रिया न हो। आईटी रूल्स कानून द्वारा स्थापित हैं, तो जो आधार दिया जा रहा है उसे चुनौती नहीं दी सकती।
वॉट्सएप को नियमों से क्या दिक्कतें हैं?
उसे व्यावसायिक हितों की रक्षा करनी है। नियम लागू हो गए तो नए खर्चे होंगे, सिस्टम विकसित करना होगा, लोगों को रखना होगा। उसने बहुत सोची समझी रणनीति के तहत सबकुछ किया है। उसे 25 फरवरी से ही मालूम था कि आईटी के नए रूल्स आ गए हैं, जिन्हें 90 दिन के अंदर लागू करना है। पर उसने 90वें दिन शाम को याचिका दाखिल की। साफ है कि ये देरी करने, टालने और यह सुनिश्चित करने के तरीके हैं कि कोई भारतीय कानून उन पर लागू न हो। लेकिन ऐसा लगता नहीं।

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