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भारत आज लॉन्च करेगा पहला स्पेस ऑब्जर्वेटरी एस्ट्रोसैट, अमेरिका भी ले रहा है हमारी मदद

6 वर्ष पहले
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श्रीहरिकोटा. स्पेस से धरती का साइंटिफिक एनालिसिस करने के मकसद से भारत ने सोमवार सुबह 10 बजे अपना पहला स्पेस ऑब्जर्वेटरी एस्ट्रोसैट PSLV-C30 लॉन्च कर दिया। यह लॉन्चिंग अांध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से की गई है। यहां के सतीश धवन स्पेस सेंटर से इसे छह और इंटरनेशनल कस्टमर सैटेलाइट्स के साथ लॉन्च किया गया। पहली बार अमेरिका किसी सैटेलाइट लॉन्चिंग के लिए भारत की मदद ली।
ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश
लॉन्चिंग के 22 मिनट के अंदर इसके स्पेस में पहुंचने की बात कही गई। भारत यह स्पेस फैसिलिटी हासिल कर चुके दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो गया। भारत से पहले अमेरिका, रूस और जापान ने ही स्पेस ऑब्जर्वेटरी को लॉन्च किया है।
क्या है एस्ट्रोसैट?
इसरो के मुताबिक, स्पेस से सैटेलाइट के जरिए धरती पर होने वाले बदलावों का साइंटिफिक एनालिसिस करना इस मिशन का मकसद है। एस्ट्रोसैट के जरिए अल्ट्रावायलेट रे, एक्स-रे, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम जैसी चीजों को यूनिवर्स से परखा जाएगा। इसके साथ ही, मल्टी-वेवलेंथ ऑब्जर्वेटरी के जरिए तारों के बीच दूरी का भी पता लगाया जाएगा। सुपर मैसिव ब्लैक होल की मौजूदगी के बारे में भी पता लगाने में भी एस्ट्रोसैट से मदद मिल सकती है।
अपने साथ कितने सैटेलाइट और कितना वजन ले जाएगा एस्ट्रोसैट?
- इसरो के बनाए पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) की यह 31वीं फ्लाइट है। यह व्हीकल अपने साथ 1631 किलोग्राम पेलोड ले गया।
- ऑर्बिट 650 किमी का है। यह 76 किलोग्राम वजनी इंडोनेशिया का माइक्रो सैटेलाइट LAPAN-A2, कनाडा का 14 किलोग्राम वजनी माइक्रो सैटेलाइट NLS-14 (Ev9) और यूएसए के 4 आइडेंटिकल LEMUR नैनो सैटेलाइट्स भी अपने साथ ले गया।
- यूएसए के सैटेलाइट्स का कुल वजन 28 किलोग्राम होगा। एस्ट्रोसैट 4 एक्स-रे पेलोड्स, एक यूवी टेलिस्कोप और चार्ज पार्टिकल मॉनिटर होगा। दो पेलोड्स कनाडियन स्पेस एजेंसी और ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी की मदद से बनाए गए हैं।
पहली बार अमेरिका ले रहा मदद
इसरो चेयरमैन ए. एस. किरन कुमार के मुताबिक, भारत 19 देशों के 45 सैटेलाइट्स लॉन्च कर चुका है। अमेरिका 20वां देश है, जो कमर्शियल लॉन्च के लिए इसरो से जुड़ रहा है। अगले दो साल में इसरो 28 विदेशी सैटेलाइट लॉन्च करेगा।
- 12 लाख करोड़ रुपए की है दुनिया भर की सैटेलाइट लॉन्च इंडस्ट्री।
- 500 करोड़ रु. से ज्यादा कमाए 40 फॉरेन सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग से।
- 19 देशों के 40 फॉरेन सैटेलाइट्स भारत लॉन्च कर चुका है।
- 27 मिशन पीएसएलवी के कामयाब रहे हैं। एक आधा कामयाब रहा। एक नाकाम रहा।
इस मिशन से कितने ऑर्गनाइजेशन जुड़े हैं?
इसरो के एक अफसर ने बताया, "इस मिशन में इसरो के अलावा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी - एस्ट्रोफिजिक्स और रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट भी शामिल हैं।"
क्या मिनी हबल है इसरो का एस्ट्रोसैट?
इसरो के एस्ट्रोसैट को मिनी हबल कहा जा रहा है। हबल 1990 में लॉन्च हुआ था जो अब तक एक्टिव है। हबल एस्ट्रोसैट से 10 गुना ज्यादा वजनी है। लेकिन एस्ट्रोसैट हबल से 10 गुना सस्ता।
अमेरिका का Hubble
इसरो का ASTROSAT
कब लॉन्च हुआ
1990
सोमवार को लाॅन्चिंग
वजन
16000 किलोग्राम
1631 किलोग्राम
लाइफ
अब तक एक्टिव
5 साल
कॉस्ट
100 अरब रुपए
178 करोड़
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