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पिंजौर में न कोई अस्पताल, सड़कों का भी बुरा हाल भास्कर न्यूज | पिंजौर पिंजौर रायतन क्षेत्र के 70 गांवों के...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:05 AM IST
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पिंजौर में न कोई अस्पताल, सड़कों का भी बुरा हाल

भास्कर न्यूज | पिंजौर

पिंजौर रायतन क्षेत्र के 70 गांवों के हजारों परिवार पिछले लंबे अर्से से मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। हैरानी की बात है कि सरकार द्वारा लोगों को उनकी समस्याओं के समाधान व सुविधाएं उनके पास उपलब्ध करवाने के लिए रात्रि ठहराव और खुले दरबार लगवाकर समस्याएं समाधान करवाने के दावे किए जाते हैं लेकिन यहां पर इन दरबारों और दावों की पोल खुल रही है। सरकार के आदेश पर क्षेत्र में सबसे पहले रात्रि ठहराव कार्यक्रम में पिंजौर के रायतन क्षेत्र के गांव गणेशपुर भौरियां में 18 दिसंबर 2012 में लगाया था, जिसमें डीसी पंचकूला के सामने रायतन क्षेत्र की सैकड़ों समस्याएं आई थी। यही नहीं, उसके बाद रायतन के गांव मल्लाह में भी करीब 3 वर्ष पूर्व उस समय एडीसी ने क्षेत्र की समस्याओं का निपटारा करने के लिए खुला दरबार लगाया था। उसके बाद करीब दो वर्ष पूर्व रायतन के गांव चिकन में चिकन कोठी में पहले रहे डीसी पंचकूला एसएस फुलिया ने खुला दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी थी। उसके बाद रायतन के गांव मगनीवाला में डीसी पंचकूला द्वारा ही रात्रि ठहराव के तहत कार्यक्रम में लोगों की समस्याएं सुनी थीं। इतना होने के बावजूद भी आज लोगों को उन्हीं समस्याओं से जूझना पड़ रहा है जो उन्होंने खुले दरबारों में प्रशासन को अवगत करवाई थी। रायतन के गांवों के पूर्व सरपंच प्यारा लाल, मनमोहन सिंह, योगेंद्र ठाकुर और मोती राम पूर्व कांग्रेस युवा प्रधान रायतन आदि ने कहा कि रायतन क्षेत्र में लोग ईको सेंसिटिव लागू होने के कारण दुखी हैं क्योंकि इसमें वह बिना अनुमति के घर की दूसरी इमारत और नलकूप नहीं लगवा सकते। इसके लिए वन विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है जिसके लिए काफी कार्रवाई करवानी पड़ती है। लोग चाहते हैं इससे छुटकारा मिले।

लोग बोले- खुले दरबार लगवाकर समस्याएं समाधान करवाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ और...

आपात स्थिति में पिंजौर या कालका अस्पताल जाना पड़ता है

इन गांवों के बाशिंदों को आपात स्थिति में पिंजौर या कालका सरकारी अस्पताल जाना पड़ता है। क्षेत्र में कोई बड़ा सरकारी अस्पताल हो। क्षेत्र के गांव कुतबेवाला, मस्जिदवाला, जोहड़ीवाला, मगनीवाला, बाजेवाला और गांव अबका जाने के लिए कोई भी सड़क नहीं है। बाकी गांवों और मेन सड़कों के संपर्क से इन कटे हुए गांवों को सड़कें उपलब्ध हों। मोरनी में स्थित जेबीटी में पहाड़ी क्षेत्र के ग्रामीणों के छात्रों के दाखिले के लिए आरक्षण है जो कि केवल रायतन क्षेत्र के गांव धांनसू के लिए है जबकि क्षेत्रवासियों की मांग थी कि पूरा रायतन क्षेत्र ही हिल एरिया है, इसलिए रायतन के सभी गांवों के बच्चों को आरक्षण मिले। 1996 में हरियाणा टूरिज्म विभाग द्वारा रायतन क्षेत्र के गांव कजियाना में पर्यटक केंद्र बनाने के लिए करीब 40 बीघा किसानों की जमीन अधिग्रहण की थी जिस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पर्यटक केंद्र बनने से रोजगार के साधन बढ़ेंगे। रायतन क्षेत्र के लिए अलग गैस एजेंसी हो। रायतन के इन 70 गांवों को एचएमटी के पास बने सब-स्टेशन से बिजली सप्लाई दी जाती है जिस कारण कभी आंधी-तूफान या बारिश से बिजली बंद होने पर अगले दिन सुबह दुबारा बिजली चालू होती है। रायतन क्षेत्र के लिए अलग सब-स्टेशन लगाया जाए। रायतन के 70 गांवों में सरकारी बस सर्विस ज्यादा की जाए जिससे ग्रामीण अपने आपको हर समय पिंजौर, कालका शहर से जुड़ा हुआ समझ सकें। क्षेत्र के गांवों में स्थित सरकारी स्कूलों को अपग्रेड किया जाए जिससे खास तौर पर गांव की लड़कियां अपने गांव में ही स्कूली पढ़ाई पूरी कर सके।

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