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रामदेव की मुश्किल बढ़ी:दिल्ली हाईकोर्ट ने समन जारी किया, कोरोनिल मामले में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने लगाई थी अर्जी

4 महीने पहले
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रामदेव ने एलौपैथी को बकवास और दिवालिया साइंस बताया था।- फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
रामदेव ने एलौपैथी को बकवास और दिवालिया साइंस बताया था।- फाइल फोटो।

एलोपैथी के खिलाफ और कोरोनिल के समर्थन में योगगुरु रामदेव के बयान के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। इस मामले में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (DMA) ने पिटीशन फाइल की थी। DMA ने कोर्ट से अपील की थी कि रामदेव को झूठे बयान देने और पतंजलि की कोरोनिल टैबलेट का प्रचार करने से रोकना चाहिए। DMA की अर्जी पर हाईकोर्ट ने रामदेव को समन जारी कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

दरअसल रामदेव ने कहा था कि एलोपैथी बकवास और दिवालिया साइंस है। इस बयान को लेकर DMA का कहना है कि रामदेव के बयान से तमाम डॉक्टर आहत हुए हैं।

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DMA के वकील: बाबा रामदेव कह रहे हैं कि एलोपैथिक दवाओं की वजह से लाखों लोग मरे हैं। वे कहते हैं कि हम मूर्ख हैं। यह एक दिवालिया विज्ञान है। हम लाखों लोगों का इलाज कर रहे हैं। आज हमें योद्धा बुलाया जाता है। हमारे 600 लोगों की मौत हो चुकी है। फिर भी हमारा अपमान किया जा रहा है।

हाईकोर्ट: आपने मानहानि का मुकदमा दाखिल नहीं किया है। रामदेव एक व्यक्ति हैं। उनमें ऐलोपैथिक को लेकर आस्था नहीं है। उनका मानना है कि योग और आयुर्वेद से सब कुछ ठीक हो सकता है। यह सही या गलत हो सकता है। इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।

अदालत यह नहीं कह सकती कि कोरोनिल का इलाज सही है या नहीं। यह ऐसा मामला है जिसे देखने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों की जरूरत होती है।

मान लीजिए कि 10 हजार लोग कोरोनिल खरीदते हैं। मान लें कि साढ़े नौ हजार मर गए। उन्हें लगा कि कोरोनिल काम करेगा। आप प्रेस में जाएं और कहें कि देखिए कोरोनिल ने 95% की हत्या की है। क्या आप ये कह रहे हैं कि रामदेव आपके खिलाफ मुकदमा करेंगे? एलोपैथिक ने कुछ के लिए काम किया है और हमारे लिए काम नहीं किया है। ये किसी का नजरिया है।

DMA के वकील: रामदेव एक शक्तिशाली व्यक्ति हैं। हमने बहुत सारी शिकायतें की हैं। वे सामने आकर कहते हैं कि कोई मुझे गिरफ्तार नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट: एक काम करेंगे। नोटिस जारी करेंगे। अंतरिम राहत नहीं दे सकते। आपकी नजर में अंतरिम राहत क्या है?

DMA के वकील: रामदेव को सीधे या परोक्ष रूप से आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित करने से रोका जाए।

हाईकोर्ट: वो तो पहले से ही इंटरनेट पर है।

DMA के वकील: बिना शर्त माफी मांगें रामदेव। उन्होंने माफी मांगने से इनकार किया है।

हाईकोर्ट: यह अंतरिम चरण में नहीं हो सकता।

DMA के वकील: कोरोनिल को लेकर कोई सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है। हम कह रहे हैं जब तक आपको सर्टिफिकेट नहीं मिल जाता, इसे इलाज के तौर पर पेश न करें। सच्चाई को ही प्रोजेक्ट करें।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भी कर चुकी है शिकायत
रामदेव के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) भी केस कर चुकी है। पिछले दिनों IMA ने दिल्ली के आईपी एस्टेट पुलिस स्टेशन में योगगुरु के खिलाफ शिकायत दी थी। इसमें रामदेव पर महामारी एक्ट, आपदा एक्ट और राजद्रोह समेत दूसरी धाराओं के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई थी।

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