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सिर्फ एक मोबाइल के कारण चली गई 11 साल के मासूम की जान, गेम का स्टंट करते-करते लगा ली फांसी

3 वर्ष पहले
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लुधियाना. शहर के संधू नगर के होजरी कारोबारी के 11 साल के बेटे ने मोबाइल गेम का स्टंट करते हुए अपनी जान गंवा ली। लोगों का कहना था कि बच्चा अक्सर मोबाइल पर खतरनाक गेम खेला करता था। घरवालों ने भी माना कि बच्चा मोबाइल पर फाइटिंग, रेसिंग, रेसलिंग व अन्य स्टंट वाली गेम्स खेलता था। पोस्टमार्टम के दौरान बच्चे के शरीर पर सीढ़ी, ऐरो व पेट पर पेन से खिंची लाइनें मिली हैं। फिलहाल, जगतपुरी चौकी इंचार्ज कपिल शर्मा ने मोबाइल गेम की बात को लेकर पुष्टि नहीं की है।

 

- बच्चे की पहचान होजरी कारोबारी रोहन ठाकुर के तीसरे बेटे राजवीर ठाकुर के रूप में की गई है। रोहन के अन्य दो बेटे रोमित (14) और रुद्र (2) हैं। राजवीर 6वीं क्लास में पढ़ता था।

- पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार, मौत सांस रुकने के कारण हुई है और मौत का कारण हैंगिंग ही बताया गया है।  

 

बड़े और छोटे के नीचे आने के बाद लगाया फंदा

 

- रोहन ने बताया, शुक्रवार की रात को ही उसका बेटा उसे मिला था। वह हर रोज अपने बड़े बेटे रोमित और राजवीर को स्कूल छोड़ कर आता था।

- शनिवार को वह सो रहा था तो उसके दोनों बेटे खुद ही स्कूल चले गए। शुक्रवार के बाद उसकी बेटों से मुलाकात नहीं हुई। शनिवार को जब वह घर वापस आया तो पत्नी रिंकी ने बताया कि राजवीर अपने चाचा के घर चला गया है।

- रविवार को वह फिर सुबह अपनी फैक्टरी चला गया। राजवीर भी सुबह करीब  साढ़े नौ बजे वापस घर आ गया। उसके बाद वह अपने दोस्तों के साथ खेलता रहा।

- रोमित ने बताया, वह भाइयों के साथ छत पर खेल रहा था तभी मां ने उसे नीचे बुला लिया। वह मां के साथ जाकर काम करवाने लगा।

- उसके कुछ समय बाद ही छोटा भाई रुद्र भी नीचे आ गया। रोटी खाने के लिए वह राजवीर को बुलाने गया तो देखा कि उसकी लाश लटक रही थी। उसके चिल्लाने पर मां भी छत पर आ गई।

- राजवीर को फंदे पर लटका देख उसने शोर मचा आस-पड़ोस के लोगों को बुलाया। कुछ ही मिनट में उसके पिता व चाचा मोहिंदर भी मौके पर आ गए।

- राजवीर को हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसे डेड घोषित कर दिया गया।

- रोहन ने बताया कि राजवीर अक्सर अकेला ही बैठ कर गेम खेलता था। उसे लड़ाई वाली व खतरनाक गेम पसंद थीं। 

 

3-डी एप से बनाता था फोटो

 

- राजवीर के चाचा मोहिंदर ने बताया कि राजवीर के पास निजी मोबाइल नहीं था। वह घर में रखे मोबाइल पर ही गेम खेलता था। उसे 3-डी एप पर फोटो बनाने का शौक था। इसके चलते वह अपनी व अपने छोटे भाई की भी खतरनाक फोटो बनाता था। मोबाइल पर भी इस तरह की कई फोटो मिली हैं। उसे मोबाइल पर खतरनाक गेम्स खेलने के लिए कई बार मना भी किया गया था।

 

टांग पर सीढ़ी, ऐरो बना था

 

- सिविल हॉस्पिटल के डॉक्टर भारती तनवर ने बताया, बच्चे की लाश के पोस्टमार्टम के दौरान उसकी बाईं टांग पर सीढ़ी और एक एरो बना था। जबकि पेट पर पेन से लाइनें खींची हुई थीं। बच्चे की मौत सांस रुकने से ही हुई है।

 

पेरेंट्स के पास टाइम न होने से बच्चों में मोबाइल गेम्स के प्रति बढ़ी रुचि

 

साइक्रेटिक डॉ. पुनीत कथूरिया ने बताया, मां-बाप के पास टाइम न होने से बच्चों में मोबाइल गेम खेलने की दिलचस्पी बढ़ रही है। वहीं, प्ले ग्राउंड न होना, पढ़ाई का प्रेशर, सेफ्टी इश्यू के चलते पेरेंट्स बच्चों को बाहर नहीं जाने देते। कई बच्चे दोस्तों की कंपनी न मिलने से स्मार्ट फोन पर गेम्स खेलने लगते हैं। मोबाइल गेम से बच्चों का ध्यान हटाने के लिए इंटरनेट एक दम से बंद न करें, बल्कि उसके लिए किसी आउट डोर या इन डोर गेम का चयन कर उनके साथ खेलें।