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डाउनलोड करेंरायपुर. पिछले साल हुई दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों की जांच में दागी शिक्षकों व व्याख्याताओं को इस बार फिर काॅपी जांचने का मौका मिल गया। मंडल ने 272 शिक्षकों को ब्लैक लिस्टेड किया। इन्हें मूल्यांकन के लिए मार्च में अपात्र किया गया। जबकि फरवरी में ही 2018 की परीक्षा की काॅपियां जांचने वालों की सूची जारी कर दी गई थी। इनमें ये अपात्र भी शामिल हैं। आदेश जारी होने के बाद इनमें से कुछ को केंद्रों से हटाया गया।
मंडल के अफसरों का कहना है कि तीन साल से ज्यादा अनुभव वाले 32 हजार मूल्यांकनकर्ताओं के नाम सिस्टम में फीड हैं। इनमें 90 फीसदी व्याख्याता हैं। फरवरी में मूल्यांकनकर्ताओं की लिस्ट फाइल की गई तब डिबार शिक्षकों के बारे में कोई फैसला नहीं हुआ था। इस साल काॅपियों का मूल्यांकन 3 अप्रैल से शुरू हुआ। जबकि ब्लैक लिस्ट करने का आदेश 20 मार्च को निकला। मंडल अफसरों ने कहा कि हमने सभी डीईओ को अपात्रों की सूची भेज दी है। बता दें कि वर्ष 2017 में दसवीं-बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों से असंतुष्ट हजारों छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन या रिटोटलिंग के लिए आवेदन भरे थे। ऐसे आवेदकों की फिर से कापियां जंचवाई और नंबर जोड़े गए। तब खुलासा हुआ कि किस तरह बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हुआ है। बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक मिले जिनकी जांची कापियों में उनके दिए नंबर या तो आधे हो गए या दोगुने बढ़ गए।
लापरवाह शिक्षकों की संख्या को लेकर भी संशय
मंडल के सूत्र बताते हैं, 32 हजार शिक्षकों में केवल 272 को ही पकड़ पाए हैं। जबकि यह संख्या हजारों में हो सकती है। 272 में से भी केवल 61 शिक्षकों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। ऐसे मूल्यांकनकर्ता सभी विषयों से संबंधित थे। जबकि भास्कर को विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अपात्र 511 शिक्षकों की सूची बनाई गई थी। बाकी नाम कहां गए, इसमें मिलीभगत बताई जाती है।
अपात्र काॅपी जांच रहे, इसकी जानकारी नहीं: मंडल
शिक्षा मंडल के बोर्ड सदस्य संजय जोशी ने इस बारे में जानकारी होने से इनकार कर दिया। मंडल के सचिव सुधीर अग्रवाल भी टाल गए। डिप्टी सेक्रेटरी संजय शर्मा ने कहा कि मूल्यांकन के अपात्रों की सूची प्रशासन, डीईओ व केंद्रों को भेज दी हैं। यदि फिर भी अपात्र शिक्षक काॅपियां जांच रहे हैं तो गंभीर बात है। हालांकि अभी तक किसी केंद्र से यह जानकारी नहीं आई है।
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