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गंगा नदी में मिले 200 से ज्‍यादा शव, आईजी ने कहा-नहीं होगी जांच

7 वर्ष पहले
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कानपुर. उत्‍तर प्रदेश में कानपुर के विठूर और उन्नाव के बॉर्डर पर परियर गांव से सटे परियर घाट पर गंगा नदी में 200 से ज्‍यादा शव, उनके अवशेष और कंकाल तैरते मिले हैं। काफी समय तक इन शवों को कुत्ते, चील और कौवे अपना निवाला बनाते रहे। इनमें बच्चे, बड़े और बूढ़ों के शव शामिल हैं। इनकी पहचान हो पाना मुश्किल है। इन शवों को जब ग्रामीणों ने देखा तो तत्‍काल पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंचकर पुलिस और आईजी आशुतोष पांडेय ने घटनास्‍थल का जायजा लिया। आईजी ने बताया कि यहां श्‍मशान घाट है। ऐसे में, कुछ लोग शवों को पूरा जलाते नहीं है और उसे नदी में फेंककर चले जाते हैं। यह प्रकरण जांच का विषय का नहीं है। लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि यूपी सरकार को पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए। वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्‍यक्ष ने कहा कि बरामद सभी शवों का पोस्‍टमॉर्टम कराकर उनका सम्‍मानपूर्वक अंतिम संस्‍कार किया जाना चाहिए। हालांकि, प्रशासन ने शवों को दफनाने का काम शुरू कर दिया है।
आईजी आशुतोष पांडेय ने कहा कि यदि यहां पानी की कमी है तो श्‍मशान घाट को कहीं और भी शिफ्ट किया जा सकता है। उन्‍होंने डीएम से भी बातचीत करने का आश्‍वासन ग्रामीणों को दिया है। वहीं, परिहर गांव के लोगों का कहना है कि यहां शवों का इस तरह दिखना आम बात है। यहां साल में एक बार यह नजारा देखने को जरूर मिलता है। (वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें)

बताते चलें कि उन्नाव जिले अंतर्गत आने वाले परियर गांव से करीब एक किमी दूर परियर श्‍मशान घाट बना हुआ है। इसी गांव के रमेश ओझा के मुताबिक, हर साल सैकड़ों शव जाड़े के महीनों में इसी तरह ऊपर आ जाते हैं। ओझा ने बताया कि ये वो शव हैं, जिनको लोग पूरा नहीं जलाते हैं या फिर गरीबी के चलते सीधे गंगा में प्रवाहित कर देते हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि दाह- संस्कार करने वाले कर्मकांडी पंडे चंद रुपए के लिए शवों को जलाने के बजाय गंगा नदी में प्रवाहित कर देते हैं।
कानपुर जोन के आईजी आशुतोष पांडेय के मुताबिक, गंगा की स्ट्रीम रोकने की वजह से एक ओर पानी काफी कम हो गया है। इसके चलते इसमें प्रवाहित शव अब नदी में उतराने लगे हैं। उन्‍होंने कहा कि इसमें प्रशासन की कोई लापरवाही नहीं है। उनके मुताबिक, इतनी तादाद में शवों के आने की एक वजह यह है कि गरीब लोग पैसे के अभाव में शवों का दाह-संस्कार करने के बजाय गंगा नदी में प्रवाहित कर देते हैं। अब जिला प्रशासन को ये देखना होगा कि कोई यहां दाह-संस्कार नहीं कर पाए, क्योंकि यहां चेक डैम और गंगा की स्ट्रीम भी नहीं है।

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