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लुभाने वाले 4 स्पॉट

7 वर्ष पहले
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पाली। मेवाड़-मारवाड़ की सीमा पर स्थित रावली-टाडगढ़ की वादियां हरियाली की चादर ओढ़ चुकी हैं। ऊंचे पर्वत गहरी खाइयों के बीच गुजरने वाली मावली-मारवाड़ ट्रेन के यात्री इस रोमांचक सफर का लुत्फ उठा सकते हैं। इलीट क्लास के यात्री, सैलानियों प्रकृतिप्रेमियों को आकर्षित करने के लिए रेलवे ने भी पहली बार इस रूट की दोनों ट्रेन में एसी सेकंड का कोच 7 जुलाई से जोड़ने जा रहा है।

राजस्थान पर्यटन निगम के आग्रह पर ये स्पेशल कोच तीन महीने के लिए लगाए जाएंगे। रेलवे को इन तीन महीनों में पर्याप्त यात्री मिलने पर सैकंड एसी कोच स्थाई रूप से चलाया जाएगा।

रेलवे 7 जुलाई से मावली-मारवाड़ ट्रेन में पहली बार लगा रहा है सेकंड एसी कोच

रेलवे के खामली घाट, गोरम घाट, फुलाद सेक्शन राज्य पर्यटन के रावली टाड गढ़ क्षेत्र आपस में जुड़े हुए हैं। इन एडवेंचर टूरिज्म क्षेत्रों के विकास की योजना राजस्थान सरकार रेल विभाग मिल कर बना रहे हैं। अधिकारिक स्तर पर सर्वे तथा वार्ता हो चुकी है। 7 जुलाई से एसी सेकंड कोच तीन माह के लिए ट्रायल के तौर पर चलाना तय किया है। नरेशसालेचा, डीआरएम अजमेर।

ऐसे कर सकते हैं ये रोमांचक सफर

मावली से सुबह 6.35 बजे रवाना होकर दोपहर 12.50 बजे मारवाड़ जंक्शन और वहां से दोप. 1.50 बजे चल शाम 7.50 बजे मावली वापसी।
पर्यटक ट्रेन संख्या 5275 5276 के सेकंड एसी कोच के लिए रिजर्वेशन सिस्टम से टिकट बुकिंग करा सकेंगे।

आठ डिब्बों वाली इस ट्रेन में अभी सेकंड क्लास के जनरल कोच हैं। स्पीड 45 से 50 किमी प्रति घंटा।

लुभाने वाले 4 स्पॉट

खामली घाट, गोरम घाट और फुलाद स्टेशनों के बीच 40 किलोमीटर के रेलखंड में विकट मोड़, ऊंचे पहाड़ और सैकड़ों फीट गहरी खाइयां

खामली घाट, गोरम घाट स्टेशनों के बीच दो सुरंगों से गुजरती है ट्रेन। एडवेंचर टूरिज्म वाला रावली-टाडगढ़ घाट सेक्शन यहीं से शुरू होता है।

चार जगह पर बड़े झरने पहाड़ों से खाइयों में गिरते दिखते हैं, बारिश के जोर पकड़ते ही कुछ दिन बाद शुरू हो जाएंगे। हरियाली तो हो चुकी है।

जोग मंडी ब्रिज तथा परबत सिंह की धूणी में ट्रेन अंग्रेजी के सी अक्षर के आकार में घूमती है। इंजन और आखिरी डिब्बा आमने-सामने जाते हैं।