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मोदी के खि‍लाफ राजनीति कर रहे हैं पुरस्‍कार लौटाने वाले साहित्‍यकार: कवि गोपालदास 'नीरज'

5 वर्ष पहले
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आगरा. साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने पर नाराजगी जताते हुए मशहूर कवि गोपालदास 'नीरज' ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन किया है। आगरा में बुधवार को नीरज ने कहा, 'साहि‍त्‍यकार मोदी के खि‍लाफ राजनीति कर रहे हैं। इन सहित्‍यकारों को कांग्रेस के राज में पुरस्‍कार मिला था और अब वही इनसे ये पुरस्‍कार लौटाने का काम करवा रही है। इससे कांग्रेस की ही बदनामी हो रही है। इस बीच, मशहूर गीतकार प्रसून जोशी ने अवॉर्ड लौटाने वाले लेखकों पर कहा है कि इस तरह के विरोधों से देश में असहिष्णुता (इनटॉलरेंस) बढ़ रही है। उन्‍होंने अपने बयान में कहा, 'साहित्‍यिक पहचान के ऊपर पॉलिटिक्‍स होना दुखद है। इससे उन्‍हें पीड़ा होती है।' वहीं, मेरठ पहुंचे बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता सुब्रहमण्‍यम स्‍वामी ने इसे बनावटी विरोध बताया है।
हाल ही में मशहूर शायर मुनव्वर राणा और हिंदी में नॉवेल लिखने वाले काशीनाथ सिंह समेत कई साहित्यकारों ने दादरी कांड जैसी घटनाओं के विरोध में साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया है।
नीरज ने पूछा-रकम क्यों नहीं लौटाई?
नीरज ने कहा, 'पुरस्‍कार लौटाने वालों में से कुछ ने ही राशि‍ लौटाई है। अन्‍य सभी क्‍यों नहीं लौटा देते हैं?' उन्‍होंने सवाल किया कि ऐसे लोगों ने आखि‍र पेंशन भी क्‍यों नहीं लौटाई?
पीएम मोदी को बदनाम करने की साजिश
गोपालदास 'नीरज' ने कहा कि पुरस्‍कार लौटाने वाले साहित्‍यकार झूठ बोल रहे हैं। ये सब पीएम मोदी को बदनाम करने की साजिश है। उन्‍होंने कहा कि साहित्‍य की उपासना करना सत्‍य की उपासना है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। साहित्‍यकारों को चाहिए कि यदि उन्‍हें किसी मामले का विरोध करना है तो कविता लिखें और कथा लिखें। उन्‍होंने कहा कि अप्रिय सत्‍य नहीं बोलना चाहिए।
पद्म श्री और पद्म भूषण से नवाजे जा चुके हैं 'नीरज'
गोपाल दास नीरज को पद्मश्री और पद्मभूषण सम्मान से नवाजा जा चुका है। वे कवि होने के साथ-साथ अच्छे गीतकार भी हैं। उन्‍होंने कई फि‍ल्‍मों में लोकप्रि‍य गीत भी लिखे हैं। उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।
गीत गाकर और कविताएं लिखकर जताया विरोध
आगरा पहुंचे गोपाल दास 'नीरज' ने सवाल उठाया और कहा, 'आखिर सांप्रदायिकता कहां है? मोदी ने अपने मुंह से सांप्रदायिक बातें तो नहीं की है। मैंने भी इमरजेंसी के दौरान सत्‍ता का विरोध किया था, लेकिन उस वक्‍त मैंने कविताएं और गीत लिखे थे। इससे समाज को एक संदेश दिया था।'
गाय को राष्‍ट्रीय पशु घोषि‍त कर देना चाहिए
उन्‍होंने कहा कि गोमांस पर विवाद नहीं होना चाहिए। भारतीय संस्‍कृति में गाय को माता माना गया है। कृष्‍ण गाय को चराते थे। मां के दूध के अलावा गाय ही है जिसका दूध बच्‍चे से बड़ों को फायदा पहुंचाता है। नीरज ने कहा कि गाय को राष्‍ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए। सारे विवाद समाप्‍त हो जाएंगे।
ऐसा काम क्‍यों किया कि कालिख पोती गई
