बांग्लादेश में कट्टरपंथी जमात के सीनियर नेता निजामी को इसलिए दी गई फांसी

6 वर्ष पहले
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ढाका. बांग्लादेश कीकट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के चीफ मोतीउर रहमान निजामी को मंगलवार रात फांसी दे दी गई। 73 साल का निजामी जमात का सबसे सीनियर इस्लामी लीडर था। 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान वह वॉर क्राइम का दोषी था। जमात-ए-इस्लामी ने इस फैसले के विरोध में बुधवार को बंद बुलाया है। इसे देखते हुए ढाका समेत कई शहरों में सिक्युरिटी बढ़ा दी गई है। मंगलवार रात 12:10 बजे दी गई सजा...
- ढाका सेंट्रल जेल के अफसर जहांगीर कबीर ने बताया- "निजामी को ढाका सेंट्रल जेल में मंगलवार की रात 12:10 बजे फांसी दी गई।"
- "20 मिनट से अधिक समय तक फांसी पर लटके रहने के बाद सिविल सर्जन ने उसे डेड घोषित किया।"
- "फांसी के दौरान ढाका के डिस्ट्रिक मैजिस्ट्रेट, जेल के इंस्पेक्टर जनरल और पुलिस के सीनियर अफसर मौजूद रहे।"
- "निजामी की बॉडी को करीब 1:30 बजे जेल से बाहर ले जाया गया। निजामी को उसके गांव पबना में दफनाया जाएगा।"
- "ढाका के पुराने इलाके में मौजूद ढाका सेंट्रल जेल के चारों ओर सिक्युरिटी बढ़ा दी गई थी। इसके लिए इलीट एंटी क्राइम रैपिड एक्शन बटालियन को तैनात किया गया था। जेल के सामने मौजूद सड़क पर भी बैरिकेड लगा दिए गए थे और वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई थी।"
- निजामी 5th वॉर क्रिमिनल और जमात का 4th लीडर है, जिसे फांसी दी गई है। इसे अपने होम टाउन पबना में लोगों की हत्या करने का दोषी ठहराया गया।
कोर्ट खारिज की थी निजामी की अर्जी
- स्पेशल ट्रिब्यूनल ने 5 मई को निजामी की अपील को खारिज कर दिया था।
- बता दें कि पीएम शेख हसीना ने इस स्पेशल ट्रिब्यूनल का गठन किया था। यह कोर्ट बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान का साथ देने और अपने इलाके के लोगों पर अत्याचार करने वालों को सजा सुना रहा है।
कौन था निजामी
- निजामी खालिदा जिया सरकार में मंत्री रह चुका है।
- उस पर 1971 के स्वतंत्रता संग्राम में पाकिस्तानी सेना के सहयोग से बांग्लादेशियों पर अत्याचार करने के लिए फांसी की सजा सुनाई गई थी।
- निजामी 1971 में कुख्यात अल बद्र मिलिशिया का सरगना था।
- ऐसा आरोप था कि उसकी लीडरशिप में हजारों बांग्ला महिलाओं की इज्जत लूटी गई, हत्याएं की गईं और आजादी की लड़ाई में कूदे बांग्लादेशियों को कई तरह की यातनाएं दी गई थीं।
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