लैरी पेज की कलम से / तेज चलना है तो अकेले चलो दूर तक जाना है तो साथ चलो

Larry Page; Google founder Larry Page Advice On Step Towards Reinventing Yourself
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Larry Page; Google founder Larry Page Advice On Step Towards Reinventing Yourself

दैनिक भास्कर

Dec 31, 2019, 08:35 PM IST

मैं इस सिद्धांत को मानता हूं कि हर व्यक्ति को कड़ी मेहनत करनी चाहिए, कुछ ऐसा रचने के लिए जो अभूतपूर्व हो। यानी जो पहले कभी कोई नहीं कर पाया हो। एक बार जब आप यह मुकाम हासिल कर लेते हैं तब आपको एक ऐसा व्यक्ति तलाश लेना चाहिए, जो आपके काम को और आगे नई ऊंचाइयों पर ले जा सके। किसी भी एक चीज से चिपककर रहने की आदत आपको लापरवाह बना देती है। तब आप खुद को री-इनवेंट नहीं कर सकेंगे। इसलिए 2020 के लिए सभी भारतीयों से मैं कहना चाहता हूं कि अपना श्रेष्ठतम दें, कुछ ऐसा करें, जो धारा बदल दे। पर यहीं रुकें नहीं।

मेरा मानना है कि भारतीय युवाओं में तकनीक की दुनिया में विश्व पर छा जाने की क्षमता है। अल्फाबेट के सीईओ के रूप में सुंदर पिचई की नियुक्ति इसका प्रमाण है। गूगल खुद को लगातार री-इनवेंट करने में ही यकीन रखता है। इन दिनों हम भविष्य की ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जो दुनियाभर के लोगों की जिंदगी को और आसान बना देगी। मेरा दोस्त सर्गेई ब्रिन हमेशा कहता है कि लीडरशिप के सिर्फ दो पिलर होते हैं- पहला यदि आप तेज चलना चाहते हो तो अकेले चलो। यदि दूर तक जाना चाहते हो तो साथ चलो। दूसरा, एक अच्छा लीडर हमेशा और लीडर तैयार करता है, फॉलोअर्स नहीं। पिचई के हाथों कंपनी की स्टीयरिंग देकर हम और निश्चिंत हुए हैं। सर्गेई पर्दे के पीछे काम करने में यकीन रखते हैं। और इसमें उन्हें आनंद आता है।

हम रोज कम से कम 8 घंटे लोगों से और वैज्ञानिकों से मिलने में ही बिताते हैं। ये लोग अलग-अलग तरह की कमाल की टेक्नोलॉजी विकसित करने में लगे हैं। मैं इनके बीच रहकर ये समझने की कोशिश करता हूं कि गूगल इनका हिस्सा कैसे बन सकता है। ऐसे लोगों के बीच खुद जाकर अनुभव प्राप्त करने को हम मूनशॉट इनोवेशन कहते हैं। इन दिनों हम हाइटेक स्टॉर्टअप कंपनियों से भी खूब मिल रहे हैं और उनमें निवेश भी कर रहे हैं। हमने फ्लाइंग कार कंपनी जी.एयरो से लेकर किटीहॉक तक में निवेश किया है। 2020 के लिए मेरा रेजोल्यूशन भी यही है कि मैं ऐसे मूनशॉट को खूब प्रमोट करूंगा। इसके अलावा मैं सामाजिक कार्यों और अपने परिवार को भी वक्त दूंगा। अब मैं अपने पिता कार्ल वेक्टर पेज के नाम पर बने फाउंडेशन के जरिए परोपकार की दुनिया को नया स्वरूप देने जा रहा हूं। आप भविष्य में इसके बारे में जल्द ही बहुत कुछ सुनेंगे। मैं भास्कर और उसके रीडर्स को नए साल की बधाई देता हूं।

(जैसा सिद्धार्थ राजहंस को बताया)

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