नीरज ने कहा कि भाजपा के पूर्व नेता सुधींद्र कुलकर्णी पर कालिख पोते जाने के बाद पुरस्‍कार लौटाने वाले साहित्‍यकारों ने कहा कि‍ देश का मुंह काला हो गया। नीरज ने कहा, 'मैं कहता हूं कि जब शिवसेना ने मना किया था, तो ऐसा काम ही क्‍यों किया, जिससे कालिख पोती गई।' उन्‍होंने यूपी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि यूपी सरकार ने जितना साहित्‍यकारों के लिए कि‍या उतना किसी ने नहीं किया। अब पेंशन दिया है।
जोशी ने कहा-कलाकार अवॉर्ड लौटाने के लिए नहीं जाने जाते
वहीं, प्रसून जोशी ने कहा कि कलाकार अपने काम के लिए जाने जाते हैं, न कि अवॉर्ड लौटाने के लिए। बता दें कि उन्‍होंने यह बात उस डिबेट के जवाब में कही है, जिसमें इस बात पर बहस हो रही है कि लेखकों का अवॉर्ड लौटाना सही है या नहीं। जोशी ने कहा कि यह बात और सम्‍मानजनक होगी अगर एक साहित्‍यकार अपनी रचना के जरिए खुद को जाहिर करता है।
सुब्रहमण्यम स्वामी ने बताया बनावटी विरोध
साहित्य अकादमी सम्मान लौटाए जाने के मामले में बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुब्रहमण्यम स्वामी ने इसे बनावटी विरोध बताया। उन्‍होंने कहा कि ये सम्मान पिछली यूपीए सरकार ने दिए थे। यूपीए द्वारा दिए गए सम्मान ये लोग हमारी सरकार को लौटा रहे हैं। ऐसा कर ये पिछली सरकार की अवमानना कर रहे हैं, जिन्होंने इन्हें यह सम्मान दिया। सुब्रहमण्यम स्वामी ने कहा कि सभी सम्मान लौटा दें, बीजेपी किसी को सम्मान देने वाली नहीं है। स्वामी ने यह भी कहा कि इन्हें ये सम्मान देना ही नहीं चाहिए था। उन्होंने कहा कि इस मामले को महत्व नहीं देना चाहिए।
क्या है साहित्य अकादमी अवॉर्ड?
साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की शुरुआत 1954 से की गई। यह पुरस्कार हर साल भारतीय भाषाओं के श्रेष्ठ साहित्य को दिया जाता है। इसमें एक ताम्रपत्र के साथ 1 लाख रुपए दिए जाते हैं। 1955 से अब तक तकरीबन 60 लोगों साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया जा चुका है। सबसे पहला साहित्य अकादमी पुरस्कार माखनलाल चतुर्वेदी को 1955 में ‘हिमतरंगिणी' के लिए दिया गया था। आचार्य नरेंद्र देव को 1957 में बुद्ध धर्म शास्त्र के लिए मरणोपरांत यह पुरस्कार दिया गया। साल 1962 में यह पुरस्कार किसी भी लेखक को नहीं दिया गया था।
काशीनाथ सिंह और मुनव्वर राणा के अलावा किन साहित्यकारों ने लौटाया साहित्य अकादमी पुरस्कार, नजर डालिए....
लेखक का नामकिस भाषा के साहित्यकार
उदय प्रकाशहिंदी
नयनतारा सहगलअंग्रेजी
अशोक वाजपेयीहिंदी
साराह जोसेफमलयालम
गुलाम नबी ख्यालकश्मीरी
रहमान अब्बासउर्दू
वरयाम संधूपंजाबी
गुरबचन सिंह भुल्लरपंजाबी
अजमेर सिंह औलखपंजाबी
जी.एन. रंगनाथ रावकन्नड़
मंगलेश डबरालहिंदी
राजेश जोशीहिंदी
गणेश देवीगुजराती
श्रीनाथ डी.एन.कन्नड़
के. वीरभद्रप्पाकन्नड़
रहमत तारीकेरीकन्नड़
बल्देव सिंहपंजाबी
जसविंदरपंजाबी
दर्शन भट्टरपंजाबी
सुरजीत पाटरपंजाबी
चमन लालपंजाबी
होमेन बोरगोहेनअसमिया
मंदाक्रांत सेनबांग्ला
के.एन. दारूवालाअंग्रेजी
नंद भारद्वाजराजस्थानी
के. नीलाकन्नड़
काशीनाथ अंबाल्गीकन्नड़
किन लेखकों ने दिए साहित्य अकादमी से इस्तीफे....
साहित्यकार का नामभाषा
शशि देशपांडेकन्नड़
के. सदचिदानंदनमलयालम
पी.के. पाराकाड्डवमलयालम
अरविंद मालागट्टीकन्नड़

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