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  • इंडियन ओशियन रीजन में भारत को रूस से मिल रही है चुनौती

समुद्र में चीन को टक्कर देने के लिए भारत और खरीदेगा सबमरीन, फ्रांस को दिया ऑर्डर

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान को सीधी टक्कर देने के लिए भारत ने तैयारी कर ली है। इसके लिए भारत फ्रांस से और तीनस्काॅर्पीनसबमरीन खरीदेगा। भारत के छह सबमरीन मझगांव डॉक पर खड़े हैं। और छह न्यू जनरेशन सबमरीन के टेंडर जारी किए जा चुके हैं। बता दें कि इंडियन ओशन रीजन में चीन भारत के लिए एक चुनौती बनकर उभर रहा है।
क्या है भारत का टारगेट?
- हिंद महासागर में समुद्री सीमा की सुरक्षा और निगरानी करना।
- अंडमान और निकोबार आइलैंड के पास मलक्का स्ट्रेट में भारत के सामरिक हित को प्रोटेक्ट करना।
- इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल को रोकना। हिंद महासागर में चीन के पारंपरिक और न्यूक्लियर सबमरीन की मौजूदगी भारत को परेशान कर रही है।
भारत को क्या करना होगा?
- सामरिक रूप से अहम अंडमान और निकोबार कमांड में अपनी मौजूदगी मजबूत करनी होगी।
- इसके अलावा, इस लोकेशन को अपने बेसिक एयरक्राफ्ट, वॉर शिप और सबमरीन के लिए ज्यादा से ज्यादा यूज करना होगा। खुद को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से लैस करना होगा।
- मलक्का स्ट्रेट के पास समुद्री लेन और चेक प्वाइंट्स की सिक्युरिटी से लेकर निगरानी तक अपने हित को साधना होगा। बता दें कि मलक्का स्ट्रेट इंडोनेशिया और मलेशिया के बीच का हिस्सा है। यह हिंद महासागर और प्रशांत को जोड़ता है।
भारत कहां कमजोर है?
- भारत के पास फिलहाल 13 पारंपरिक डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन हैं।
- इनमें से भी 10 सबमरीन 25 साल से ज्यादा पुराने हो गए हैं।
- आईएनएस चक्र रूस से लीज पर लिया गया है। ये भी न्यूक्लियर मिसाइल की स्ट्रेंथ वाला नहीं है।
चीन से पीछे है भारत
- चीन के पास 51 पारंपारिक और 5 न्यूक्लियर सबमरीन हैं।
- इसके अलावा चीन 5 और नए जेआईएन क्लास के न्यूक्लियर सबमरीन को अपने बेड़े में शामिल करने जा रहा है। इनमें 7400 किलोमीटर तक मार करने वाली जेएल-2 मिसाइल लगी हैं।
पाक भी पीछे नहीं है भारत से
पाकिस्तान भी भारत के लिए एक नई चुनौती के रूप में उभर रहा है। इस्लामाबाद ने हाल ही में ही बीजिंग को 8 एडवांस डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन का ऑर्डर दिया है।
अप्रैल से शुरू हुआ है ट्रायल
- मझगांव डॉकयार्ड में तैयार पहली स्वदेशी स्काॅर्पीन सबमरीन को अप्रैल में पानी में उतारा गया था। अब इस सबमरीन का डेढ़ साल तक समुद्र में ट्रॉयल होगा।
- इसके बाद सितंबर 2016 में इसे नौसेना को सौंप दिया जाएगा।
- 6 सबमरीन फ्रांस के साथ तकनीकी समझाैते के तहत बनाई जा रही हैं। इन्हें 2018 तक तैयार कर लिया जाएगा।
स्काॅर्पीन ​की ताकत और खासियत
एंटी सबमरीन, बारूदी सुरंग बिछाने, खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी के साथ कई मिशन अंजाम दे सकती है।
कुछ ख़ास बातें
216 फीट लंबाई
20 फीट चौड़ाई
06 टॉरपीडो ट्यूब
984 फीट गोता लगाने में सक्षम
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