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UP में चपरासी के 368 पोस्ट के लिए निकली वैकेंसी, 255 Phd होल्डरों ने भी किया एप्लाई

7 वर्ष पहले
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फाइल फोटोः यूपी के सीएम अखिलेश यादव। सरकार ने प्यून की नौकरी के लिए जो दो शर्त रखी है उसमें साइकिल चलाना भी शामिल है। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटोः यूपी के सीएम अखिलेश यादव। सरकार ने प्यून की नौकरी के लिए जो दो शर्त रखी है उसमें साइकिल चलाना भी शामिल है।
लखनऊ. यूपी सरकार ने सेक्रेटेरिएट में चपरासी की वैकेंसी निकाली है। कुल 368 पोस्ट के लिए करीब 23 लाख कैंडिडेट्स ने अप्लाई किया है। इसमें ग्रैजुएट से लेकर बी.टेक डिग्रीवाले भी शामिल है। यहीं नहीं, इस पोस्ट के लिए 255 पीएच.डी डिग्रीधारकों ने भी अप्लाई किया है। रिक्रूटमेंट प्रॉसेस डायरेक्ट इंटरव्यू से होना है और इसमें चार साल से ज्यादा का वक्त लग जाएगा। अप्लाई करने वालों का कहना है कि यूपी में नौकरी नहीं मिल रही है। ऐसे में, चपरासी की नौकरी ही सही। बता दें कि प्यून पोस्ट के लिए दो शर्तें रखी गई हैं। पहला- अभ्यर्थी 5वीं पास हो और दूसरा- उसे साइकिल चलानी आती हो।
कितने लोगों ने किया अप्लाई?
368 पोस्ट के लिए 23 लाख एप्लिकेशन आए हैं। यूपी में करीब 21.5 करोड़ लोग रहते हैं। इसका मतलब ये हुआ कि हर 93वें शख्स ने चपरासी के पोस्ट के लिए अप्लाई किया है। इस पोस्ट के लिए अप्लाई करने वालों में 255 पीएच.डी डिग्रीधारी और करीब 2 लाख 22 हजार बीटेक डिग्रीधारी शामिल हैं। इसके अलावा एम.एससी, एम.कॉम, बी.एससी, बी.कॉम और एम.ए पास लोगों ने भी इसके लिए अप्लाई किया है।
ऑनलाइन हुआ रजिस्ट्रेशन
सेक्रेटेरिएट के प्रभात मित्तल ने बताया, "प्यून पोस्ट के लिए ऑनलाइन अप्लाई करने का इंतजाम था। अप्लाई करने की डेडलाइन खत्म होने पर जब इसकी काउंटिंग की गई, तो हमारे होश उड़ गए, क्योंकि 368 पोस्ट के लिए 23 लाख से ज्यादा एप्लिकेशन आ गए थे। इस पोस्ट के लिए दो ही क्वालिफिकेशन मांगे गए थे। हालांकि, लड़कियों और हैंडिकैप्ड (विकलांगों) के लिए ये जरूरी नहीं हैं।"
सिर्फ 53 हजार लोग ही निकले 5वीं पास
उन्होंने बताया, "एप्लिकेशन की जांच के बाद पता चला कि प्यून पोस्ट के लिए अप्लाई करने वालों में सिर्फ 53 हजार लोग भी 5वीं पास थे। 20 लाख अभ्यर्थी 6वीं से 12वीं पास हैं। इनके अलावा बी.टेक और एम.एससी वालों के भी एप्लिकेशन आए हैं।" यूपी सरकार के मंत्री अंबिका चौधरी का कहना है कि सीधे इंटरव्यू से भर्ती होनी है। इसमें चार साल से ज्यादा का वक्त लग जाएगा। अगर इस वक्त को कम करना है, तो भर्ती प्रक्रिया में तब्दीली करनी होगी। इसके लिए दोबारा आवेदन मंगवाए जा सकते हैं।
क्या कहते हैं कैंडिडेट्स?
लखनऊ के कैंडिडेट और पीएच.डी कर चुके आलोक चौरासिया ने बताया, "मंदी के कारण मार्केट में जॉब नहीं है। मैं एक साल से बेकार हूं। ऐसे में, चपरासी की ही नौकरी मिल जाए तो करूंगा। इसमें क्या बुराई है।" इस मामले को लेकर चपरासी काफी चिंता में पड़ गए हैं। उनका कहना है कि चपरासी के पोस्ट के लिए अगर इतने क्वालिफाइड लोग अप्लाई करेंगे, तो उनके साथ सीधा-सीधा भेदभाव होगा। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।