\'भारत के 4 महानगरों में पीक आवर में सालाना 22 अरब डालर का नुकसान\'
\'भारत के 4 महानगरों में पीक आवर में सालाना 22 अरब डालर का नुकसान\'
उबर के मुताबिक भारत के चार महानगरों में पीक आवर में सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ने से सालाना 22 अरब डॉलर का नुकसान होता है।
उबर द्वारा करवाए गए बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के सर्वेक्षण के मुताबिक दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में नॉन-पीक आवर के मुकाबले पीक ऑवर में सड़क परिवहन से यात्रा में झेढ़ गुना ज्यादा समय लगता है।
बीसीजी की सर्वेक्षण रिपोर्ट \'अनलॉकिंग सिटीज : द इंपैक्ट ऑफ राइडरशेयरिंग एक्रॉस इंडिया\' में कहा गया है कि सड़कों पर भीड़भाड़ कम करने के लिए राइडरशेयिरिंग एकमात्र व बेहतर विकल्प है।
उबर के सीओओ बार्ने हाफरेर्ड ने कहा, \"\"यदि अपनी कार खरीदन का ट्रेंड जारी रहेगा, तो भारतीय शहरों में कुछ ही सालों में सड़कों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति और गंभीर हो सकती है।\"\"
उन्होंने कहा, \"\"राइडशेयरिंग ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात पाने की दिशा में बेहतर समाधान प्रदान कर सकता है क्योंकि यह ज्यादा लोगों को कम कारों में सफर कराने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करता है। हम अपने शहरों को जाममुक्त कर खूबसूरत बना सकते हैं, लेकिन यह हमें मिलकर करना होगा।\"\"
इस मौके पर उबर इंडिया एंड साउथ एशिया के प्रेसिडेंट अमित जैन ने कहा कि राइडशेयरिंग से देश में पार्किं ग की समस्या का भी समाधान हो जाएगा।
बीसीजी सर्वेक्षण के अनुसार 89 प्रतिशत लोग अगले पांच सालों में नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, लेकिन राइडशेयरिंग की बेहतर सुविधा मिलने पर 79 प्रतिशत से अधिक लोगों ने अपनी कार खरीदने की योजना छोड़ने की बात कही।
--आईएएनएस