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10 FACTS जो करते हैं दावा, गुमनामी बाबा ही थे सुभाष चंद्र बोस

6 वर्ष पहले
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फैजाबाद (यूपी). नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जिंदा होने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल, मोदी सरकार ने उनसे जुड़ी कुछ और फाइलों को पब्लिक किया है। इनमें से एक फाइल में इस बात का जिक्र है कि नेताजी ने 18 अगस्त 1945 के बाद भी तीन रेडियो ब्रॉडकास्ट किए। बता दें, इसी दिन हुए प्लेन क्रैश में उनके मरने की बात सामने आई थी। ऐसे में एक बार फिर से शक की सूई गुमनामी बाबा की ओर जाती है कि क्या वही नेताजी थे? क्योंकि बाबा के बक्से से कुछ ऐसे सामान मिले हैं, जोकि नेताजी के जिंदा होने के सबूत देते हैं। बाबा के आखिरी बक्से में मिला थी नेताजी की फैमिली फोटोज...
गुमनामी बाबा के आखि‍री बक्से से नेताजी सुभाषचंद्र बोस की फैमि‍ली फोटोज मिली। साथ ही, तीन घड़ियां- रोलेक्स, ओमेगा और क्रोनो मीटर सहि‍त तीन सिगार केश मिले। एक फोटो में बोस के पिता जानकी नाथ, मां प्रभावती देवी, भाई-बहन और पोते-पोती नजर आ रहे हैं। हालांकि, क्या गुमनामी बाबा ही नेताजी थे, इस बात को लेकर मिस्ट्री अब भी कायम है।
- फोटो में सुभाषचंद्र बोस की फैमिली के 22 लोग हैं।
- ऊपर की लाइन में (बाएं से दाएं) सुधीरचंद्र बोस, शरतचंद्र बोस, सुनीलचंद्र और सुभाषचंद्र बोस हैं।
- बीच की लाइन में (बीच में बैठ हुए) नेताजी के पि‍ता जानकीनाथ बोस, मां प्रभावती देवी और तीन बहनें हैं।
- फोटो में नीचे की लाइन में जानकीनाथ बोस के पोते-पोतियां हैं। इसके अलावा भी कई अन्य फैमि‍ली फोटोज मिली हैं।
- गुमनामी बाबा के मकान मालिक के मुताबिक, 4 फरवरी, 1986 को नेताजी के भाई सुरेशचंद्र बोस की बेटी ललिता यहां आई थीं। उन्होंने ही फोटो में लोगों की पहचान की थी।
- आखिरी बक्से से आजाद हिंद फौज (आईएनए) के कमांडर पबित्र मोहन राय, सुनील दास गुप्ता या सुनील कृष्ण गुप्ता के 23 जनवरी या दुर्गापूजा में आने को लेकर लेटर और टेलीग्राम भी मिले हैं।
- पबित्र मोहन राय ने एक पत्र में गुमनामी बाबा को कभी स्वामी जी तो कभी भगवन जी कहा है।
पहले के बक्सों से क्या मिला?
- गोल फ्रेम का एक चश्मा मिला था। वह ठीक वैसा ही है, जैसा बोस पहनते थे।
- एक रोलेक्स घड़ी मिली। ऐसी घड़ी बोस अपनी जेब में रखते थे।
- कुछ लेटर मिले, जो नेताजी की फैमिली मेंबर ने लिखे थे। न्यूज पेपर्स की कुछ कटिंग्स मिलीं, जिनमें बोस से जुड़ी खबरें हैं।
- आजाद हिंद फौज की यूनिफॉर्म भी मिली।
- सिगरेट, पाइप, कालीजी की फ्रेम की गई तस्वीर और रुद्राक्ष की कुछ मालाएं।
- एक झोले में बांग्ला और अंग्रेजी में लिखी 8-10 लिटरेचर की किताबें मिलीं। मंत्र जाप की कुछ मालाएं भी थीं।
कौन थे गुमनामी बाबा?

- फैजाबाद जिले में एक योगी रहते थे, जिन्हें पहले भगवनजी और बाद में गुमनामी बाबा कहा जाने लगा।
- मुखर्जी कमीशन ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फैजाबाद के भगवनजी या गुमनामी बाबा और नेताजी सुभाषचंद्र बोस में काफी समानताएं थीं।
- 1945 से पहले नेताजी से मिल चुके लोगों ने गुमनामी बाबा से मिलने के बाद माना था कि वही नेताजी थे। दोनों का चेहरा काफी मिलता-जुलता था।
- रिपोर्ट में कहा गया है कि 23 जनवरी (नेताजी का जन्मदिन) और दुर्गापूजा के दिन कुछ फ्रीडम फाइटर, आजाद हिंद फौज के कुछ मेंबर्स और पॉलिटिशियन गुमनामी बाबा से मिलने आते थे।
क्या कहते हैं गुमनामी बाबा के मकान मालि‍क?
- गुमनामी बाबा ने राम भवन में जिंदगी के अंतिम तीन साल (1982-85) गुजारे। राम भवन के मालि‍क शक्ति सिंह हैं।
- सिंह के मुताबिक, हाईकोर्ट का प्रदेश सरकार को ऑर्डर है कि‍ रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक टीम बनाई जाए, जो गुमनामी बाबा के बक्से में मिली चीजों की जांच करेगी।
- प्रशासनिक कमेटी की जांच के तीन दि‍न बाद टेक्निकल कमेटी सामान की जांच करेगी।
पब्लिक किए जा सकते हैं सामान?
- सामान को पब्लिक करने के लिए नेताजी की भतीजी ललिता बोस और नेताजी सुभाषचंद्र बोस मंच ने दो अलग-अलग रिट दायर की थी।
- इस पर सुनवाई करते हुए 31 जनवरी, 2013 को हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को ऑर्डर दिया था कि गुमनामी बाबा के सामान को म्यूजियम में रखा जाए, ताकि आम लोग उन्हें देख सकें।
- हाल में ही मोदी सरकार ने नेताजी की फाइलें पब्लिक की हैं। इसके बाद उनकी फैमिली ने यूपी के सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात की थी।
- बोस की फैमिली ने कोर्ट के ऑर्डर के तहत सीएम से गुमनामी बाबा के सामानों को पब्लिक करने की गुजारिश की थी। इसके बाद ही यह प्रॉसेस शुरू हुई।
आगे की स्लाइड्स में इन्फोग्राफिक्स में जानिए वो महत्वपूर्ण फैक्ट्स, जो गुमनामी बाबा को नेताजी से जोड़ते हैं...