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योगी के दिल्ली दौरे की इनसाइड स्टोरी:आज PM मोदी से मिलेंगे योगी; अचानक दिल्ली दौरे की वजह सरकार और संगठन में बदलाव को लेकर विमर्श

नई दिल्ली6 दिन पहले

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इससे पहले जब योगी गुरुवार को अचानक दिल्ली पहुंचे तो हर सियासी नजर उसी ओर उठ गई। योगी ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। मुलाकात करीब डेढ़ घंटे चली। अब प्रधानमंत्री के साथ भी उनकी मीटिंग होनी है।

सवाल ये है कि आखिर योगी अचानक दिल्ली क्यों पहुंच गए? सवाल-जवाब में पढ़िए, इस दिल्ली दौरे की इनसाइड स्टोरी...

क्या हैं वो वजहें, जिनके चलते योगी दिल्ली दौड़े?
उत्तर प्रदेश के कुछ सांसदों, विधायकों और मंत्रियों से मिले फीड बैक के बाद भाजपा की लीडरशिप परेशान है। केवल पार्टी ही नहीं, संघ भी चिंतित है। कई दौर की बैठकें दोनों के बीच हुई हैं। लखनऊ में तीन दिन की रिव्यू मीटिंग्स के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएल संतोष और राधा मोहन सिंह ने भी यही चिंता जाहिर की है।

न्यूज पोर्टल एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में बताया है कि भाजपा-संघ के मंथन और रिव्यू बैठकों में यही तथ्य सामने आया कि सबको साथ लेकर चलने में योगी पिछड़ रहे हैं। ठाकुर जाति से ताल्लुक रखने वाले योगी के सामने गैर-ठाकुर खुद का कद कम होता आंक रहे हैं। सांसदों और विधायकों को भी यही शिकायत है कि सीएम उनकी पहुंच से दूर हैं। ये निराशा कोरोना की दूसरी लहर में और ज्यादा बढ़ गई है।

जब कोरोना की दूसरी लहर के समय उत्तर प्रदेश सरकार आलोचनाओं का सामना कर रही थी और सोशल मीडिया पर भी लगातार उस पर हमले हो रहे थे, तब योगी सरकार के ये विरोधाभास सबके सामने खुलकर आ गए।

दिल्ली में योगी का एजेंडा क्या है?
शाह से योगी मिल चुके हैं। अब मोदी से मिलेंगे। सूत्र बता रहे हैं कि योगी अपने साथ वो दस्तावेज ले गए हैं, जिनसे वो ये साबित कर सकें कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान उनकी सरकार ने कदम उठाए, मिसमैनेजमेंट नहीं होने दिया। ये दस्तावेज विभिन्न विभागों से इकट्ठा किए गए हैं।

आने वाले विधानसभा चुनाव में चेहरा कौन, क्या इस पर संशय है?
बिल्कुल नहीं। दरअसल, चुनाव में एक साल बाकी है और ऐसे में यूपी में स्टार कैंपेनर के तौर पर योगी का चेहरा हटाना बिल्कुल उल्टा दांव साबित हो सकता है। ऐसे में इस पर भाजपा की टॉप लीडरशिप और संगठन दोनों ही राजी नहीं है। भाजपा पहले ही ये स्पष्ट कर चुकी है कि चेहरा योगी ही होंगे।

योगी-मोदी मीटिंग में किन मुद्दों पर बात?
यूपी में चेहरा योगी होंगे, पर डैमेज कंट्रोल कैसे किया जाएगा। जाहिर है, सरकार और संगठन के स्तर पर बदलाव होने निश्चित हैं। यही दो सबसे बड़े मुद्दे हैं। भले ही ये अभी स्पष्ट न कहा जा रहा हो। सूत्र बताते हैं कि टॉप लीडरशिप बीच का रास्ता निकाल रही है। संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी योगी बात करने दिल्ली पहुंचे हैं। केंद्रीय नेतृत्व मोदी के करीबी ब्यूरोक्रेट एके शर्मा जैसे चेहरों को यूपी कैबिनेट में चाहता है।

दूसरा मुद्दा यूपी भाजपा अध्यक्ष का है। केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि ये पद ब्राह्मण चेहरे को दिया जाए। योगी चाहते हैं कि स्वतंत्रदेव सिंह इस पर बने रहें। दरअसल, कांग्रेस के दिग्गज और राहुल के करीबी जितिन प्रसाद भी ब्राह्मण हैं और उनके भाजपा में शामिल होने के अगले ही दिन योगी का दिल्ली दौरा उनकी मंशा को साफ करता है। केंद्र की मंशा सरकार और संगठन के बीच जातीय गणित में बैलेंस करने का है।

20 दिन में UP से मिले 5 बड़े संकेत

  • जल्द ही यूपी कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
  • सरकार से नाराज विधायकों को संगठन में बड़ा पद और मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
  • BJP के चुनावी मैदान में उतरने से पहले RSS की एक टीम जनता के बीच जाएगी।
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही अगले साल होने वाले चुनाव में BJP का चेहरा होंगे।
  • डिप्टी CM केशव मौर्य को भी बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
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