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बेटी तो चली गई पर मुझे हिंदुस्तान से जोड़ गई, FB पर लिखा i love india

7 वर्ष पहले
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अमृतसर। सरहदें कई मर्तबा सोच की हदें तक तोड़ जाती हैं। खासकर उस वक्त, जब कहीं दिल मिल जाए या लग जाए। सरहद के उस पार पाकिस्तान में रहने वाले हामिद इमरान के साथ यही हुआ है। उन्हें हिंदुस्तान से प्यार हो गया है और इसके बावजूद कि हिंदुस्तान में इलाज के लिए आई उनकी बेटी बच नहीं सकी। फेसबुक पर हामिद ने अपने प्यार का खुद इजहार किया है। उन्होंने अपनी वॉल पर लिखा, ‘आई लव इंडिया, ग्रेट इंडिया।’
हामिद की 13 साल की बेटी अबीहा के लिवर में खराबी थी। सऊदी अरब में पहला ऑपरेशन हुआ। मां के लिवर का एक हिस्सा उसे लगाया गया। लेकिन बीमारी फिर लौट आई। लिहाजा, हामिद ने उसे अब दिल्ली में दिखाने का फैसला किया। वे इस साल 25 फरवरी को उसे लेकर दिल्ली पहुंचे। डॉक्टरों ने एक और ऑपरेशन की सलाह दी। अपोलो अस्पताल में 16 मार्च को अबीहा का आॅपरेशन हुआ।
अबकी बार मामा के लिवर का एक हिस्सा उसके शरीर में लगाया गया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन को कामयाब बताया। लेकिन कुछ ही दिन बाद अबीहा की फिर हालत बिगड़ी और सात मई को वह दुनिया से चल बसी। बेटी जिंदगी छोड़ गई पर हामिद को हिंदुस्तान और हिंदुस्तानियों से जोड़ती गई। कैसे? बकौल हामिद, ‘हम जब पाकिस्तान से चले तो एक दोस्त ने हमें दिल्ली के रतनदीप सिंह कोहली का पता दिया। बंटवारे से पहले कोहली के दादा चेत सिंह हमारे चटवाल में ही रहा करते थे। चलने से पहले हमने उनसे बात भी कर ली थी। फिर भी एक डर था कि न जाने इंडिया में हमसे कैसा सलूक होगा। लेकिन जब हम दिल्ली पहुंचे तो हमें हर कोई ऐसी गर्मजोशी से मिला, जैसे हम उनके अपने ही हाें। कोहली परिवार ने हमें घर में भाई-बहनों की तरह रखा। रतनदीप की पत्नी परमजीत वेजिटेरियन हैं। फिर भी वे हमारे लिए नॉन वेज डिश बनाती थीं। अबीहा के लिए भी स्पेशल खाना बनाती थीं। रोज तीन बार उसे देखने अस्पताल आती थीं। अबीहा की हर ख्वाहिश को पूरा करती थीं।...इंडिया में मिली इस मोहब्बत-ओ-मदद का मैं ताउम्र कर्जदार रहूंगा।’
अाखिरी लेटर : मुझे डर नहीं लग रहा, पता है कि सुरक्षित हाथों में हूं
मेरा नाम अबीहा फातिमा है। मैं 13 साल की हूं। मेरा लिवर ट्रांसप्लांट हो चुका है। लेकिन सफल नहीं रहा। अब दोबारा ऑपरेशन के लिए भारत जा रही हूं। नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल। जब सऊदी अरब में मेरी पहली सर्जरी हुई तो मैं बेहद डरी हुई थी। लेकिन इस बार मुझे पता है कि मैं सुरक्षित हाथों में हूं। इसलिए डर नहीं लग रहा है। मुझे भारत के डॉक्टर और नर्स बहुत पसंद हैं। वे मेरी जान बचाने की हर कोशिश कर रहे हैं। मैं अपने डॉक्टर्स को थैंक्यू कहना चाहती हूं।
पाक फौजियों ने ढाई घंटे तक रोके रखा
हामिद बताते हैं, ‘अबीहा की लाश लेकर जब हम अटारी बॉर्डर पर पहुंचे तो बीएसएफ के अफसरों ने हमसे हमदर्दी जताई। एक जवान भागा-भागा वैन के पास पहुंचा। उसने छत को हरे कपड़े से ढक दिया, ताकि अबीहा के शरीर पर तेज धूप न पड़े। लेकिन जब हम पाकिस्तान में दाखिल हुए तो हमें वहां पाक फौजियों ने तीन घंटे तक रोके रखा। सिर्फ इसलिए कि उस वक्त हमारे पास अबीहा के पासपोर्ट की फोटो कापियां नहीं थीं।’
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