ग्राउंड रिपोर्ट / बिहार: क्या भाजपा का वोट जदयू को मिलेगा? यही सवाल



Will JD(U) get BJP's vote in bihar
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Will JD(U) get BJP's vote in bihar

  • दूसरे चरण की पांचों सीट पर भाजपा नहीं जदयू लड़ रही है 
  • 10 साल बाद भाजपा व जदयू फिर लाेकसभा का चुनाव साथ लड़ रहे हैं

ओम गौड़

ओम गौड़

Apr 17, 2019, 03:00 AM IST

पटना. बिहार में दूसरे चरण का चुनाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। पांचों सीटों पर जदयू प्रत्याशी लड़ रहे हैं। किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार पर उसका कांग्रेस से मुकाबला है तो बांका और भागलपुर में राजद से। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भागलपुर में रैली कर चुके हैं तो राहुल गांधी कटिहार और पूर्णिया में सभाएं कर चुके हैं। 

 

भाजपा दूसरे चरण में  चुनाव नहीं लड़ रही है, लेकिन वह जदयू के पक्ष में माहौल बना रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ-संघनिष्ठ कार्यकर्ताअाें ने इन क्षेत्राें में डेरा डाल रखा है। पांचों सीटों पर लगभग मुकाबला सीधा है। जदयू के सामने सबसे बड़ा संकट बंटवारे में भाजपा के हिस्से वाली बांका, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया सीट है, जहां भाजपा का कैडर वोट आसानी से शिफ्ट हाेता नहीं दिख रहा। पार्टी यहां वोटों को पोलराइज करने का खतरा भी इसलिए मोल नहीं ले सकती, क्योंकि उसे दूसरी सीटों पर इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

 

इलाके में कहीं चुनाव प्रचार नजर नहीं आता। पार्टियों और प्रत्याशियों ने गांव-गांव में चुनावी सभाओं को ही प्रचार का जरिया बना रखा है। सड़कों पर भाजपा के प्रचार वाहन जरूर नजर आते हैं। कांग्रेस लड़ने काे ताे दूसरे दौर की तीन सीटों पर लड़ रही है। लेकिन कहीं लड़ती नजर नहीं आती। वह  पूरी तरह वाेट बैंक के भराेसे है। यही हाल लालू की पार्टी का है। कांग्रेस-राजद मानकर चल रही है कि जातिगत आधार पर वे मजबूत हैं। इसलिए पूरी ताकत जातिगत नाकेबंदी में लगा रखी है। 


चुनाव प्रचार में कहीं भी कोई मुद्दा नहीं है। तेजस्वी सभाओं में शराबबंदी, शिक्षा-चिकित्सा जैसे मुद्दे उठा रहे हैं तो नीतीश प्रदेश में किए काम गिना रहे हैं। कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी के 5 साल के कार्यकाल को खारिज कर रहे हैं। नोटबंदी, जीएसटी के अलावा वे जोर-शोर से रफाल में दलाली का मुद्दा उठा रहे हैं। मुस्लिम बाहुल्य इस क्षेत्र में महागठबंधन के बिखराव की खबरें भी हैं। तेजस्वी कांग्रेस पर तो कांग्रेस का तेजस्वी पर कोई फोकस नहीं है।

 

पांचों सीटों का राजनीतिक इतिहास यह रहा है कि यहां भाजपा बहुत प्रभावशाली नहीं रही। शाहनवाज हुसैन एक बार किशनगंज और एक बार भागलपुर से सांसद रहे हैं। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद शाहनवाज भागलपुर से हार गए थे। शायद यही वजह रही कि एनडीए के सीट बंटवारे में भाजपा ने ये पांचों सीटें जदयू को दे दी। वर्तमान में किशनगंज सीट कांग्रेस, पूर्णिया जदयू, कटिहार कांग्रेस, बांका राजद और भागलपुर राजद के पास है। 

 

कहां, कौनसा राजनीतिक फैक्टर?

