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तय वक्त से 25 मिनट पहले ही फांसी पर लटकाया गया याकूब को, सीएम देंगे ब्योरा

8 वर्ष पहले
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नागपुर/मुंबई/नई दिल्ली. 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को नागपुर के सेंट्रल जेल में सुबह 7 बजे फांसी पर लटका दिया गया। इससे पहले रात 12 बजे से सुबह पांच बजे तक जो घटनाक्रम चला, उसे देखने-जानने के लिए लगभग आधा देश जगा रहा। रात करीब साढ़े बारह प्रशांत भूषण सहित 12 वकीलों ने चीफ जस्टिस एच एल दत्तू के घर जाकर याकूब को बचाने का एक और प्रयास किया। चीफ जस्टिस ने करीब दो बजे रात में बेंच बनाई और करीब सवा तीन बजे सुप्रीम कोर्ट में बेंच की सुनवाई शुरू हुई और पांच बजे एक बार फिर याकूब के खिलाफ फैसला आया (पढ़ें- पूरा ब्‍योरा)
सुप्रीम कोर्ट का आखिरी फैसला आने के बाद पहले से तय वक्‍त, सुबह सात बजे, याकूब को नागपुर सेंट्रल जेल में फांसी पर लटका दिया गया। फांसी के वक्त कुल 6 पुलिस अफसर मौजूद थे। इनमें डीआईजी, दो कॉन्सटेबल, सीएमओ और जेल सुपरिंडेंटेंट शामिल हैं। इस दौरान ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और डॉक्टरों की एक टीम भी मौजूद थी। करीब सवा सात बजे याकूब की डेड बॉडी को तख्ते से उतार कर जेल में ही उसका पोस्टमॉर्टम किया गया। इसके करीब एक घंटे बाद याकूब के भाई सुलेमान को बॉडी सौंप दी गई। (याकूब के वकील को कैसे तीखे सवालों का सामना करना पड़ा, जानने के लिए यहां क्लिक करें)
नागपुर की जेल में 30 साल बाद किसी को फांसी
फांसी देने से पहले याकूब को फांसी यार्ड में रखा गया था। वहां से फांसी दी जाने वाली जगह कुछ ही दूरी पर है। इस जेल में करीब 30 वर्ष बाद किसी कैदी को फांसी दी गई। याकूब से पहले नागपुर जेल में 23 कैदियों को फांसी दी गई थी। (क्या थी याकूब की आखिरी इच्छा, जानने के लिए यहां क्लिक करें)
कौन था याकूब?
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट याकूब का पूरा नाम याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन था। 1993 में मुंबई में हुए बम ब्लास्ट में कथित रुप से दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन और उसके भाई अयूब मेमन साजिश रचने वाले अहम लोग थे। इन्हें मोस्ट वॉन्टेड अपराधी भी घोषित किया गया था। याकूब के साथ 10 अन्य आरोपियों को भी विशेष टाडा कोर्ट ने 2007 में फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन उन लोगों की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दी थी। इसी मामले में एक्टर संजय दत्त 6 साल की सजा भुगत रहे हैं। (कल्पेश याग्निक का कॉलम: देश कभी इसे माफ नहीं करेगा, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
क्यों दी गई फांसी?
- 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट मामले में याकूब ने पैसों का इंतजाम और कहां, कौन बम रखेगा इसकी प्लानिंग की थी।

- बम ब्लास्ट की साजिश को अंजाम देने के लिए हवाला के जरिए याकूब ने पैसे जुटाए।

- पाकिस्तान जाकर हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने वालों के लिए याकूब ने टिकट का इंतजाम किया था।

- साजिश को अंजाम देने के लिए याकूब ने एक दूसरे दोषी को 85 ग्रेनेड लाकर दिए।

- धमाकों में इस्तेमाल किए गए 12 बम याकूब के घर पर ही बनाए गए थे।

- याकूब के घर से ही घटना के दिन बम धमाकों के लिए भेजे गए।

- याकूब टाइगर मेमन का भाई था और धमाकों के बाद परिवार के साथ देश से फरार हो गया था।

-1994 में दिए एक इंटरव्यू में याकूब ने बम धमाके में अपनी भूमिका स्वीकारी थी। साथ ही उसने दाऊद, टाइगर और दूसरे आरोपियों के पाकिस्तान में होने का दावा किया।

