100 साल में पहली बार महिलाएं करेंगी संघ का नेतृत्व:2025 तक सह-कार्यवाह और सह-सरकार्यवाह की जिम्मेदारी मिल सकती है

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: सुजीत ठाकुर

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में जल्द ही सह-कार्यवाह और सह-सरकार्यवाह पद की जिम्मेदारी महिलाओं को मिल सकती है। संघ की स्थापना की 100वीं वर्षगांठ (2025) तक राष्ट्र सेविका समिति में शामिल महिलाओं को संघ में लाया जा सकता है। संघ के 97 साल के इतिहास में कोई महिला इस पद पर नहीं रही है।

सूत्रों का कहना है कि महिलाओं को प्रमुख पदों की नियुक्ति देने पर संघ में सहमति बन चुकी है। इसी को देखते हुए पहली बार नागपुर में संघ के दशहरा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पर्वातारोही संतोष यादव को आमंत्रित किया गया है। संतोष यादव पहली महिला होंगी, जो इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगी।

संघ के सामने कई बार यह प्रश्न उठता रहा है कि संगठन के ढांचे में शीर्ष स्थानों पर महिलाएं क्यों नहीं हैं। लिहाजा संघ में सहमति बनी है कि सह कार्यवाह और सह सरकार्यवाह की जिम्मेदारी महिलाओं को दिया जाना चाहिए। आने वाले समय में राष्ट्र सेविका समिति से जुड़ी स्वयं सेविकाओं को संघ में आने का मौका मिलेगा।

संघ में 1936 से अहम भूमिका निभा रहीं महिलाएं
संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि लंबे समय से आरोप लगता रहा है कि संघ देश की आधी आबादी से कटा हुआ है। लेकिन, ऐसा नहीं है। संघ की स्थापना के 11 साल बाद 1936 से संघ में महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं के लिए बाल शाखा, तरुण शाखा और राष्ट्र सेविका समिति है। देशभर में राष्ट्र सेविका समिति की 3500 से अधिक शाखाएं हैं। वर्तमान में शांतक्का इसकी प्रमुख हैं।

राष्ट्र सेविका समिति से जुड़ी महिलाएं भाजपा में प्रमुख पदों पर पहुंची हैं। इनमें सुषमा स्वराज और सुमित्रा महाजन जैसी बड़ी नेता शामिल हैं।
राष्ट्र सेविका समिति से जुड़ी महिलाएं भाजपा में प्रमुख पदों पर पहुंची हैं। इनमें सुषमा स्वराज और सुमित्रा महाजन जैसी बड़ी नेता शामिल हैं।

संघ प्रमुख मोहन भागवत से सवाल पूछने के बाद शुरू हुआ मंथन
पिछले साल दिल्ली में विदेशी प्रतिनिधियों ने बातचीत के दौरान संघ प्रमुख भागवत से इस संबंध में कई सवाल किए थे। इसके बाद ही महिला स्वयंसेविकाओं को जिम्मेदारी देने को लेकर गंभीरता से मंथन शुरू हुआ। संघ के सदस्य जब दशहरा कार्यक्रम के लिए संतोष यादव को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करने के लिए गए तो वहां भी महिलाओं को लेकर संघ की सोच पर बात हुई थी। इसके बाद ही संघ इस फैसले पर पहुंचा।

अहम विषयों पर चिंतन से महिलाएं दूर
संघ से जुड़े लोग बताते हैं कि संघ की जब स्थापना हुई थी, उस वक्त संघ के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए घर के पुरुष सदस्यों से ही बातचीत होती है। अब महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर रही हैं। ऐसे में अगर पुरुष पदाधिकारियों के बराबर महिला पदाधिकारी भी संघ की जिम्मेदारी निभाएं तो अच्छी पहल होगी।