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महाराजा अज्ज सरोवर में फेंकी जा रही गंदगी

6 वर्ष पहले
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खरड़नेशनल हाईवे के साथ सटे विशाल महाराजा अज्ज सरोवरों इन दिनों पूरी तरह से बदहाली का शिकार होता जा रहा है। जिससे हिन्दू धर्म में विश्वास रखने वाले आम और खास लोगों को मनों को काफी ठेस पहुंच रही है। इतना ही प्रशासन की लापरवाही के चलते जिस तरह से सरोवर में कई तरह की गंदगी को फेंका जा रहा है और सरोवर की पवित्रतता दिन प्रतिदिन धूमिल होती जा रही है उसे देख कर खरड़ वासियों के दिलों को भारी ठेस पहुंचती है। यह कहना है कि मोहाली विकास मंच खरड़ सर्कल के प्रधान कीरत सिंह ा। कीरत सिंह ने बताया कि कि वह इस मामले को लेकर खरड़ एसडीएम अमनिंदर कौर बराड़ को मिले और समस्या से अवगत करवाते हुए एक ज्ञापन सौंपा है। इस दौरान उनके साथ जीवन जांच सोसाइटी के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह सिद्धू , गौरव, मनप्रीत सिंह और रूरल एरिया जिला मोहाली के अध्यक्ष जगमोहन सिंह संधू भी उपस्थित थे।

पत्रकारों को जानकारी देते हुए कीरत सिंह ने बताया कि अज्ज सरोवर जो खरड़ की गोद में बसा हुआ है और कई वर्ष पहले इसे भगवान श्री राम चन्द्र जी के पिता दशरथ के पिता महाराजा अज्ज ने बनवाया था। लेकिन आज यह सरोवर पूरी तरह से बदहाली का शिकार हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह जगह पर नगर परिषद की हद में आती है। किंतु जगह इतिहास में एक विशेष स्थान रखती है। उन्होंने कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि खरड़ शहर में जहां पर ऐसी ऐतिहासिक महत्ता वाली जगह को खास तवज्जो देना बनता था। वहीं इस जगह को कूड़ा-कर्कट मुर्गियों का कचरा अन्य तरह की गंदगी फैंक कर इसकी पवित्रतता को अपवित्र किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि प्रशासन की लापरवाही रवैये के चलते सरोवर की कुछ जगहों पर नाजायज कब्जों से भी इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि एसडीएम को ज्ञापन सौंप कर उन्होंने मंच के अनेकों कार्यकर्ताओं सदस्यों का समर्थन प्राप्त करके अपील की है कि सरकार इस जमीन की मलकीयत को देख कर नाजायज कब्जे को हटवाएं। वहीं सरोवर वाली जगह का सही तरीके से इस्तेमाल करते हुए खरड़ निवासियों के लिए एक सुंदर पार्क बनाए जाए जिससे खरड़ शहर की सुंदरता में वृद्वि हो सके और लोगों को मनोरंजन की सुविधाएं उपलब्ध हो सके। इसके अलावा सरोवर की जगह को चंडीगढ़ सेक्टर-42 की संदर लेक (झील) की तर्ज पर इस जगह को डेवलप करके झील बनाई जाए , जिससे पवित्र सरोवर की याद भी ताजा रखी जा सके। उन्होंने कहा कि मंच की ओर से इस बीड़ा को उठाया गया है और यह लड़ाई अंतिम दम तक जारी रहेगी। क्योंकि यह लड़ाई किसी भी तरह से कोई राजनीतिक धर्म से नहीं। बल्कि इतिहास को संजो कर रखने की बात है।