-याकूब पर अन्य आरोपियों के साथ ही टाडा कोर्ट में केस चला और उसे फांसी की सजा सुनाई गई।
257 लोगों के हत्यारे को लालच ने पहुंचाया फांसी तक
12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सीरियल धमाकों में 257 लोगों की जान गई थी। उस धमाके का जिम्मेदार 53 साल का याकूब रज्जाक मेमन है। टाइगर मेमन और अंडरवर्ल्ड सरगना दाउद इब्राहिम द्वारा रची गई इस साजिश में याकूब एक अहम किरदार था, जिसने धमाकों में शामिल अन्य लोगों को हथियार, गोला, बारूद, डिटोनेटर्स आदि सप्लाई किए। याकूब ने ही धमाकों के लिए अपने मिलने वालों से 21.90 लाख रुपए भी जुटाए थे। हमले का पूरा प्लॉट तय करने के बाद, यहां तक कि कौन कहां बम रखेगा याकूब धमाके से एक दिन पहले अपने परिवार के 9 लोगों के साथ कराची फरार हो गया।
केस के ऑफिशियल रिकॉर्ड के अनुसार, सीबीआई ने उसे दिल्ली में 5 अगस्त 1994 को गिरफ्तार किया। इसके कुछ ही हफ्ते बाद टाइगर की पत्नी रुबीना सहित आठ अन्य मेमन परिवार के सदस्यों को देश में गिरफ्तार किया गया। पर बड़ा सवाल है कि याकूब भारत क्यों आया था? वो खुद तमाम तर्क देकर कोर्ट और जांच अधिकारियों को गुमराह करता रहा। लेकिन सच यह है कि वो अपनी उस प्रॉपर्टी के लालच में आया था, जो उसने अपनी काली कमाई से बनाई थी।
हजारों करोड़ का था इन्वेस्टमेंट
कोर्ट के रिकॉर्ड को देखें तो पता चलता है कि मेमन परिवार के सदस्य धमाके के बाद सील की गई प्रॉपर्टी के चक्कर में कई बार मुंबई कोर्ट का चक्कर लगा चुके हैं। कई मुकदमे तो अब भी विचाराधीन हैं। दरअसल, मेमन परिवार का मुंबई में हजारों करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट है। करीब 100 करोड़ की प्रॉपर्टी का तो स्पष्ट पता है। माहिम स्थित अल-हुसैनी बिल्डिंग में ही उसके आठ फ्लैट थे। दरअसल टाइगर मेमन ने स्मगलिंग से कमाया गया करोड़ों रुपए मुंबई में रियल स्टेट में लगाया था। चार मेमन भाइयों में याकूब चार्टर्ड अकाउंटेंट था। उसे ही टाइगर के सभी निवेशों के बारे में पता था। वह अपनी एक्सपोर्ट फर्म तेजारत इंटरनेशनल की मदद से काले पैसे को ठिकाने लगाता था। टाइगर मेमन की कमाई का एक मुख्य जरिया सोने और चांदी की स्मगलिंग थी, जिससे उसने रातोंरात करोड़ों रुपए कमाए हैं। मेमन परिवार का माहिम में ऑफिस और बांद्रा में भी फ्लैट था। यही नहीं इस परिवार ने मोहम्मद अली रोड पर भी कई दुकानें और मकान खरीद रखे थे।
बनाना चाहते थे शापिंग कॉम्पलेक्स

सांता क्रूज में भी मेमन भाइयों की एक बड़ी जमीन थी, जिस पर ये शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाना चाहते थे। इनके परिवार की कुछ प्रॉपर्टी झावेरी बाजार में थी, जिसे लेकर एक लोकल बिजनेसमैन के साथ इनका विवाद भी था। धमाकों के बाद हुई जांच में यह भी दावा किया गया था कि याकूब राजनीति में आने की तैयारी में था। वो कई लोकल मामलों में काफी दखल रख रहा था। लेकिन मुंबई में हुए दंगों के कारण वो राजनीति में नहीं जा पाया। याकूब के परिवार ने अपनी बहनों और बहुओं के नाम पर भी करोड़ों का निवेश किया हुआ है। यह भी कहा जाता है कि हो सकता है जब याकूब ने सीबीआई के साथ सरेंडर की डील की हो तो सीबीआई को उस समय याकूब के इस लालच का पता न हो।
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