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  • म्यांमार में आर्मी के अटैक से पहले भाग निकले थे दोषी उग्रवादी: रिपोर्ट

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रिपोर्ट में दावा- म्यांमार में आर्मी के अटैक से पहले भाग निकले थे दोषी उग्रवादी

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठन नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड-खाप्लांग (एनएससीएन-के) पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इसी गुट ने 4 जून को मणिपुर के चंदेल जिले में भारतीय फौज की एक टुकड़ी पर घात लगाकर हमला किया था। उस हमले में सेना के छठी डोगरा रेजिमेंट के 18 जवान शहीद हुए थे।
सूत्रों के मुताबिक एनएससीएन-के को प्रतिबंधित गुटों की सूची में डालने के लिए कैबिनेट नोट 10 जून को ही जारी कर दिया गया था। उससे एक दिन पहले ही भारतीय फौज ने म्यांमार की सीमा में घुसकर इस गुट के उग्रवादियों को ढेर किया था।
म्‍यांमार में कितनी अंदर घुसी थी भारतीय सेना और क्‍या हुआ था हासिल, जानिए
म्‍यांमार की सीमा में घुस कर उग्रवादियों को मारने के भारतीय सेना के ऑपरेशन का असेसमेंट हो चुका है। अब सरकार इस तरह की और कार्रवाई की योजना बना रही है। 9 जून को हुए ऑपरेशन के बाद सेना और खुफिया विभाग ने मिल कर जो आकलन किया, उसके मुताबिक सात उग्रवादियों के शव बरामद हुए हैं और 12 घायल हुए थे। मरने वाले उग्रवादियों में 4 जून को मणिपुर में सेना पर हमला कर 18 जवानों को शहीद करने वाले दस्‍ते का कोई उग्रवादी नहीं था। स्‍पेशल फोर्स के कमांडो तय प्‍लान से आगे बढ़ते हुए म्‍यांमार की सीमा में छह किलोमीटर ज्‍यादा (11 किमी) अंदर चले गए थे। यही नहीं, उन्‍होंने जिन दो कैंपों को निशाना बनाया, उनमें से एक खाली पाया गया। वहां से उग्रवादी पहले ही भाग गए थे। यह जानकारी अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्‍सप्रेस' ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से दी है।
सेना के एक सीनियर इंटेलिजेंस अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि म्यांमार के ओन्जिया और पोन्यो में उग्रवादियों के कैंपों पर हुए हमले में ज्‍यादातर उग्रवादी बच गए। उग्रवादियों के वायरलेस कम्युनिकेशन की डिटेल्स से पता चला है कि करीब 12 उग्रवादी इस मिलिट्री ऑपरेशन में घायल हुए। इस बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं आया है। ऑफ द रिकॉर्ड कहा गया कि मृतकों का आंकड़ा 20 जबकि घायलों की संख्या 11 हो सकती है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तो 100 से ज्यादा उग्रवादियों के मारे जाने का दावा किया गया था।
मैसेज देने के लिए कार्रवाई
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि स्पेशल फोर्सेस के जवान म्यांमार सीमा के अंदर 11 किमी तक घुस गए, जबकि पहले सिर्फ 5 किमी तक जाने का ही तय हुआ था। पोन्यो में जो कैंप तबाह किया गया, वहां उग्रवादियों का मुखिया निकी सुमी छिपा हुआ था। वह सेना पर हमला करने वाले संगठन NSCN-K का स्वयंभू लेफ्टिनेंट कमांडर है। अखबार ने एक अधिकारी के हवाले से बताया है कि सुमी और उसके 40 साथी हमले से पहले कैंप से दूसरी जगह चले गए।
सूत्रों के मुताबिक, हमले के लिए ठिकानों का सिलेक्शन बदले की रणनीति के तहत नहीं किया गया, बल्कि उन्हें सामरिक दृष्टि से निशाना बनाना आसान था। हमला करने के लिए रणनीति बनाने का वक्त बेहद कम मिला, इसलिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सीमा पार स्थित उग्रवादियों के कैंप भी सुरक्षित नहीं हैं।

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