 

भागलपुर: भाजपा का कैडर वोट पाना चुनौती

राजद और जदयू में सीधा मुकाबला। यहां राजद से बुलो मंडल तो जदयू से अजय मंडल मैदान में हैं। दोनों गंगौता जाति से हैं। जदयू के सामने भाजपा के कैडर समर्थकों को एकजुट करने की बड़ी चुनौती है। शाहनवाज हुसैन को टिकट नहीं मिलने से भितरघात का खतरा है। यहां मल्लाह-मांझी की ताकत भी निर्णायक रहेगी।

 

पूर्णिया: महागठबंधन में भितरघात की आशंका
जदयू प्रत्याशी संतोष कुशवाहा और महागठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह के बीच मुकाबला है। भाजपा से दो बार सांसद रहे पप्पू सिंह ने जब देखा कि सीट जदयू को जा रही है तो वे कांग्रेस में चले गए। महागठबंधन में भितरघात की आशंका है। टिकट नहीं मिलने से यहां भाजपा कार्यकर्ताओं में निराशा। 

 

बांका: त्रिकोणीय मुकाबले में फंस गई सीट
राजद प्रत्याशी जयप्रकाश नारायण, जदयू प्रत्याशी गिरिधारी यादव और भाजपा की बागी निर्दलीय प्रत्याशी पुतुल कुमारी में मुकाबला। देखना होगा ‘माय’ (मुस्लिम, यादव) समीकरण में गिरिधारी किस हद तक सेंधमारी कर पाते हैं। गिरिधारी यादव अगड़ी, कोइरी, कुर्मी और यादव बहुल क्षेत्र में वोट पाने का प्रयास कर रहे हैं।  जाति और वर्गों का वोट पुतुल के पक्ष में है। 

 

कटिहार: राकांपा रोक सकती है कांग्रेस की राह
कांग्रेस के तारिक अनवर और जदयू प्रत्याशी दुलाल गोस्वामी के बीच मुकाबला है। राकांपा के मोहम्मद शकूर...तारिक अनवर के लिए परेशानी बन सकते हैं। वे शेरशाहबादी मुसलमानों के 20-25 हजार वोट भी काट लेते हैं तो तारिक की राह आसान नहीं रहेगी। दूसरी तरफ, भाजपा में भितरघात की आशंका।

 

किशनगंज: मुस्लिम फैक्टर से फैसला 
यहां 70%आबादी मुस्लिमों की है। कांग्रेस से डॉ. जावेद आजाद, जदयू से सैयद महमूद अशरफ और एआइएमआइएम से अख्तरुल ईमान मैदान में हैं। एआइएमआइएम से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। इस बार यहां भाजपा उम्मीदवार मैदान में नहीं है। यहां पर हिंदू वोटरों ने अब तक अपना पत्ता नहीं खोला है।

 

लाेकसभा चुनाव में विधानसभा की तैयारी

 

  • एनडीए इस चुनाव को विधानसभा चुनाव की तैयारियाें के रूप में ले रहा है। लाेकसभा चुनाव में जदयू के नीतीश अकेले एेसे मुख्यमंत्री हाेंगे जाे प्रदेश के सभी 40 लाेकसभा क्षेत्राें  की 243 विधानसभा सीटों में से करीब 220 क्षेत्राें में जाने की याेजना के अंतर्गत प्रचार कर रहे हैं।
  • दूसरी तरफ महागठबंधन की स्थिति  विपरीत है। सीट बंटवारे के बावजूद कहीं न कहीं मनमुटाव की स्थिति से नहीं उबरे हैं। बगावत के स्वर भी सुनाई पड़ रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने पार्टी प्रवक्ता पद से इस्तीफा देकर मधुबनी से चुनाव लड़ने का एेलान कर दिया है ताे राजद के नेता अली अशरफ फातमी भी पार्टी लाइन से अलग मधुबनी से ही चुनाव लड़ सकते हैं।

 

इंटरेस्टिंग फैक्ट्स

 

  • 2009 चुनाव भाजपा-जदयू ने साथ लड़ा। 32 सीटें जीतीं।
  • 2010 विधानसभा चुनाव भाजपा और जदयू ने साथ लड़ा। लालू 22 सीट पर सिमटे।
  • 2014 चुनाव भाजपा-जदयू ने अलग लड़ा ताे कांग्रेस और राजद ने साथ। एनडीए काे 32, जदयू काे महज 2 सीट, राजद काे 4 सीटें ही मिलीं।
  • 2015 विधानसभा चुनाव कांग्रेस, जदयू और राजद साथ लड़े। 243 में 177 सीटें जीती।

 

(लेखक दैनिक भास्कर बिहार के स्टेट एडिटर हैं)

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