जीरकपुर में कारोबार के लिए हो रहा रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी का इस्तेमाल
जीरकपुरनगर परिषद अब तक यहां घरों के अंदर दुकानें खोलने से रोकने में पूरी तरह से नाकाम रही। अब इस पर पहल हो रही है। घरों के अंदर दुकानें खोलने से रोका जाएगा। हालांकि इस काम को करने में बहुत देर हो चुकी है। इस समय जीरकपुर की लगभग हर रिहायशी कॉलोनी में दर्जनों के हिसाब से घरों के अंदर दुकानें खोली गई हैं। यहां घरों के अंदर दुकानांे की गिनती हजारों में है। इस वजह से यहां घरों और कारोबार की जगह का माहौल नहीं बन पाया है। िजन लोगों ने रिहायशी एरिया मेंं यह सोचकर घर लिया कि शांति से रहेंगे तो उनका यह सोचना गलत साबित हुआ। पड़ोस के घर खुली दुकान में आने जाने वालांे के कारण लोग घरों के अंदर आराम से नहीं रह पाते है।
लाखोंलगाकर खाली बैठे हैं दुकानदार: जिनलोगों ने कारोबार करने के लिए लाखों रुपए खर्च कर दुकानें खरीदी। सामान पर पैसा लगाया वे बेकार बैठे हैं। क्यांेकि हरेक घर के आसपास किसी ने किसी घर में जरूरत के सामान को बेचने वाली दुकानें खुली हैं। ग्राहक बाजार तक पहुंचता नहीं है। घर के पास खुली दुकान से ही राशन अन्य जरूरत की चीज खरीद लेता है। राशन, कपड़े, सब्जी, मनियारी और यहां तक कि क्रॉकरी बर्तन भी घर मेंे बनी दुकानों में बिक रहे हैं।
मनकीरत सिंह ने कहा- मेरी दुकान यहां बलटाना मेन मार्केट मंे है। यहां कारोबार बुरी तरह से चौपट हो चुका है। वजह यह है कि इस शहर मंे रेजिडेंशियल और कमर्शियल में रहने या काम करने में किसी प्रकार की पाबंदी नहीं है। इसलिए लोग घरांे के अंदर दुकानें खोल रहे हैं। ये बंद होनी चाहिए। इससे यहां घरों और दुकानों का अलग अलग माहौल बनेगा। हरगोविंद ने कहा- मेरे घर के पास कई दुकानें घर के अंदर खोली गई है। यहां इनमें सामान लाने के लिए कोई भी सकता है। हमें अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है। घर के साथ घर होना चाहिए। दुकान होने से यहां घर का माहौल नहीं रहता है।
एमसी के ईओ परमिंदर सिंह का कहना है कि रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों के लिए गाइडलाइन तय है। एमसी बिल्डिंग बायलाज के बाहर जो भी निमार्ण होगा उसे गलत माना जाएगा। गिराया भी जाएगा।
दुकानों के कारण रेजिडेंशियल एरिया में ट्रैफिक बढ़ रहा है। सामान खरीदने वाले ग्राहकों के अलावा यहां दुकानों को साामान की सप्लाई देने वाले ट्रक अन्य गाड़ियां के कारण घरों का माहौल खराब हो रहा है। सड़कें रेजिडेंट्स के लिए बनी है पर इन पर कमर्शियल व्हीकल चलने से लोगांे को परेशानी हो रही है। इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले दो चार सालों में हालात ऐसे हो जाएंगे कि रेजिडेंशियल और कमशिर्यल में कोई फर्क नहीं रहेगा।
एमसीको रेवेन्यू का हो रहा नुकसान
मकानका नक्शा पास करने के लिए दजीरकपुर एमसी को ज्यादा नक्शा फीस मिलती है। जबकि मकान के लिए कम मिलती है। यहां अगर सख्ताई होगी तो लोग रेजीडेंस और कमर्शियल में अंतर समझंेगे। लोग चाहते हैं कि यहां शहर सिस्टम से चले।