झारखंड हाईकाेर्ट में 21 हजार क्रिमिनल केस पेंडिंग निपटाने के लिए 20 एडवाेकेट कमिश्नर नियुक्त हाेंगे

News - झारखंड हाईकाेर्ट में 21 हजार क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं। इन्हें निपटाने के लिए अब 20 एडवाेकेट कमिश्नर की नियुक्ति की...

Dec 04, 2019, 09:50 AM IST
झारखंड हाईकाेर्ट में 21 हजार क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं। इन्हें निपटाने के लिए अब 20 एडवाेकेट कमिश्नर की नियुक्ति की जाएगी। इनकी नियुक्ति अगले साल मार्च तक के लिए हाेगी। पेंडिंग केस काे निपटाने की यह पहल झारखंड हाईकाेर्ट ने पहली बार की है। एडवाेकेट कमिश्नर एेसे मामलाें काे चिह्नित करेंगे, जाे लंबे समय से लंबित हैं। उनमें न ताे अपीलकर्ता अाैर न ही अाराेपी की अाेर से काेई काेर्ट में पेश हाेता है। एक एडवाेकेट कमिश्नर राेजाना 20 केस देखेंगे अाैर इसके लिए उन्हें राेजाना 2000 रुपए मिलेंगे। यह खर्च राज्य सरकार काे वहन करना हाेगा।

इस मामले काे लेकर एडवाेकेट जनरल अजीत कुमार ने राज्य के मुख्य सचिव अाैर गृह सचिव काे पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि हाईकाेर्ट द्वारा 20 एडवाेकेट कमिश्नर लिए जाने का प्रस्ताव है। इन पर हाेने वाले खर्च का वहन झारखंड सरकार काे करना हाेगा। इन एडवाेकेट कमिश्नर की नियुक्ति का अधिकार रजिस्ट्रार जनरल काे दिया गया है। ये अगले साल मार्च तक इन 21 हजार पेंडिंग केसाें काे देखेंगे कि कितने मामले सुनवाई के याेग्य है। फिर काेर्ट इसकी सुनवाई कर केस का निष्पादन करेगा।

जानकारी के अभाव में कोर्ट अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंच पाता

एडवाेकेट जनरल ने पत्र में कहा है कि हाईकाेर्ट से बेल दिए जाने के बाद मामलाें की सुनवाई में काेई रूचि नहीं दिखाई जाती। कई दाेषी ताे सजा काटकर जेल से मुक्त हाे चुके हैं या उनकी माैत हाे चुकी है। तब भी उनके वकील काेर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं हाेते। एेसे में काेर्ट का समय बर्बाद हाेता है अाैर सरकारी वकीलाें काे भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। काेर्ट के समक्ष एेसे कई मामले अाए हैं जिसमें सजायाफ्ता का या ताे मुक्त कर दिया गया है या उसकी माैत हाे चुकी है। फिर भी काेर्ट काे जानकारी नहीं रहती । इस कारण काेर्ट अंतिम फैसले पर नहीं पहुंच पाता।

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