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फैसला / कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा- महिला की आय पर्याप्त तो वो गुजारा भत्ता की हकदार नहीं

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 05:13 PM IST



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • तलाक के केस में कोलकाता हाईकोर्ट ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला
  • महिला की कमाई पर्याप्त होने पर नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता
     

नेशनल डेस्क. कोलकाता उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि अगर महिला की मासिक आय पर्याप्त है तो वो अपने पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है। न्यायालय ने ये बात तलाक के एक मामले की सुनवाई के दौरान कही, जिसमें 74 हजार रुपए से ज्यादा की मासिक वेतन वाली महिला अपने पति से रहन सहन के लिए मासिक भत्ता मांग रही थी। अदालत ने उसकी मांग को भी खारिज कर दिया। 

 

महिला का पति मांग रहा है तलाक

 

तलाक का केस महिला के पति ने उस पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए दायर किया है। जिसके बाद महिला ने भरण पोषण के लिए हर महीने 50 हजार रुपए की मांग की थी। इस मामले में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बिस्वजीत बासु ने कहा, 'महिला का वेतन 74 हजार रुपए महीने से ज्यादा है, जो कि उसके लिए पर्याप्त है।' 

 

निचली अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका

 

महिला की आर्थिक स्थिति का पता चलने पर निचली अदालत ने भी उसकी मांग खारिज करते हुए उसे अंतरिम गुजारा भत्ता दिलवाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने मार्च 2016 में उसके पति को मुकदमे के खर्चे के रूप में उसे 30 हजार रुपए महीना देने का आदेश दिया था। जिसके खिलाफ उसने कोलकाता उच्च न्यायालय में याचिका लगा दी।

 

पति की कमाई के हिसाब से मांग रही गुजारा भत्ता

 

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि महिला के पति की कमाई करीब 83 लाख रुपए (1.2 लाख डॉलर) सालाना है। ऐसे में उसे गुजारा भत्ता भी पति की कमाई के हिसाब से यानीकि 50 हजार रुपए महीना मिलना चाहिए।

 

महिला का वेतन है 74 हजार रुपए से ज्यादा

 

कोर्ट में दिए वेतन प्रमाण पत्र (सैलरी सर्टिफिकेट) से पता चला कि महिला को दिसंबर 2018 और जनवरी 2019 में 74,624 रुपए का वेतन मिला, वहीं मार्च 2019 में उसे 81,219 रुपए का वेतन मिला। जिसके बाद हाईकोर्ट ने उसकी मांग खारिज करते हुए कहा, 'महिला के मुताबिक उसकी मासिक जरूरत 50 हजार रुपए की है, ऐसे में उसके गुजारे के लिए उसका वेतन पर्याप्त है।'

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