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पहाड़ी पर घूमते हुए इंजीनियर को मिला एक लाख साल पुराना पत्थर, जिसमें धंसा था 3 पिन वाला प्लग, जांच में सही साबित हुआ दावा

वैज्ञानिकों के लिए पहेली बन गया ये इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, बोले- ऐसा कैसे हो सकता है

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 11:06 AM IST

(ये कहानी 'सोशल वायरल सीरीज' के तहत है। दुनियाभर में सोशल मीडिया पर ऐसी स्टोरीज वायरल हुईं हैं, जिसे आपको जानना चाहिए।)

न्यूयॉर्क. दुनिया में अलग-अलग वक्त पर लोगों ने कई ऐसा दावे किए हैं जिन पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसा ही एक दावा कुछ साल पहले नॉर्थ अमेरिका में रहने वाले एक इंजीनियर ने किया था। उसका कहना था कि एकबार पहाड़ी इलाकों में घूमने के दौरान उसे पत्थर के अंदर लगा हुआ एक इलेक्ट्रिक कम्पोनेंट मिला था। जो करीब 1 लाख साल पुराना है। वहीं जब भू-वैज्ञानिकों ने पत्थर की जांच की तो वो सचमुच करीब इतना ही पुराना निकला। हालांकि कंपोनेंट डिवाइस की असलियत का आज तक कोई पता नहीं लगा सका है।

मिली बिल्कुल आज जैसी डिवाइस

- इस करीब 1 लाख साल पुरानी स्टोन प्लग डिवाइस मिलने का दावा अमेरिकी इलेक्ट्रिक इंजीनियर जॉन जे. विलियम्स ने साल 1998 में किया था। इंजीनियर का कहना था कि नॉर्थ अमेरिका में एक पहाड़ी इलाके में घूमने के दौरान उसे ये डिवाइस मिली थी। उसके मुताबिक वो जमीन में धंसी हुई थी, और जब उसने इसे देखा तो वो चौंक गया। इसके बाद उसने खुदाई करते हुए उसे बाहर निकाला।
- विलियम्स को जो डिवाइस मिली थी, उसमें ट्रिपल प्लग फॉर्मेट में थी, यानी उसमें तीन प्लग लगे हुए थे और वो एक पत्थर के साथ जुड़े हुए थे। इससे ज्यादा हैरानी वाली बात आगे जाकर पता चली जब भू-वैज्ञानिकों ने उसकी कार्बन जांच करने के बाद बताया कि ये करीब 1 लाख साल पुराना ऑब्जेक्ट है।
- इस अजीबोगरीब कंपोनेंट की चौड़ाई करीब 8mm, ऊंचाई करीब 3mm और पिन के बीच की दूरी करीब 2.5mm है। वहीं पिन की मौटाई करीब 1 mm है।
- विलियम्स ने एक्सपर्ट्स को इसे तोड़ने की इजाजत तो नहीं दी। लेकिन जब इसका एक्स-रे किया गया तो इस ऑब्जेक्ट के सेंटर में 'ओपेक इंटरनल स्ट्रक्चर' मिला। इसके अलावा इसमें हल्का सा मैग्नेटिक अट्रेक्शन भी मिला।

मिल चुका करोड़ों का ऑफर

- इस पत्थर डिवाइस को विलियम्स ने 'पेट्राडोक्स' का नाम दिया। ये डिवाइस दिखने में बिल्कुल वैसी है जैसी आज हर कंपोनेंट में पॉवर प्लग के साथ जुड़ी हुई नजर आती है।
- विलियम्स को इस अनोखी डिवाइस को बेचने के बदले 5 लाख डॉलर (करीब 3.5 करोड़ रु) तक का ऑफर मिल चुका है। लेकिन उसने इसे बेचने से मना कर दिया।
- इंजीनियर ने 'पेट्राडोक्स' को ये कहकर बेचने से इनकार कर दिया, कि इसे बेचने से बेहतर ये है कि ये दुर्लभ कलाकृति रिसर्च के काम आए। उसके बाद से ही कई साइंटिस्ट को इस पेट्राडोक्स पर रिसर्च करने का मौका मिल चुका है।
- इस डिवाइस पर रिसर्च करने वाले कई वैज्ञानिक इस डिवाइस को बनाने के मकसद का पता नहीं लगा सके हैं। साथ ही उन्हें ये भी पता नहीं चल सका है कि ये बना किस मटेरियल से है। उनके मुताबिक ये ग्रेनाइट पत्थर से मिलता-जुलता कोई मटेरियल है।
- विलियम्स के मुताबिक इस डिवाइस में जो पिन लगे हैं, वो किसी मैटेलिक जैसे मटेरियल से बने हैं। हालांकि कई लोग इस डिवाइस पर यकीन नहीं करते हैं और इसे झूठा मानते हैं। लेकिन विलियम्स अब भी अपनी बात पर कायम है। उसका कहना है कि ये हमारी प्राचीन और अत्यधिक उन्नत सभ्यता का सबूत है। जो कभी इस धरती पर रही थी।