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डाउनलोड करेंजालंधर. शहर में पिछले साल सेहत विभाग ने जितने भी फूड सैंपल भरे हैं, उनमें से लगभग एक तिहाई फेल हो गए हैं। इसका खुलासा सेहत विभाग की साल 2017-18 की फूड सैंपल रिपोर्ट में हुआ है। जालंधर से खाने-पीने की चीजों के कुल 915 सैंपल खरड़ स्थित स्टेट फूड लैब भेजे गए थे, जिनमें से 290 फेल हुए हैं। संतोषजनक बात यह है कि सेहत के लिए हानिकारक सैंपलों की संख्या मात्र पांच है, जोकि 0.54 परसेंट ही है।
बाकी सैंपल या तो मिलावटी सामान के थे या उनकी पैकेजिंग पर झूठे और भ्रामक आंकड़े लिखे हुए थे। इनमें दूध और दूध से बनी चीजों के सबसे ज्यादा सैंपल हैं। इसके अलावा तेल के भी ज्यादातर सैंपल फेल पाए गए हैं। सरसों के तेल में सस्ते पाम या राइस ब्रेन तेल को मिलाकर बेचा जा रहा है।
पिछले साल जमा हुआ था 26 लाख रुपए जुर्माना
साल 2017-18 में जिन दुकानदारों के सैंपल फेल हुए थे, उन्हें 25.79 लाख रुपए का जुर्माना ठोका गया है। कुल 915 सैंपल भरे गए, जिनके चलते 246 को जुर्माना ठोका गया। इनमें से 10 केस अदालत में लगाए गए हैं।
सब स्टेंडर्ड... खाने-पीने की चीजों में मिलावट करके बेचना यानी जैसे दूध में पानी या सरसों तेल में पाम ऑयल की मिलावट। यह सेहत लिए हानिकारक तो नहीं होता, लेकिन ग्राहक धोखे में रहता है।
अनसेफ... जो उत्पाद शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। सिर्फ इसी कैटेगरी के केस ही आपराधिक मामलों के तौर पर न्यायिक अदालत में दर्ज होते हैं। बाकी के मामले एडिशनल डिप्टी कमिश्नर की अदालत में आते हैं।
मिस ब्रांडेड...खाने-पीने की चीजों की पैकिंग में रैपर पर पूरे ब्यौरे नहीं लिखना यानी एक्सपायरी या बनाने की तारीख का जिक्र न करना आदि।
मिस लीडिंग...यह ऐसे उत्पाद हैं, जिनके रैपर पर जो लिखा होता है, वह अंदर प्रोडक्ट में नहीं मिलता। ग्राहक को भ्रामक करने वाले होते हैं।
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