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इन्हें जान नहीं प्यारी, बेशक फाटक बंद हो बस निकलना है, पुलिस भी मौजूद नहीं यहां

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 02:00 AM IST

पिंजौर में दो रोड पर रेलवे फाटक पड़ते हैं, जिन पर लंबे समय से कोई भी पुलिस कर्मी तैनात न होने के कारण बड़े हादसों को...
इन्हें जान नहीं प्यारी, बेशक फाटक बंद हो बस निकलना है, पुलिस भी मौजूद नहीं यहां
पिंजौर में दो रोड पर रेलवे फाटक पड़ते हैं, जिन पर लंबे समय से कोई भी पुलिस कर्मी तैनात न होने के कारण बड़े हादसों को न्यौता मिल रहा है। रेलवे विभाग द्वारा फाटकों पर रेलवे ट्रेक के दोनों ओर गेट और एक गेटमैन ड्यूटी पर तैनात किया हुआ है लेकिन फाटक पर लोगों की मनमर्जी व ताक पर रखते नियमों के आगे इनका कोई बस नहीं चलता। पिंजौर में जाम की समस्या को बढ़ावा देने में दोनों फाटक अहम भूमिका निभाग रहे हैं। अब तो इन फाटकों पर जानलेवा हादसों का भी खतरा बना हुआ है। दिन में इन फाटकों से करीब एक दर्जन से ज्यादा बार ट्रेनें निकलती हैं। हर बार करीब 10 मिनट के लिए फाटक बंद होता है। इस दौरान फाटक के दोनों ओर सैकड़ों वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। उस समय और मुसीबत हो जाती है जब इस पूरे काम को चलाने के लिए मौके पर केवल एक गेटमैन ही होता है। पहले तो गेटमैन जब ट्रेन के आने से फाटक बंद करने लगता है तो उसे काफी देर तक फाटक को बंद करने के लिए ऊपर-नीचे करना पड़ता है क्योंकि फाटक बंद होने से पहले निकलने के लिए वाहन चालकों की होड़ लग जाती है। गेट को नीचे होते देखकर भी अपने वाहन को जबरदस्ती बीच में लाने में लग जाते हैैं।

पिंजौर-कालका फाटक बंद, बीच में फंसी एक्टिवा

गेटमैन का वाहनचालकों के सामने कोई बस नहीं चलता

फाटक पर अकेला गेटमैन होने के कारण उसकी वाहन चालकों के आगे कुछ भी नहीं चलती, जिससे अक्सर गेट देरी से बंद होता है। कई बार तो ऐसे हालात हो जाते हैं कि कई दोपहिया वाहन दोनों गेटों के बीच में फंस भी चुके हैं। इससे कई बार गेट वाहन से टकराकर क्षतिग्रस्त भी हो चुका है। इसके अलावा इसके लिए गेटमैन से भी कई बार वाहन चालकों का झगड़ा भी हो चुका है। पूरी मशक्कत के बाद गेट बंद होने के बाद बहुत से ऐसे दोपहिया वाहन चालक होते है जिनके पास ट्रेन के गुजरने का सब्र भी नहीं होता और गेट बंद होने के बाद साइड से या फिर गेट के नीचे से रिस्क लेकर अपने वाहन को बीच में ले आते हैं और आनन-फानन में वहां से निकाल लेते हैं।

पुलिस स्टाफ की कमी है

वैसे तो हमारी पुलिस टीम फाटकों पर रेड मारती रहती है। जो भी लोग फाटक बंद रोड क्रॉस करते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई करते हैं। स्टाफ की कमी के चलते इन फाटकों पर परमानेंट पुलिस कर्मी तैनात नहीं है। कुछ स्टाफ को हमने रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाया गया है। -रमेश कुमार, इंस्पेक्टर अारपीएफ, कालका

हो सकता है बड़ा हादसा...

अगर प्रशासन से इस पर गंभीरता से कोई कदम नहीं उठाया तो इससे कभी भी कोई बड़ा जानलेवा हादसा भी हो सकता है। उसके बाद समस्या शुरू होती है ट्रेन गुजरने के बाद जब फाटक खुलता है क्योंकि फाटक पर कोई भी पुलिस कर्मी न होने के कारण फाटक के दोनों ओर वाहनों की दो से तीन-तीन लाइनें लग जाती हैं। फाटक के खुलते ही पहले निकलने की जल्दी में फाटक पर ही काफी समय तक वाहन आमने-सामने होने से उलझे रहते हैं। इससे कई बार मौके पर वाहन चालकों में आपसी झगड़ा भी हो चुका है। लंबे समय से मांग चली आ रही है कि फाटकों पर दोनों ओर पुलिस वाले तैनात होने चाहिए।

फाटकों पर बनने हैं आरओबी, आरयूबी...

गौरतलब है कि लंबे समय से उक्त दोनों फाटकों पर ट्रैफिक की ज्यादा आवाजाही होने के कारण जाम की समस्या के चलते लोगों की इन फाटकों पर फ्लाईओवर बनाने की मांग चली आ रही थी जिस पर विधायक ने कार्रवाई करवाते हुए रेल बजट में दोनों फाटकों पर ब्रिज के लिए बजट मंजूर करवाया था। दुकानदारों की मांग पर विधायक ने पिंजौर-कालका फाटक पर अंडरपास भी मंजूर करवा दिया है।

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