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मीनाकारी कला का खानदानी पुजारी

भास्कर न्यूज त्न फरीदाबाद मेला परिसर में मीडिया सेंटर से नीचे उतरते ही स्टाल नंबर-178 के पास आकर आम से लेकर खास तक रुक...

Dainik Bhaskar

Feb 09, 2012, 01:32 AM IST
मीनाकारी कला का खानदानी पुजारी
भास्कर न्यूज त्न फरीदाबाद
मेला परिसर में मीडिया सेंटर से नीचे उतरते ही स्टाल नंबर-178 के पास आकर आम से लेकर खास तक रुक जाते हैं। यहां हरमिंदर सिंह ने पत्थरों और गोल्ड पर मीनाकारी कला को प्रदर्शित किया है। एक दर्जन से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पिता इंदर सिंह कुदरत के साथ हरमिंदर पहली बार सूरजकुंड मेला आए हुए हैं। वे अपने पुश्त में 19वें बेटे हैं जो इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं। इनके कला के कद्रदानों में जयपुर का शाही खानदान है। हरमिंदर बताते हैं कि 16वीं शताब्दी में जयपुर के शाही खानदान ने राजस्थान आने का न्यौता दिया था। इसके पूर्व पूर्वज लाहौर पाकिस्तान में ज्वेलरी पर मीनाकारी कला करते थे। इनके पास एक सौ से लेकर पांच लाख रुपए तक की ज्वेलरी मौजूद है। हरमिंदर को 2010 में राजस्थान सरकार ने राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया है। वे भारत सरकार के हैंडीक्राफ्ट डिपार्टमेंट के डिजायनर पैनल में भी शामिल हैं।
क्या है खास : नेकलेस, ईयर रिंग, नोज रिंग, नेकलेस सेट। ये ब्रास मेटल, स्टोन, पर्ल और गोल्ड के बने हुए हैं। इसमें मीनाकारी कला की गई है। मीनाकारी मुगलकालीन कला है। आभूषणों में पारंपरिक चीजों की आकृति बनाई जाती है। यह देखने में काफी आकर्षक होता है। पत्थरों को तराश कर भी आभूषण तैयार किए जाते हैं।
कद्रदानों की कमी नहीं : राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनके कला को सराहा जा रहा है। आज भी जयपुर स्थित राजा मान सिंह के किले में इनके शिल्पकला की प्रदर्शनी लगी हुई है। हरमिंदर सिंह कहते हैं कि इस कला को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। भारत की यह पौराणिक कला है। मीनाकारी कला में आभूषणों पर पक्षियों के चित्र भी बनाए जाते हैं।
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