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30 साल पुराने एयरफोर्स अफसर की हत्या के मामले में यासीन मलिक के खिलाफ सबूत मिले

3 वर्ष पहले
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यासीन मलिक को पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया था।-(फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
यासीन मलिक को पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया था।-(फाइल फोटो)
  • जम्मू की टाडा कोर्ट में एयरफोर्स अधिकारी रवि खन्ना समेत तीन जवानों की हत्या मामले की सुनवाई चल रही
  • यासीन इस मामले में 19 साल तक जमानत पर रहा था, पिछले साल अक्टूबर में उसे गिरफ्तार किया गया था

श्रीनगर. जम्मू के टाडा कोर्ट को एयरफोर्स अफसर समेत तीन जवानों की हत्या के मामले में अलगाववादी नेता यासीन मलिक और छह लोगों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं। यह मामला 30 साल पुराना है। शनिवार को कोर्ट ने कहा कि इस बात का अनुमान लगाने के पर्याप्त आधार है कि यासीन मलिक और अन्य सभी आरोपी स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना समेत वायुसेना के तीन जवानों की हत्या में प्रथम द्रष्टया शामिल थे। कोर्ट ने मामले के सभी आरोपियों पर आरपीसी की धारा 302,307, टाडा एक्ट 1987 और आर्म्स एक्ट 1959 समेत अन्य धाराओं में अलग-अलग आरोप तय करने का आदेश दिया।


 यासीन मलिक और इस मामले का एक अन्य आरोपी शौकत बख्शी कोर्ट की कार्यवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देख रहा था। सुरक्षा कारणों से उसे कोर्ट में व्यक्तिगत तौर पर पेश नहीं किया गया था। 

यासीन इस मामले में 19 साल तक जमानत पर रहा
रवि खन्ना समेत तीन अन्य अधिकारी 25 जनवरी 1990 को श्रीनगर के एयरफोर्स बेस जा रहे थे, तभी आतंकवादियों ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में वायुसेना के दो अधिकारियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दो को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। इस हमले में वायुसेना के 40 अधिकारी घायल हो गए थे। यासीन इस मामले में 19 साल तक जमानत पर रहा था। पिछले साल उसे गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से ही वह जेल में हैं। यासीन के खिलाफ टेरर फंडिंग और मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी के अपहरण का मामला भी दर्ज है। 

अप्रैल 2019 में नए सिरे से शुरू हुई सुनवाई
सीबीआई ने 1990 में ही यासीन मलिक के खिलाफ दो मामले में चालान पेश किया था। हालांकि, 1995 में यासीन ने कोर्ट में याचिका दायर कर सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। कोर्ट ने यह याचिका स्वीकार कर ली थी। 2008 में यासीन ने इस मामले को जम्मू से श्रीनगर शिफ्ट करने भी याचिका लगाई थी। हालांकि, यह मामला जम्मू कोर्ट में ही लंबित रहा। अप्रैल 2019 में सीबीआई ने यासीन की याचिका को चुनौती दी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। इसके बाद मामले की सुनवाई नए सिरे से शुरु हुई।