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RSS ने कहा- GAY सेक्स कोई क्राइम नहीं, ये पर्सनल आजादी से जुड़ा मुद्दा है

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. आरएसएस ने होमोसेक्शुअल रिलेशनशिप को क्राइम की कैटेगरी से हटाए जाने की मांग का खुलकर सपोर्ट किया है। संघ के ज्वाइंट सेक्रेटरी दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि होमोसेक्शुअलिटी पर आरएसएस का कोई ओपिनियन क्यों होगा? यह क्राइम नहीं है। यह दूसरों की जिंदगी पर असर नहीं डालता। होसबोले ने यह भी कहा कि जल्द ही महिलाएं भी संघ की शाखाओं में पुरुषों के साथ हिस्सा ले सकेंगी। विवाद हुआ तो सफाई...
- गुरुवार को होसबोले ने एक प्रोग्राम के दौरान गे रिलेशनशिप पर यह बयान दिया था।
- जब उनके बयान पर विवाद शुरू हुआ तो शुक्रवार सुबह होसबोले ने एक बयान जारी कर कहा, “ऐसे मामलों से मनोवैज्ञानिक तरीके से निपटा जाना चाहिए। समलैंगिक शादी पर रोक लगाई जानी चाहिए। समलैंगिकता अपराध नहीं लेकिन समाज के लिए अनैतिक है। ”
भारत में क्या है स्थिति?
- भारत उन 70 देशों में से एक है, जहां होमोसेक्शुअलिटी क्रिमिनल ऑफेंस है।
- धारा 377 के तहत होमोसेक्शुअलिटी को अननेचुरल सेक्स की कैटेगरी में रखा गया है। इसमें 10 साल तक की सजा हो सकती है।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने 2009 में धारा 377 को रद्द कर दिया था।
- हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में 158 साल पुराने कानून की इस धारा को बरकरार रखा।
- एलजीबीटी कम्युनिटी को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2013 के अपने आदेश का रिव्यू करने के लिए दायर क्यूरेटिव पिटीशन कॉन्स्टिट्यूशन बेंच को सौंप दी।
आरएसएस के बयान के क्या हैं मायने?
- इस बयान से यह उम्मीद जागी है कि केंद्र सरकार धारा 377 को खत्म करने की दिशा में कदम उठा सकती है।
- इससे पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में एक प्राइवेट मेंबर बिल लाने की कोशिश की, जिसमें होमोसेक्शुअलिटी को डिक्रिमिनलाइज करने की बात कही गई थी।
- बीजेपी सांसदों ने इस बिल का विरोध किया था।
- हालांकि, फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने होमोसेक्शुअलिटी को क्राइम की कैटेगरी से हटाने का सपोर्ट किया था।
- उन्होंने कहा था कि जब दुनियाभर में लाखों लोग इसे चाहते हों, तो आप इसे (गे सेक्स को) नजरअंदाज नहीं कर सकते।
- जेटली से पहले आरएसएस से जुड़े रहे और अब बीजेपी जनरल सेक्रेटरी राम माधव ने कहा था कि होमोसेक्शुअलिटी पर हर शख्स की अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन जब यह क्राइम का मामला हो, तो इस पर अच्छी तरह से विचार करने की जरूरत है।
महिलाएं भी ले सकेंगी संघ की शाखाओं में हिस्सा
- होसबोले ने कहा है कि अगले साल से महिलाएं भी संघ की फील्ड एक्टिविटीज और शाखाओं में हिस्सा ले सकेंगी।
- फिलहाल, महिलाएं संघ की कई सोशल एक्टिविटीज से तो जुड़ी होती हैं, लेकिन उन्हें लोकल यूनिटों या शाखाओं में जाने की इजाजत नहीं है।
- महिलाओं के संघ में जाने पर होसबोले ने कहा, "क्रांति एक रात में तो हो नहीं जाती। इसमें वक्त लगता है। महिलाओं के लिए संघ में राष्ट्रीय प्रचारिका समिति बनाई जाएगी।"
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