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PHOTOS: ओडिशा में आज निकलेगी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा

8 वर्ष पहले
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पुरी. ओडिशा समेत देशभर में आज कई शहरों में 138वीं भगवान जगन्नाथ रथयात्रा शुरू हो गई। ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में शनिवार सुबह 8 बजे पूजा की गई। इसके बाद दोपहर 2.30 बजे पुरी में भव्य रथयात्रा शुरू हो गई। इस यात्रा में करीब 50 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर में 19 साल के बाद आज मूर्तियों को बदला गया। ये मूर्तियां नीम के पेड़ की लकड़ी से बनाई गई हैं। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की दूसरी तिथि को मशहूर जगन्नाथ रथयात्रा निकाली जाती है। पुरी की रथयात्रा 29 जुलाई को खत्म होगी।
45 फीट ऊंचा है जगन्नाथ का रथ
भगवान जगन्नाथ का रथ 45 फीट ऊंचा होता है, जिसे पीले रंगों से सजाया जाता है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की मूर्ति राधा और श्रीकृष्ण का रूप है। रथ यात्रा में सबसे आगे बड़े भाई बलराम का रथ होता है, जिसकी ऊंचाई 44 फीट होती है। इसे नीले रंग से सजाया जाता है। इसके बाद बहन सुभद्रा का रथ 43 फीट ऊंचा होता है। इस रथ को काले रंग से सजाया जाता है। तीनों रथों को पुरी के मुख्य रास्तों पर घुमाया जाता है। शाम को ये रथ मंदिर में पहुंचते हैं और मूर्तियों को मंदिर में ले जाया जाता है।
19 साल बाद बदलेंगी मूर्तियां
यात्रा के दूसरे दिन तीनों मूर्तियों को सात दिन तक मंदिर में रखा जाता है और लाखों की संख्या में भक्त भगवान के दर्शन करते हैं। भगवान के भोग को प्रसाद के रुप में भक्तों में बांटा जाता है। सात दिनों के बाद यात्रा की वापसी होती है। भगवान के रथों को बड़ी-बड़ी रस्सियों से खींचा जाता है। जगन्नाथ मंदिर का नव कलेवर विधान इस बार विवादों में आ गया है। नव कलेवर विधान की धार्मिक रस्म को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है। इस बार 19 साल बाद नीम की लकड़ी से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा नई मूर्तियां बनाई गई हैं। स्थानीय भाषा में इन्हें 'दारु ब्रह्मा' कहा जाता है। पुरी मंदिर के इस विधान को लेकर विपक्ष ने नवीन पटनायक सरकार को बुरी तरह से घेर लिया है। इसकी खबर मीडिया में लीक होने पर सवाल उठ रहे हैं।
भगवान को लगता है 56 भोग
पुरी जगन्नाथ मंदिर की सबसे खास बात है 56 भोग (पकवान)। माना जाता है कि ये 56 भोग एक-दुसरे के ऊपर रख जाते हैं। देवी सुभद्रा के कमरे में इन्हें रखा जाता है। इसमें सबसे ऊपर का खाना सबसे पहले पकता है। कहा जाता है कि देवी सुभद्रा इसे पका देती हैं, जिसे महाप्रसाद के रूप में लोगों में बांटा जाता है। यहां विश्व की सबसे बड़ी रसोई में 500 रसोइए और उनके 300 सहयोगी काम करते हैं। भगवान जगन्नाथ का महाभोग मिट्टी के बर्तनों में बनाया जाता है।
आगे की स्लाइड्स में देखिए, जगन्नाथ रथ यात्रा और मंदिर के PHOTOS...