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मजदूरों से भरी ट्रॉली पलटी, 2 बच्चों सहित एक ही परिवार के 12 लोग घायल

3 वर्ष पहले
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दतिया.   सलैयापमार और डांगकरैरा के बीच शुक्रवार दोपहर मजदूरों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई। इसमें एक ही परिवार के दो बच्चों सहित 12 लोग जख्मी हो गए। गंभीर बात यह है कि हादसे में परिवार के मुखिया के दोनों हाथ कट गए। जब इन सभी घायलों को जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में पहुंचाया लेकिन यहां इन्हें इलाज तो छोड़िए स्ट्रेचर तक नहीं मिलीं। बच्चे व वृद्ध महिला दर्द से करा रही थीं लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं था।

 

शिवपुरी जिले के मड़ीखेड़ा डेरा निवासी हल्के (35) पुत्र मंगल सिंह आदिवासी अपने पूरे परिवार के साथ पिछले दो-तीन महीने से सलैयापमार में स्थित सतीश गुप्ता के पत्थर क्रेशर पर काम कर रहा था। शुक्रवार को दोपहर दो बजे क्रेशर मालिक के ट्रैक्टर में बैठकर दतिया शहर में खरीदारी करने आ रहे थे। ट्रैक्टर ड्राइवर शराब के नशे में  था और सिंगल रोड पर पूरी स्पीड से ट्रैक्टर दौड़ा रहा था। 

 

पिता के दोनों हाथ कटे, बेटे के हाथ-पैर टूटे
जैसे ही तेज रफ्तार ट्रैक्टर डांगकरैरा के पास पहुंचा तभी वह अनियंत्रित होकर खाई में जाकर पलट गया। जिससे उसके नीचे पूरा परिवार दब गया। 108 एंबुलेंस तकनीकी अधिकारी नितिन दांतरे और पायलेट दीनदयाल सिंह धाकड़ ने ग्रामीणों की मदद से घायलों को 108 व डायल-100 के माध्यम से ट्रामा सेंटर पहुंचाया। ट्रैक्टर पलटने से हल्के आदिवासी के दोनों हाथ कट गए। जबकि उसके बेटे हरेंद्र (8) दायां हाथ और बांया पैर घुटने से टूट गया। ट्रॉली में सवार हरी सिंह (10) पुत्र करुआ आदिवासी, सनी (3) पुत्र भीमा आदिवासी, बद्री प्रसाद (50), देवा (60) पत्नी मंगल आदिवासी, भीमा (25) पुत्र मंगल सिंह, विपिन (30) पुत्र कम्मोद प्रजापति निवासी बल्देवगढ़ जिला टीकमगढ़ घायल हुए हैं। इन सभी को जिला अस्पताल से झांसी रैफर किया गया है। जबकि ट्रॉली में सवार उर्मिला पत्नी भीमा, रेखा पत्नी हल्के आदिवासी और बती पुत्री हल्के आदिवासी को हल्की चोटें आई हैं।   

 

स्ट्रेचर कम पड़ गए, घायलों को टांगकर ले गए
एक ही परिवार के लगभग 12 लोग घायल होने के बाद वे डायल-100 और 108 से जिला अस्पताल तो पहुंच गए लेकिन अस्पताल प्रांगण से घायलों को ट्रामा सेंटर के अंदर तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर की व्यवस्था नहीं थी। दो-तीन स्ट्रेचर ही दिखाई दे रहे थे। परिजन और पुलिस के सहयोग से घायलों को गोद में उठाकर अंदर ले गए तब मरहम पट्‌टी हो सकी। घायलों के साथ आईं महिलाएं रो रहीं थी कि किसी तरह उनके पति व बच्चे ठीक हो जाएं। घटना में सबसे ज्यादा घायल हुए हल्के आदिवासी की पुत्री की सगाई झांसी के सकरार में हो चुकी है। सप्ताह भर में शादी की तारीख पक्की होना थी लेकिन घर के कमाऊ व्यक्ति के दोनों हाथ कट गए। उसका रो-रोकर बुरा हाल था। 

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