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रजिस्ट्री को लेकर जारी आदेश के बाद जीरकपुर में कई जमीनी सौदे लटके

Zirakpur News - पंजाब सरकार की ओर से अवैध कॉलोनियों में बने मकानों की रजिस्ट्री न करने के आदेश के बाद कई सौदे अधर में लटक गए हैं।...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:20 AM IST
रजिस्ट्री को लेकर जारी आदेश के बाद जीरकपुर में कई जमीनी सौदे लटके
पंजाब सरकार की ओर से अवैध कॉलोनियों में बने मकानों की रजिस्ट्री न करने के आदेश के बाद कई सौदे अधर में लटक गए हैं। लेागों का कहना है कि एक तरफ तो सरकार नई रेगुलराइजेशन पॉलिसी लाने की बात कर रही थी, दूसरी तरफ इस तरह का आदेश जारी करके उनके साथ धोखा किया जा रहा है। वहीं मल्टी स्टोरी बनाने वाले कारोबारी इस फैसले से खुश हैं। उनका कहना है कि हम लोग सभी नियम कानून मानकर व भारी भरकम फीस अदा कर कारोबार करते हैं। वही अवैध कॉलोनी वाले बिना कोई सुविधा दिए अपनी अनप्लांड कॉलोनी बेच जाते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ता है।

उम्मीद नहीं थी कि ऐसा आदेश आएगा: पिछली अकाली-भाजपा सरकार में भी रेगुलराइजेशन पॉलिसी 2013 और उसके बाद आई एक्सटेंडेड पॉलिसी 2014 में इस बात को लेकर स्पष्ट किया गया था कि अगर किसी भी व्यक्ति का किसी अनधिकृत काॅलोनी में रिहायशी, कमर्शियल प्लाॅट या इंडस्ट्रियल प्लाॅट है तो उसे संबंधित विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य है। लोगांे को पॉलिसी में तय फीस चुकाने के लिए भी कहा गया था। इसके बाद काफी लोगों ने इस पॉलिसी के तहत रेगुलराइजेशन के लिए अप्लाई किया था। अब सरकार ने ऐसा आदेश जारी कर िदया।


शहर में कई लोगों का मानना है कि केवल एक विभाग ने अपने स्तर पर ही उक्त आदेश जारी किया है और सरकार की तरफ से इस संबंधी कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। फिर कैसे अधिकारियों ने रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी है। इसको लेकर 25 जुलाई, 2015 को सरकार के हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग की तरफ से एक नोटिफिकेशन का हवाला दिया जा रहा है। इसके अनुसार प्रावधान दिया गया था कि अगर किसी व्यक्ति ने अनधिकृत काॅलोनी में रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत आवेदन किया हुआ है तो वह एक सेल्फ-डेक्लारेशन लगाकर, जिसमें इसका जिक्र किया हो, अपनी रजिस्ट्री करवा सकता है। बहुत से अधिकारी भी इस आदेश को लेकर दुविधा में हैं, क्योंकि कुछ का कहना है कि 25 जुलाई, 2015 की नोटिफिकेशन के पश्चात 15 दिसंबर, 2016 को भी एक नोटिफिकेशन आई थी, जिसमें कहीं भी सेल्फ-डेक्लारेशन देकर रजिस्ट्री करवाने जैसी कोई बात नहीं लिखी गई थी। 20 पन्नों की इस नोटिफिकेशन में साफ किया गया था कि किसी भी अनधिकृत काॅलोनी में रजिस्ट्री नहीं की जा सकती, इसलिए किस नोटिफिकेशन को माना जाए और किसे नहीं यह तय कर पाना थोड़ा मुश्किल साबित हो रहा है।


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