टैल्गो ट्रेन भारत में रचा इतिहास, पहली बार 180 km/h की स्‍पीड से दौड़ी ट्रेन

6 वर्ष पहले
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मथुरा. स्पेन से लाई गई टेल्गो ट्रेन ने बुधवार को भारत में इतिहास रच दिया। देश में पहली बार 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से कोई ट्रेन दौड़ी। मथुरा से पलवल तक 84 किमी का ट्रायल रन कामयाब रहा। टेल्गो ने भारत में अब तक की सबसे तेज ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस को भी पीछे छोड़ दिया है। गतिमान की मैक्सिमम स्‍पीड 160 किमी प्रतिघंटा है। (चौथी स्‍लाइड में देखिए, ट्रैक पर दौड़ती टैल्‍गो ट्रेन का वीड‍ियो...)
भारतीय इंजन ने ट्रेन को दौड़ाया...
- ट्रेन के लोको पायलट सुनील कुमार पाठक ने बताया कि इसकी मैक्सिमम स्‍पीड 180 किमी प्रति घंटा रही।
- इस स्‍पीड से टेल्गो ट्रेन को भारतीय डीजल इंजन डब्ल्यूडीसी-4 ने दौड़ाया।
8 बार स्पीड कम करनी पड़ी
- ट्रेन के एक अन्य लोको पायलट विवेक शर्मा ने बताया कि ब्रिज के नीचे और मोड़ पर मिले कॉशन की वजह से स्‍पीड को 8 बार कम करना पड़ा।
- 84 किमी के टेस्टिंग में 9 कोचों का इस्तेमाल किया गया।
- अब 26 जुलाई तक इसी स्पीड से ट्रेन का ट्रायल होगा।
- लगातार सफल ट्रायल होने के बाद दिल्ली से मुंबई के बीच इसका ट्रायल होगा।

पटरी पर जम्पिंग के साथ भी हुआ ट्रायल
- हाई स्‍पीड पर ट्रेन का जम्पिंग टेस्ट भी हुआ। आझई रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर 1 इंच मोटा और 6 इंच लंबा लोहे का टुकड़ा रखा गया।
- इसके बाद ट्रेन को इस पर दौड़ाया गया। ऐसी जांच इसलिए की गई, ताकि पता चल सके कि ट्रैक पर कोई ब्‍लॉकर आने पर हाई स्‍पीड में ट्रेन पर क्या असर हो सकता है।

गतिमान एक्सप्रेस को पीछे छोड़ा
- बता दें, भारत में अभी तक सबसे तेज गति से चलने वाली ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस थी। दिल्ली (हजरत निजामुद्दीन स्टेशन) से आगरा तक चलने वाली इस ट्रेन की मैक्सिमम स्‍पीड 160 किमी प्रति घंटा है।
- गतिमान को ओएचई इंजन (बिजली से चलने वाला इंजन) से चलाया जाता है, जबकि टेल्गो को डीजल इंजन से दौड़ाया गया।

टेल्गो की खासियत क्‍या है ?
- 1942 से काम कर रही टेल्गो बेहतरीन पैसेंजर कोच बनाने के लिए जानी जाती है।
- नॉर्मल भारतीय कोच में दो पहिए एक ही धुरी पर होते हैं, जिससे जर्क पूरे कोच पर आता है।
- वहीं, टेल्गो के कोच में पहिए अलग-अलग धुरी से जुड़े होते हैं। इससे कोच में जर्क महसूस नहीं होता है।
- कंपनी ने अब तक 14 तरह के कोच बनाए हैं। ये कोच 380 किमी प्रति घंटे की स्‍पीड तक दौड़ सकते हैं।
- कोच एल्‍युमि‍नियम से बने होने के कारण बेहद हल्के हैं। इससे रफ्तार तेज है। इसकी सीट भी बेहद आरामदायक हैं।
- बुजुर्गों, प्रेग्नेंट महिलाओं और बच्चों को प्लैटफॉर्म पर उतरने में भी परेशानी नहीं होगी।
- इमरजेंसी ब्रेक लगने पर पैसेंजर्स को जर्क नहीं लगेगा।

पलवल से मथुरा के बीच क्‍यों हुआ ट्रायल?
- एडीआरएम एसपी सिंह ने बताया कि पलवल से मथुरा के बीच 3 ट्रैक हैं। इनमें से 1 ट्रैक को किसी भी वक्‍त के लिए रिजर्व रखा जा सकता है।
- गतिमान एक्‍सप्रेस के लिए ट्रैक को हाई स्‍पीड बनाने के लिए प्रति किमी 13.5 लाख रुपए खर्च हुए थे।
- इस ट्रैक के दोनों तरफ बाड़ लगाई जा चुकी है। ट्रैक बदले जा चुके हैं।
- इसी ट्रैक पर गतिमान एक्‍सप्रेस अपनी मैक्सिमम स्‍पीड 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार दौड़ती है।
- यह ट्रैक 200 किमी प्रति घंटे से भी ज्‍यादा रफ्तार से दौड़ने वाली ट्रेनों के अनुकूल है।
भारत में क्‍या है ट्रेनों की स्‍पीड?
गतिमान एक्‍सप्रेस : 160 km/h
भोपाल शताब्‍दी : दिल्‍ली टू आगरा 150 km/h, बाद में 140 km/h
राजधानी एक्‍सप्रेस : 140 km/h
एक्‍सप्रेस, सुपरफास्‍ट ट्रेनें : 90 km/h
पैसेंजर ट्रेन : 60 km/h
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