ट्रेन

6 वर्ष पहले
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भोपाल। नई दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस में पिछले दिनों ट्रेने की खिड़की से लटकने वाले 10 साल के बच्चे के बारे में एक और खुलासा हुआ है। यह बच्चा एक बार नहीं बल्कि कई बार इस तरह के स्टंट कर चुका है। बच्चे के पिता के मुताबिक गोलू बुरी लत का शिकार है और नशे में इस तरह की हरकत कर देता है। कुछ दिन पहले विदिशा के पास भोपाल आ रही ट्रेन की खिड़की से 10 साल का बच्चा लटक गया था। लड़के को लटके देखकर उड़े पेसेंजर के होश...
पिता ने बताया, जब चाहे भाग जाता है
करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही ट्रेन में बैठे यात्रियों के होश उड़ गए थे। आनन-फानन में पैंट्री कर्मचारियों को इसकी सूचना दी गई अौर चेन खींची गई। ट्रेन रुकने के बाद बच्चे को सुरक्षित ट्रेन में बैठाया गया। बच्चे को भोपाल स्टेशन पर आरपीएफ के हवाले किया गया था। यहां से उसे चाइल्ड लाइन भेज दिया गया। एक दिन बाद बच्चे के पिता मनावल रैकवार उसे लेने आए। उन्होंने बताया कि बच्चा पहले भी घर से भागकर इस तरह की हरकत कर चुका है। उसे काफी समझाया जा चुका है, लेकिन उसकी आदत नहीं छूट रही है। बच्चा अब अपने घर वापस चला गया है।
दो महीने तक चेन से बांधकर भी रखा गया है उसे
गोलू के पिता मनावल रैकवार ने बताया कि कुछ शरारती तत्वों की संगत में गोलू बुरी लत का शिकार हो गया है। इस लत को छुड़वाने के लिए एक बार तो उसे दो महीने तक चेन से बांधकर भी रखा, लेकिन वह चेन तोड़कर भागने में सफल हो गया।
कैसे लटका था शताब्दी में?...
- शुक्रवार (22 अप्रैल) को दिल्ली से भोपाल जा रही शताब्दी एक्सप्रेस गंजबासौदा स्टेशन पर रुकी।
- स्टेशन पर खेल रहा गोलू ट्रेन के दरवाजे से लटक गया और इतने में ट्रेन चल पड़ी।
- थोड़ी देर में ट्रेन ने रफ्तार पकड़ ली। गोलू शताब्दी के सी-11 कोच के गेट पर लटका था।
- तभी अचानक कुछ यात्रियों की नजर गेट पर लटके गाेलू पर पड़ी।
- तेज दौड़ती ट्रेन पर लटका गोलू बुरी तरह सहम गया था। कुछ देर तक किसी को समझ नहीं आया कि गोलू को कैसे बचाएं।
- कुछ यात्रियों ने ट्रेन की पैंट्री कार में काम करने वाले लोगों को सूचना दी।
- पबई और गुलाबगंज स्टेशन के बीच ट्रेन की चेन खींची गई और तब जाकर बच्चा सुरक्षित बचा। लगभग 15 किमी तक वह चलती ट्रेन में लटका रहा।
- बच्चे को ट्रेन में बैठाया गया और यहां यात्रियों ने उसे आरपीएफ के सुपुर्द कर दिया।
- आरपीएफ ने बच्चे को चाइल्ड लाइन हेल्पलाइन भेज दिया। हेल्पलाइन के मुताबिक बच्चा बहुत ज्यादा डरा हुआ था, इसलिए उससे पूछताछ नहीं की गई।
- गुलाबगंज स्टेशन अधीक्षक एससी पाल के मुताबिक उन्हें पबई स्टेशन से गाड़ी 1.48 पर रवाना होने की सूचना मिली थी। वहां से 5 मिनट गुलाबगंज आने में लगते हैं, लेकिन गाड़ी 2 बजकर 1 मिनट पर आई, इसका मतलब गाड़ी कहीं रुकी थी।
- बच्चे ने बताया कि वह भोपाल घूमने आना चाहता था। उसके पिता मनावल रैकवार गंजबासौदा में हलवाई हैं। वहीं, मां झाड़ू-पौछा का काम करती हैं।
- बच्चे ने बताया कि उसने दरवाजा खटखटाया था, लेकिन किसी ने खोला नहीं तो वह लटक गया।
आगे की स्लाइड में देखिए कांच से कैसे दिख रहा था लटका हुआ बच्चा....