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फ्लैशबैक / जब सिर्फ 1 वोट से सरकार गिरी, राजाओं की गद्दी गई...और हिटलर आ गया

अगर आपको लगता है ‘मेरे एक वोट से क्या होगा’ तो आपको ये 7 किस्से जरूर पढ़ने चाहिए

When the government fell by just 1 vote
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When the government fell by just 1 vote

  • फ्रांस में तो एक वोट की जीत से ही राजतंत्र खत्म हुआ
  • जर्मनी में एक वोट से जीतकर हिटलर नाजी दल का मुखिया बना था

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 07:08 AM IST

जयपुर. इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है, जब महज एक वोट की हार से तख्तापलट हो गया। अटल बिहारी वाजपेयी और सीपी जोशी...इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं। फ्रांस में तो एक वोट की जीत से ही राजतंत्र खत्म हुआ। वहीं, जर्मनी में एक वोट से ही जीतकर हिटलर नाजी दल का मुखिया बन गया था...।

 

अटल बिहारी वाजपेयी (13 महीने की सरकार गिरी)

1999 : एआईएडीएमके के समर्थन वापस लेने के बाद वाजपेयी सरकार को विश्वास प्रस्ताव रखना पड़ा। विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 269 और विरोध में 270 वोट पड़े और सरकार गिर गई।

 

सीपी जोशी, कांग्रेस नेता (हार से मुख्यमंत्री नहीं बन सके)

2008 : राजस्थान विधानसभा के चुनाव में सीपी जोशी को 62 हजार 215 और कल्याण सिंह को 62 हजार 216 वोट मिले। तब जोशी मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। खास ये कि उनकी मां, पत्नी और ड्राइवर ने वोट नहीं डाला था।

 

एआर कृष्णमूर्ति, जेडीएस (विधायक बनने से चूके)

2004 : कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जेडीएस के एआर कृष्णमूर्ति को 40 हजार 751 मत मिले और कांग्रेस के आर ध्रुवनारायण को 40 हजार 752। छुट्‌टी न देने के कारण उनका ड्राइवर वोट नहीं डाल पाया था।

 

अमेरिका की भाषा बदली (वरना मातृभाषा जर्मन होती)

1776 : अमेरिका को एक वोट की बदौलत ही जर्मन की जगह अंग्रेजी के रूप में उनकी मातृभाषा मिली थी। यहां 1910 में रिपब्लिक उम्मीदवार एक वोट से हार गया था और पार्टी मानो शोक में डूब गई थी। 

 

रदरफाेर्ड बी हायेस (अमेरिकी राष्ट्रपति बने)

1876 : 19वें अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में रदरफोर्ड बी हायेस ने 185 वोट हासिल किए थे और सैमुअल टिलडेन ने 1841 जबकि शुरुआती दौर में टिलडेन 2.5 लाख वोट से जीते थे।

 

फ्रांस में राजशाही खत्म (लोकतंत्र शुरू हुआ) 
1875 : फ्रांस में तो सत्ता का पूरा रूप ही बदल गया था। एक वोट की जीत से ही फ्रांस में राजशाही खत्म हुई और लोकतंत्र का आगाज हुआ। वरना वहां के लोग अब तक राजशाही ही ढो रहे होते। 

एडोल्फ हिटलर, जर्मनी (नाजी दल का मुखिया बना) 
1923 : जर्मनी के लोगों से पूछिए एक वोट की ताकत क्या होती है, क्योंकि साल 1923 में एडोल्फ हिटलर एक वोट के अंतर की जीत से ही नाजी दल का मुखिया बना था। 

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