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  • साहित्य अकादमी अवॉर्ड वापस करने का सिलसिला जारी, अरविंद ने छोड़ी काउंसिल

9 राइटर्स ने लौटाए साहित्य अकादमी अवॉर्ड्स, एक ने छोड़ी अकादमी काउंसिल

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. देश के नौ मशहूर लेखकों ने रविवार को साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिए। इन लेखकों का विरोध दादरी हिंसा और कन्नड़ लेखक एम.एम. कलबुर्गी की हत्या को लेकर है। कुल मिलाकर अब तक 15 लेखक साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा चुके हैं। पुरस्कार लौटाने वालों की लिस्ट में पहला नाम लेखक उदय प्रकाश का था। कन्नड़ लेखक अरविंद मालागट्टी ने साहित्य अकादमी की जनरल काउन्सिल से इस्तीफा दे दिया है। (ये भी पढ़ें: सम्मान का अपमान: पहले भी हुआ है विरोध, क्या उठ रहे सवाल, जानिए अभी)
रविवार को किन लेखकों ने लौटाए पुरस्कार
रविवार को कन्नड़ लेखक अरविंद मालागट्टी ने साहित्य अकादमी की जनरल काउन्सिल से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा, कुछ और लेखकों ने पुरस्कार लौटा दिए। इनके नाम हैं-
* मंगलेश डबराल (हिंदी कवि)
* राजेश जोशी (हिंदी कवि)
* गणेश देवी
* एन. शिवदास (कोंकणी लेखक)
* वीरभद्रप्पा (कन्नड़ लेखक)
* गुरबचन सिंह भुल्लर
* अजमेर सिंह औलख
* आत्मजीत सिंह
* वरयाम सिंह संधू
क्या कहा जोशी और डबराल ने
पुरस्कार लौटाने वाले जोशी और डबराल ने कहा, “हम साफ तौर पर लोकतंत्र, सेक्युलरिज्म और आजादी पर खतरा मंडराता देख रहे हैं। हालांकि, पहले भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर खतरे रहे हैं, पर इस सरकार के आने के बाद यह खतरा तेजी से बढ़ता दिखाई पड़ रहा है।”
देवी भी नाराज
गणेश देवी ने कहा, “मैं अपने उन साथियों के साथ एकजुटता दिखाना चाहता हूं, जिन्होंने अलग विचार रखने की वजह से पुरस्कार लौटाए हैं।” कलबुर्गी की हत्या पर अकादमी की चुप्पी से देवी खासे नाराज हैं। उन्होंने कहा, “कलबुर्गी की हत्या के एक हफ्ते बाद ही साहित्य अकादमी के एक सेमिनार में शामिल हुआ। मुझे इस बात पर हैरानी है कि सेमिनार की शुरुआत में कलबुर्गी की नृशंस हत्या पर एक शब्द भी नहीं कहा गया।” देवी ने राष्ट्रपति के हालिया भाषण का भी जिक्र किया।
पीएम की चुप्पी पर औलख के सवाल
आत्मजीत सिंह ने भी देश के हालात को दुखी करने वाला बताया है। एक और लेखक अजमेर सिंह औलख ने कहा, “अलग सोच और विचार रखने की हमारी आजादी खतरे में है। प्रधानमंत्री और अकादमी के चेयरपर्सन अब तक चुप हैं।” वहीं, भुल्लर का कहना है कि साहित्य और संस्कृति पर सोचे-समझे तरीके से हमले हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में किसी भी सरकार ने इन मामलों पर ध्यान नहीं दिया। भुल्लर ने भी हालिया घटनाओं को सोची-समझी साजिश करार दिया है।

कोंकणी लेखक शिवदास ने कहा कि वह सनातन संस्था के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किए जाने की वजह से दुखी हैं और पुरस्कार लौटा रहे हैं। वीरभद्रप्पा ने दादरी की घटना और कलबुर्गी की हत्या को पुरस्कार लौटाने का कारण बताया।

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