सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को मिलेगा प्रवेश, सुप्रीम कोर्ट ने 800 साल पुरानी प्रथा बदली / सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को मिलेगा प्रवेश, सुप्रीम कोर्ट ने 800 साल पुरानी प्रथा बदली

dainikbhaskar.com

Sep 28, 2018, 11:18 AM IST

पहले 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर थी पाबंदी

women of all age groups will now be allowed in Keralas Sabarimala temple

नेशनल डेस्क/ नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने और पूजा करने की इजाजत दे दी। पहले यहां 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। यह प्रथा 800 साल से चली आ रही थी। एक याचिका में इसे चुनौती दी गई थी। केरल सरकार मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में थी। सबरीमाला मंदिर का संचालन करने वाला त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड अब कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी में है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां : महिलाएं पुरुषों से कमतर नहीं

  • चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने शुक्रवार को सुनाए फैसले में कहा, ‘सभी अनुयायियों को पूजा करने का अधिकार है। लैंगिक आधार पर श्रद्धालुओं से भेदभाव नहीं किया जा सकता।’
  • ‘10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं को मंदिर में जाने से रोकने की प्रथा संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है।’
  • ‘भगवान अय्यप्पा के सभी भक्त हिंदू हैं। यह कोई अलग धार्मिक समुदाय नहीं है। सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की जो बंदिशें लगाई गई हैं, उन्हें अनिवार्य धार्मिक प्रथा करार नहीं दिया जा सकता।’
  • ‘‘महिलाएं पुरुषों से कमतर नहीं हैं। एक तरफ आप महिलाओं को देवी की तरह पूजते हैं, दूसरी तरफ उन पर बंदिशें लगाते हैं। भगवान के प्रति आस्था शारीरिक या जैविक आधार पर परिभाषित नहीं की जा सकती।’’
  • ‘‘सबरीमाला मंदिर की प्रथा हिंदू महिलाओं के अधिकारों का हनन करती है। कानून और समाज का काम यह है कि वे बराबरी बनाए रखें। भगवान के प्रति उपासना में भेदभाव नहीं बरता जा सकता।’’
  • ‘‘धर्म जीवन को देवत्व से जोड़ने के लिए होता है। समाज के पुरुष प्रधान या पितृसत्तात्मक होने की धारणा बताकर आप अनुयायियों में भेदभाव नहीं कर सकते।’’

मान्यता के आधार पर प्रवेश से नहीं रोक सकते
सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई को संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 (धार्मिक स्वतंत्रता) का जिक्र करते हुए कहा था कि किसी व्यक्ति को मान्यताओं के आधार पर मंदिर में प्रवेश करने से नहीं रोक सकते। बोर्ड अगर मान्यताओं की बात करता है तो साबित करे कि महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी धार्मिक प्रथाओं का अभिन्न अंग है। क्या सिर्फ माहवारी से ही महिलाएं मलिन हो जाती हैं? कोर्ट का यह भी कहना था कि 10 से 50 साल की उम्र तय करने का तार्किक आधार क्या है? लड़की काे नौ साल की उम्र में मासिक धर्म शुरू हो जाए या 50 की उम्र के बाद भी जारी रहे तो क्या होगा?

अय्यप्पा स्वामी को माना जाता है ब्रह्मचारी
केरल में शैव और वैष्णवों में बढ़ते वैमनस्य के कारण एक मध्य मार्ग की स्थापना की गई थी। इसके तहत अय्यप्पा स्वामी का सबरीमाला मंदिर बनाया गया था। इसमें सभी पंथ के लोग आ सकते थे। ये मंदिर 800 साल पुराना माना जाता है। अयप्पा स्वामी को ब्रह्मचारी माना गया है। इसी वजह से मंदिर में उन महिलाओं का प्रवेश वर्जित था जो रजस्वला हो सकती थीं।

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