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सुप्रीम कोर्ट / वे मामले, जो समाज से सरकार तक को देंगे नई दिशा, निर्भया के दोषियों की मौत की तारीख तय होगी

Nirbhaya Rape Convicts Hanged Date | 2020 New Year: Supreme court Those cases which will give a new direction to society and government,  date of hanging of Nirbhaya convicts will be fixed
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Nirbhaya Rape Convicts Hanged Date | 2020 New Year: Supreme court Those cases which will give a new direction to society and government,  date of hanging of Nirbhaya convicts will be fixed

  • दोषियों को दो-तीन महीने में पूरे करने होंगे सारे कानूनी विकल्प 
  • धर्मस्थलों पर लैंगिक भेदभाव, हलाला, बहुविवाह पर सुप्रीम सुनवाई

दैनिक भास्कर

Jan 01, 2020, 01:13 PM IST
नई दिल्ली. 16 दिसंबर 2012 को हुए निर्भया मामले के चारों दोषियों की फांसी पर अमल की तैयारी अब अंतिम चरण में है। चारों दोिषयों अक्षय, पवन, विनय और मुकेश के डेथ वारंट पर पटियाला हाउस कोर्ट 7 जनवरी को सुनवाई करेगा। इन दोषियों ने क्यूरेटिव याचिका लगाने की बात तिहाड़ जेल प्रशासन को लिखकर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि 19 दिसंबर को दोषियों की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी। इसके एक माह में क्यूरेटिव अर्जी लगाई जा सकती है। फिर दया याचिका अंतिम विकल्प है। यह केस जघन्यतम श्रेणी का है। लिहाजा राहत की उम्मीद कम है। 2-3 महीने में सभी कानूनी विकल्प पूरे हो जाएंगे।

धर्मस्थलों पर लैंगिक भेदभाव, हलाला, बहुविवाह पर सुप्रीम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बड़ी बेंच सबरीमाला मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर जनवरी में सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट अन्य धर्मों के धर्मस्थलों पर लैंगिक भेदभाव खत्म करने की मांग पर भी सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट जनवरी में ही निकाह हलाला और बहु विवाह जैसे मामले पर सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता ने इसे दुष्कर्म के समान अपराध घोषित करने की मांग की है।

केंद्र के धारा 370 खत्म करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में आधा दर्जन से अधिक याचिकाएं हैं। इन पर सुप्रीम कोर्ट इसी साल सुनवाई करने वाला है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने नागरिक संशोधन एक्ट के सभी मामलों को लेकर केंद्र से जवाब मांगा है। इस पर 22 जनवरी को सुनवाई होगी। याचिका में कहा गया है कि ये कानून संविधान के आर्टिकल 14, 21, 25 का उल्लंघन करता है।

एससी-एसटी क्रीमीलेयर को कॉलेज में दाखिले व नौकरियों में आरक्षण की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होगी। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा था- लाभ नहीं दिया जा सकता। केंद्र सरकार ने 3 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि वह मामले में दोबारा विचार करे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई का आश्वासन दिया था। संभावना है कि इस साल इस मामले का निपटारा कर फैसला भी दे दिया जाए।

एडीआर और कॉमन कॉज ने पार्टियों को इलेक्टोरल बाॅन्ड से मिलने वाले चंदे पर रोक की अर्जी लगाई है। इनका कहना है कि इससे कालेधन को सफेद किया जा रहा है। कोर्ट ने 12 अप्रैल 2019 को अंतरिम आदेश के तहत रोक से मना कर दिया था। कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि वे सीलबंद लिफाफे में चुनाव आयोग को बताएं कि इलेक्टोरल बाॅन्ड से किस-किस ने कितना चंदा दिया? किस खाते में इसे जमा कराया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह कानून में किए गए बदलावों का परीक्षण करेगा। एेसे में नए साल में सुप्रीम कोर्ट इस अहम मुद्दे पर सुनवाई कर फैसला दे सकता है।

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