पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • City Montessori School Not Taking Admission Of Poor Childrens In Lucknow

कोर्ट केस हारने पर भी नहीं बदला CMS का तेवर, बच्चों से कहा- यहां नहीं पढ़ पाओगे

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
लखनऊ. राजधानी में शिक्षा के समान अधिकार की खुलेआम धज्जियां उड़ाने वाले सिटी मांटेसरी स्कूल के तेवर कोर्ट केस हार जाने के बाद भी नहीं बदले हैं। मंगलवार को सिटी मांटेसरी स्कूल की इंदिरानगर स्थित ब्रांच पर पहुंचे बच्‍चों को स्‍कूल प्रशासन ने यह कहकर भगा दिया कि तुम लोग घर जाओ, यहां नहीं पढ़ पाओगे। हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं। यह बच्‍चे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. प्रवीण मणि त्रिपाठी के आदेश पर खंड शिक्षा अधिकारी अजय द्विवेदी और अपने माता-पिता के साथ स्‍कूल पहुंचे थे।
क्‍या है पूरा मामला
गौरतलब है कि शिक्षा के समान अधिकार के अंतर्गत अब कोई भी गरीब बच्चा अपने एरिया में सरकारी स्कूल न होने पर एक किलोमीटर के दायरे में मौजूद किसी भी प्राइवेट स्कूल में पढ़ सकता है। वहीं, निजी स्कूलों को ऐसे बच्चों के लिए अपने यहां 25 परसेंट का कोटा रखना होता है। साथ ही बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति सरकार करती है। इसी के तहत इंदिरानगर के लवकुश नगर में रहने वाले करीब 31 बच्चों ने सीएमएस इंदिरानगर ब्रांच में आवेदन किया था। इस पर सीएमएस ने अपने यहां सीटें फुल होने का हवाला देते हुए एडमिशन लेने से इनकार कर दिया था। बाद में कोर्ट केस में यह साबित हुआ कि सीएमएस की इंदिरानगर ब्रांच में सीटें होने के बावजूद इन गरीब बच्चों को एडमिशन नहीं दिया गया। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल को 31 में से 13 बच्चों का आवेदन सही पाए जाने पर उनका तुरंत एडमिशन लेने का आदेश दिया था।
अच्छी एजुकेशन मिलने के बजाए मिली धमकी
स्‍कूल पहुंचे बच्‍चे पाखी, प्राची, अर्पिता, आदित्य समेत 13 बच्‍चों ने सोचा था कि मंगलवार को उनका स्‍कूल में एडमिशन हो जाएगा। इसके बाद बुधवार से उन्‍हें भी अच्छी शिक्षा मिलेगी, लेकिन स्‍कूल पहुंचकर उनके सपने टूट गए।
अर्पिता के पिता धर्मेंद्र वाल्‍मीकि ने बताया कि प्रिंसिपल रुचि भुवन जोशी ने बच्चों और उन सबको भगाते हुए कहा कि तुम लोग यहां नहीं पढ़ पाओगे, इसलिए घर भाग जाओ। इस मामले में स्‍कूल सुप्रीम कोर्ट जा रहा है और एडमिशन नहीं हो पाएगा।
क्या लिखा था पत्र में
इन 13 बच्‍चों की लड़ाई लड़ने वाली भारत अभ्युदय फाउंडेशन की को फाउंडर समीना बानो ने dainikbhaskar.com से बातचीत में बताया कि बीएसए डॉ. प्रवीण मणि त्रिपाठी ने सिटी मांटेसरी के प्रबंधक को एक पत्र भेजा था। इसमें निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 और उत्तर प्रदेश निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 का हवाला देते हुए इन 13 बच्‍चों को प्रवेश देने का आदेश दिया था। साथ ही पत्र में सीएमएस स्कूल द्वारा एडमिशन के विरोध में पारित रिट को हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने और बीएसए को एडमिशन करवाने के हाईकोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया गया था।
आगे की स्‍लाइड्स में देखिए, संबंधित तस्‍वीर...
खबरें और भी हैं...