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बरेठ स्टेशन से मंडी बामौरा के बीच रेलवे के तीसरे ट्रैेक की हुई ट्रायल

6 वर्ष पहले
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गंजबासौदा। बरेठ से मंडीबामौरा के बीच गुरुवार को तीसरी लाइन पर इंजन दौड़ाकर ट्रायल ली गई। बरेठ से शाम सात बजे के बाद तीसरी लाइन से इंजन प्रवेश कराया गया। यह इंजन मंडी बामौरा तक गया। वापस उसी ट्रैेक से बरेठ आया।
इस ट्रैक के लिए रेलवे ने तीन सीआरएस निरीक्षण की तारीखें जारी की थी। लेकिन तीनों बार ही उनको निरस्त करना पड़ा। इसके चलते अब इंजन ट्रायल का कार्यक्रम रखा गया है। इससे ट्रैक को जोडऩे का रास्ता जल्द साफ हो सकता है।

एक साल से तैयार है ट्रैक : बरेठ मंडी बामौरा के बीच तीसरी लाइन का कार्य एक साल पहले पूरा हो चुका है। छुटपुट कार्य भी छह महीने पहले पूरा कर लिया गया था। आरवीएनएल ने सीआरएस को पत्र भी भेजा था।

इसी के कारण इस ट्रैेक के निरीक्षण के लिए तीन तारीखें जारी की गई। उनको ऐन समय पर निरस्त कर दिया गया। बुधवार को भोपाल से इंजन ट्रायल का कार्यक्रम जारी किया गया।

इसके तहत दोपहर तीन बजे भोपाल से इंजन भेजा गया। इंजन जैसे ही बरेठ पहुंचा उसे तीसरे ट्रैक से ट्रायल के लिए रवाना किया गया।

रेलवे और आरवीएनएल अधिकारी पहुंचे : इंजन ट्रायल के दौरान रेलवे और आरवीएनएल के अधिकारी भी मौजूद थे। इनमें ट्रेन इंस्पेक्टर एसएल मीणा , पीडब्लूआई आरवीएनएल खान और लोको इंस्पेक्टर शामिल हैं। सभी अधिकारी ट्रायल के दौरान इंजन में बैठे थे। इंजन को ट्रैक पर पहले धीमी रफ्तार में दौड़ाया गया। बाद में उसे तेज गति से चलाया गया। जिससे पता चले कि ट्रैक में कही जंप और कही कंपन की स्थिति बन रही है या नहीं।

अब तक 50 किलोमीटर ट्रैक जुड़ा : बीना से भोपाल तक 145 किलो मीटर लंबे सेक्शन में तीसरी लाइन डालने के लिए कार्य आरवीएनएल को सौंपा गया था। आरवीएनएल ने यह कार्य बीना से सांची तक एलएनटी और सांची से भोपाल तक नागार्जुन कंपनी को दिया था। तीसरा ट्रेक अब तक बरेठ से गुलाबगंज तक और भदभदा से सूखी तक जोड़ा जा चुका है। कुल मिला कर 50 किलोमीटर ही रनिंग ट्रैक में शामिल किया गया है। विदिशा से सांची के बीच कार्य अभी पूरा नहीं हो पाया है।

ट्रायल किया है : बरेठ से मंडीबामौरा तक तीसरी लाइन का ट्रायल इंजन के माध्यम से किया गया। आरके मीणा, सह प्रबंधक बरेठ रेलवे स्टेशन।


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