सांझ केंद्र से ले सकते हैं किसी भी एफआईआर की कॉपी
सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के तहत थानों को किया जा रहा ऑनलाइन
आपकोयदि किसी भी एफआईआर के बारे कोई जानकारी प्राप्त करनी है या स्टेटस देखना है तो आप पुलिस विभाग द्वारा स्थापित किए गए सांझ केंद्र में जाकर यह कर सकते हैं। इसके लिए आपको प्रति कॉपी पांच रुपए खर्च करने होंगे जोकि सरकारी फीस है।
आपकी अपनी किसी केस की एफआईआर हो या फिर किसी अन्य की। सांझ केंद्र का स्टाफ आपको यह मुहैया करवाएगा ही। यह सब पंजाब पुलिस केंद्र के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम(सीसीटीएनएस) के प्रोजेक्ट के तहत कर रही है और मोहाली पुलिस विभाग में डीएसपी आलम विजय को इसका नॉडल आफिसर नियुक्त किया गया है। डीएसपी ने कहा कि अब जितनी भी एफआईआर डीडीआर दर्ज हो रही है वह ऑन लाइन है।
पहलेक्या होता था: पहलेकोई घटना घट जाने पर पुलिस को हाथ से फस्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट(एफआईआर) लिखनी पड़ती थी। जिसके काफी समय लगता है। इस एफआईआर के कट जाने के बाद ही पुलिस हार्ड काॅपी शिकायककर्ता हो दे सकता था। लेकिन अब ऑन लाइन हो जाने के कारण पुलिस उस दिन वह मैन्यूल एफआईआर को टाइप कर ऑन लाइन कर देते हैं। इसके लिए प्रत्येक पुलिस थाने में अलग से स्टाफ है। जिनका काम मात्र रोजाना थाने में दर्ज होने वाली एफआईआर को कंप्यूटर में चढ़ाना है।
डीएसपी ने बताया कि थानों के साथ सांझ केंद्र इसलिए ही बनाए गए हैं ताकि वहां पर जाकर कोई भी अपनी डीडीआर दर्ज करवा सकता है। वहीं किसी भी केस की एफआईआर निकलवा सकता है। बस इसके लिए उस शख्स को प्रति कॉपी पांच रुपए सरकारी फीस देनी होगी। उसके बाद केस की एफआईआर निकलवाई जा सकती है।
सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के तहत एफआईआर काे ऑनलाइन करने का काम तो चल ही रहा है। सांझ केंद्र से कोई भी सरकारी फीस जमा करवाकर काॅपी ले सकता है। इस प्रोजेक्ट के तहत सभी थाने आपस में लिंक हो जाएंगे। इससे लोगों को आसानी होगी। -आलमविजय, डीएसपी एंड नॉडल ऑफिसर सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट मोहाली
इस प्रोजेक्ट में किसी प्रकार की कोई परेशानी आए या थाने में लाइट चली जाए। इसी कारण जिले के सभी थानों को हॉल ही में सोलर सिस्टम से लैस किया है। जिसमें मुख्य वह कंप्यूटर सेक्शन जहां पर बैठकर कर्मचारी एफआईआर को ऑन लाइन करते हैं रूम, एसएचओ का रूम, मुंशी का रूम मालखाना को जोड़ा गया है। यदि किसी हालत में लाइट चली भी जाती है तो साेलर सिस्टम से मिलने वाली लाइट से काम चलाया जा सके।
इस प्रोजेक्ट के जिले के नॉडल आफिसर डीएसपी आलम विजय ने बताया कि फिलहाल तो जो अब एफआईआर दर्ज होती है उनको मैन्यूल के साथ-साथ ऑन लाइन कर दिया जाता है। उससे पहले पिछले 10 साल की जितनी भी थानों में एफआईआर प्रतिवर्ष दर्ज हुई है उनको ऑन लाइन करने का काम किया जा रहा है। उसके लिए कई टाइपिस्ट लोगों की नियुक्ति भी की जा रही है।
क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) केंद्र सरकार का एक ऐसा प्रोजेक्ट है जिसके तहत सभी देश के 14 हजार थानों को ऑन लाइन करना है। केबिनेट कमेटी ऑन इकॉनोमिक अफेयर्स(सीसीईए) द्वारा इस प्रोजेक्टर को वर्ष 2009 में लाया गया था। जिस पर अभी भी थानों को ऑन लाइन करने का काम चल रहा है। इसमें देश के सभी 14 हजार थाने आपस में एक दूसरे से जुड़ जाएंगे और कहीं की एफआईआर भी कहीं पर भी बैठकर देखी जा सकती है। दो हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट का काम कई राज्यों में पूरा हो चुका है। लगभग पंजाब में पूरा हो रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य था इन्वेस्टिगेशन ऑफ क्राइम एंड डिटेक्शन ऑफ क्रिमिनल्स।