मार्केट कमेटी से साथ लगते नाले पर स्लैब नहीं, हो सकता है हादसा
स्थानीय रेलवे रोड से सटे मार्किट कमेटी के दफ्तर के साथ से गुजरते नाले पर कई जगहों से स्लैब्स नहीं होने की वजह से खुला नाला कभी भी हादसे का कारण साबित हो सकता है पर करीब दो वर्षों का लंबा अरसा गुज़र जाने के बावजूद नगर काउंसिल द्वारा खुले नाले पर स्लैब्स रखवाने के बाबत कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
मार्किट कमेटी से रेलवे स्टेशन की ओर जाते मार्ग पर दाई ओर बड़ा नाला गुज़र रहा है जो रात के वक्त वाहन चालकों तथा पैदल जाने वाले लोगों के लिए कभी ही हादसे का सबब बन सकता है जिसका कारण नाले के ऊपर से कई जगहों पर स्लैब्स का नहीं होना है। स्लैबों के अभाव में कई बार वाहन चालकों की गाड़कयां बैक करते वक्त खुले नाले में फंस चुकी है। नाले के कई जगहों से खुला होने के कारण जहां कभी भी कोई व्यक्ति या पशु इसमें गिर कर चोटिल हो सकता है वहीं बिना स्लैब के इस नाले के पास शाम के वक्त खाने पीने का सामान बेचने वाली रेहड़ियां भी खड़ी रहती है जिसके कारण यहां लोगों की भीड़ रहती है और ऐसे में कई जगहों से खुला नाला हादसे हादसे का कारण साबित हो सकता है। मोहित विनायक का कहना था कि नाले के ऊपर कई जगहों पर काउंसिल द्वारा स्लैब नहीं रखवाई गई जिसकी वजह से रात के वक्त इसमें कभी भी कोई व्यक्ति खासकर दोपहिया वाहन चालक इसमें गिर कर घायल हो सकता है। नगर काउंसिल अधिकारियों को जल्द से जल्द लोगों को पेश रही इस समस्या का समाधान करते हुए नाले के ऊपर स्लैब रखवानी चाहिए।
इस संबंधी काउंसिल के सेनीटरी इंस्पेक्टर अशोक कुमार से संपर्क करने पर उनका कहना था कि शहर के अन्य कई हिस्सों के अनकवर्ड नालों को ढकने के लिए नई स्लैब्स बनवाई जा रही है। जल्द ही मार्किट कमेटी के साथ वाले खुले नाले को कवर करवा दिया जाएगा।
इस मामले में जतिंदर कुमार ने बताया कि कि नाले के पास उसी जगह पर खाने-पीने के सामान की रेहड़ियां खड़ी होती हैं। जहां पर नाले के ऊपर स्लैब नहीं है। यहीं पर नाले से निकाली गई गाद का ढेर लगने से वातावरण तो दूषित होता है साथ ही शाम यहां लोगों की भीड़ होने से कभी भी खुला नाला खतरनाक साबित हो सकता है। नई स्लैबों का निर्माण करवा कर नगर काउंसिल को नाले के खुले हिस्सों के ऊपर रखवाना चाहिए ताकि लोगों को परेशानी ना झेलनी पड़े। वहीं, कुलदीप सिंह का कहना है कि नाले के ऊपर स्लैबों का होना कभी भी हादसे का कारण बन सकता है। बरसात के वक्त नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं और ऐसे में नाले के खुले हिस्से कहां हैं इसका आभास मार्ग से गुजरने वालों को नहीं हो पाता। अकसर लोगों की गाड़ियां बैक करते वक्त खुले नालों में फंस जाती हैं जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।