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20 किमी/घंटा तेज होगी रेलों की रफ्तार

7 वर्ष पहले
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हटियास्टेशन पर जल्द ही ऐसा सिस्टम लगने वाला है जिससे यात्रियों को ट्रेन की खटपट नहीं सुनाई देगी। ट्रैक बदलने पर झटके नहीं लगेंगे। राजधानी, शताब्दी जैसी ट्रेनों की रफ्तार में 20 किलोमीटर प्रतिघंटा का इजाफा होगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा। ये संभव हो सकेगा सीमेंस मार्क-2 इलेक्ट्रॉनिक रूट रिले इंटरलॉकिंग (आरआरआई) सिस्टम से। यह पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड सिस्टम है जो ट्रेन की आवाजाही, ट्रैक बदलने, क्रॉसिंग खोलने-बंद करने आदि का काम खुद कर देगा।

दो महीने में पूरा कर लिया जाएगा काम

^यह काम अगस्त तक पूरा हो जाएगा। 326 रूट सिग्नल वाला मार्क-2 सिस्टम हटिया में पहला होगा। सिस्टम लगाने के लिए दो मंजिला मुख्य इमारत बन चुका है। स्टेशन के पूर्व और पश्चिम में दो केबिन बनाए गए हैं। इनमें रूट इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाया जाएगा। जिनसे ट्रैक को बदला या जोड़ा जाएगा।\\\'\\\' एसकुमार, सीनियर डीएसटी, रांची रेल मंडल

पहले लीवर सिस्टम से ट्रैक को किया जाता था चेंज।

हटिया स्टेशन पर लगाया जा रहा है आरआरआई सिस्टम।

{राजधानी एक्सप्रेस की गति 110 से बढ़ाकर 130-140 किमी/घंटा हो जाएगी। अन्य गाड़ियों की गति भी लगभग 20 किमी/घंटा बढ़ जाएगी।

{केबिनों से संपर्क बनाने और पीछे रही ट्रेनों को सिग्नल भेजने संबंधी मानवीय भूल की संभावना कम होने से हादसों में कमी आएगी।

{अभी एक ट्रेन को ट्रैक पर लाने के लिए चार केबिनों में संपर्क करना होता है। इससे एक ही स्थान से गाड़ियों का रूट ट्रैक निर्धारित होगा।

{अभी ट्रैक व्यस्त होने पर ट्रेनों को आउटर पर खड़ा होना पड़ता है। इस सिस्टम में ट्रेन खाली ट्रैक से दूसरे प्लेटफॉर्म पर चली जाएगी।

{केबिन कर्मियों का काम खत्म होने पर रेलवे उन्हें दूसरे काम में लगाएगा।

कंप्यूटराइज्ड सिस्टम के लग जाने के बाद सालों पुराना लीवर सिस्टम हटा दिया जाएगा। उसकी जगह कंट्रोल रूम में बैठे-बैठे एक बटन से ये सारा काम किया जाएगा। जर्मनी की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी सीमेंस ने आरआरआई सिस्टम का अपडेट वर्जन मार्क-2 बनाया है। यह ट्रेनों का सारा डाटा खुद ही अपडेट और सेव करेगा। मार्क-2 सिस्टम पहली बार हटिया स्टेशन पर लग रहा है। इस कंपनी का सबसे पहला आरआरआई सिस्टम चर्चगेट स्टेशन पर 1950 में लगा था। इस सिस्टम के चालू होने से हटिया-रांची-मुरी हटिया-ओरगा सेक्शन रूट पर सफर और भी सुरक्षित हो जाएगा अन्य ट्रेनों की गति पर भी इस तकनीक का असर पड़ेगा।