जीका वायरस : इस खतरनाक वायरस की चपेट में आए राजस्थान के 50 लोग, मप्र में सरकार ने जारी किया हाई अलर्ट, राजस्थान, गुजरात, ओडिशा में भी खतरा; एक्सपर्ट ने बताया बचने का तरीका / जीका वायरस : इस खतरनाक वायरस की चपेट में आए राजस्थान के 50 लोग, मप्र में सरकार ने जारी किया हाई अलर्ट, राजस्थान, गुजरात, ओडिशा में भी खतरा; एक्सपर्ट ने बताया बचने का तरीका

dainikbhaskar.com

Oct 14, 2018, 11:36 AM IST

Alert : आपके घर में भी पानी का टैंक पड़ा है गंदा तो तुरंत करें साफ

18 more people in Jaipur test positive for Zika virus

हेल्थ डेस्क। राजस्थान के जयपुर में खतरनाक जीका वायरस के 8 नए मामले सामने आने के बाद इससे संक्रमित लोगों की संख्या 50 हो गई है। इधर, मध्यप्रदेश में भी जीका वायरस को लेकर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग में विशेष अलर्ट घोषित किया गया है। राजस्थान, गुजरात, ओडिशा सहित और भी कई राज्यों में जीका वायरस अपना संक्रमण फैला चुका है।

वहीं जयपुर में स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि लोग अपने पानी के टैंक साफ नहीं करते। इससे मच्छरों को उनके घरों के अंदर पैदा होने का मौका मिलता है। विभाग ने 11313 घरों में सर्वे किया। इसमें से 2282 में लार्वा पाया गया। ऐसे में जरूरी है कि घरों में पानी के टैंक की अच्छी तरह से सफाई की जाए। हम बता रहे हैं जीका वायरस से जुड़ी जरूरी जानकारी।

क्या है जीका वायरस
एसएमएस मेडिकल कॉलेज (माइक्रोबायलोजी विभाग), जयपुर के प्रोफेसर डॉ. रमेश मिश्रा ने बताया कि यह एडीज इजप्टी मच्छर से फैलता है। यह ज्यादातर दिन के समय (अलसुबह और दोपहर) काटता है। यह मच्छर डेंगू, चिकनगुनिया और यलो फीवर का कारण भी बनता है। वायरस प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती से उसके बच्चे में भी फैलता है। या शारीरिक सम्बंध बनाने के दौरान एक से दूसरे इंसान में ट्रांसमिट होता है। संक्रमित इंसान का ब्लड ट्रांसफ्यूजन या ऑर्गेन ट्रांसप्लांटेशन होने पर भी इंफेक्शन फैल सकता है। जीका में कई बार लक्षण नहीं दिखते है। बीमारी बढ़ने पर न्यूरोलॉजिकल और ऑर्गन फेलियर हो सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान नवजात

में न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर और ब्रेन डेमेज तक हो सकता है।


क्या हैं इसके लक्षण
- जीका वायरस से संक्रमण के बाद लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते हैं। 3-14 दिन का समय लगता है।
- लक्षण बेहद माइल्ड दिखाई देते हैं।
- इसमें हल्का बुखार, स्किन पर चकत्ते, कंजक्टिवाइटिस, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, सिरदर्द। ऐसा करीब 2-7 दिन तक हो सकता है।

संक्रमण का क्या है इलाज...

-WHO के अनुसार लक्षण दिखने पर ब्लड, यूरिन या सीमेन टैस्ट से पुष्टि की जाती है। जीका वायरस के संक्रमण का फिलहाल कोई इलाज नहीं है।
- इलाज के तौर पर बुखार और दर्द को कम करने वाली दवाएं देने के साथ मरीज में लगातार पानी की पूर्ति की जाती है।
- गर्भवती महिलाओं को खास देखभाल की जरूरत होती है क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चा आसानी से संक्रमित हो जाता है।

सावधानी ही बचाव..
-WHO के अनुसार जीका वायरस का सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं और बच्चों को है।
- बचाव के तौर पर हल्के रंग के कपड़े पहनें, खिड़कियों और दरवाजों को बंद रखें।
- मॉस्क्यूटो रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
- बच्चों और गर्भवती महिलाओं को आराम करने के दौरान मच्छरदानी का प्रयोग करना जरूरी है।
- जीका वायरस का वाहक मच्छर पानी में पनपता है इसलिए घर या आसपास पानी इकट‌्ठा है तो इसे हटाएं। गंदगी न जमा होने दें।

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18 more people in Jaipur test positive for Zika virus
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