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गांव की सुख-समृद्धि और शांति के लिए सबसे पहले होती है ग्राम देवता की पूजा

5 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर| रायपुररानी/बरवाला

भारतीयसंस्कृति के अनुसार पौराणिक परंपरा रही है कि जहां भी कोई गांव और शहर बसाया जाता या बसता है तो सबसे पहले भूमि पूजन किया जाता है और सबसे पहले नगर पवित्र खेड़ा मंदिर (ग्राम देवता का मंदिर) बनाया जाता है। इस मंदिर में नगर पवित्र खेड़ा मंदिर को ग्राम देवता के रूप में प्रतिष्ठित किया जाता है। इस क्षेत्रपाल का नाम भी पौराणिक ग्रंथों शोस्त्रों-पुराणों में भी वर्णित है। जब भी गांव या नगर में जब शुभ कार्य होता है तो पहले नगर पवित्र खेड़ा (ग्राम देवता) की पूजा की जाती है। ताकि गांव में सुख-समृद्धि शांति बनी रहे। मान्यता है कि नगर पवित्र खेड़ा की इजाजत के बिना कोई दैवीय शक्ति या बाहरी शक्ति गांव में प्रवेश नहीं कर सकती।

यदि गांव में किसी प्रकार की विपत्ति या पशुओं पर बीमारी जाए तो पवित्र खेड़ा मंदिर में पूजा हवन और भंडारा लगाकर ग्राम देवता को प्रसन्न किया जाता है। हर सप्ताह के रविवार को ग्राम देवता की विशेष पूजा की जाती है। होली या दिवाली के त्योहार जब भी आते हैं, उन दिनों भी खेड़े पर पूजा की जाती है। उस समय बहुत से गांवों में खेड़े को विशेष रूप से पूजा जाता है और हवन-यज्ञ आदि से ग्राम देवता को खुश किया जाता है। दूध से बनी कच्ची लस्सी में गंगा जल मिलाकर पहले पवित्र खेड़े को स्नान कराया जाता है। उसी लस्सी को पानी में मिलाकर सारे गांव के पशुओं के थनों को लगाया जाता है। ऐसी मान्यता भी है कि ऐसा करने से ग्रामीणों के पशुओं को बीमारी नहीं होती और ही कोई दुख रहता है। कोई पशु बीमार है तो उसके छींटे लगने से वह ठीक हो जाता है और गांव में रहने वाले लोग भी खुशहाल होते हैं। इससे गांव में सुख-समृद्धि शांति बनी रहती है। इलाके के शहर, गांव कस्बों में स्थित पवित्र नगर खेड़ा मंदिर आस्था के प्रतीक होते हैं। रायपुररानी, बरवाला, नारायणगढ़, शहजादपुर खंडों के गांवों में नगर पवित्र खेड़ा मंदिर स्थापित हैं। ग्रामीणाें की ओर से इनकी पूजा-अर्चना की जाती है। कस्बा रायपुररानी के खेड़ा मंदिर की काफी महत्ता है। इस खेड़ा मंदिर को नजदीकी गांव मानकटबरा के वालिया लोगों का खेड़ा माना जाता है। रायपुररानी खेड़ा मंदिर के पुजारी पंडित सावन राम बताते हैं कि उनके परिजनों की ओर से देश आजाद होने से पहले से ही इस खेड़ा मंदिर की साफ-सफाई, पूजा-अर्चना आदि का काम किया जाता है। 1947 के बाद से तो उन्होंने अपने बचपन के दिनों से ही इस खेड़ा मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू कर दी थी। रायपुररानी के नगर खेड़ा मंदिर पर जब भी कोई विवाह-शादी का आयोजन किसी के यहां होता है तो सबसे पहले खेड़ा मंदिर पर माथा टेका जाता है।

हर रविवार को लगाया जाता भंडारा

नगरखेड़ा मंदिर रायपुररानी के बारे में यह बात भी पूरी तरह मानी जाती है कि पूर्व के वर्षों में जो परिवार रायपुररानी में आकर बाहर से बसा है, नगर पवित्र खेड़ा मंदिर उनको इसी कस्बे में ठहरा लेता है और काफी सुख-संपन्नता प्रदान करता है। यहां अक्सर देखा गया कि जब किसी कर्मचारी की रायपुररानी कस्बे के सरकारी कार्यालय में बाहर से बदली होती है तो तकरीबन उस कर्मचारी का परिवार रायपुररानी में ही बस जाता है। मल मास को छोड़कर शुभ दिनों में इस खेड़ा मंदिर पर तकरीबन हर रविवार को भंडारे लगते हैं।

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